मुखपाक( मुंह आना ) होने के कारण, लक्षण और घरेलू एवं आयुर्वेदिक उपाय

कल्याण आयुर्वेद- मुखपाक, मुंह आना, मुंह का पकना, मुख प्रदाह.


मुंह की श्लेष्मिक कला के सूजन को मुखपाक कहते हैं. इस रोग में मुंह के भीतर ओष्ठ, जीभ, तालु और कपोलो के अंदर व्रण व छाले हो जाते हैं. इससे रोगी को अतिशय कष्ट तथा पीड़ा होती है. प्रभावित भाग लाली लिए हुए शोथयुक्त तथा संवेदनशील होता है. अधिकांश केसों में ओष्ठ पर सूजन मिलती है. मुंह से लार आती है तथा उपरी सर्वाइकल लिंफ ग्लैंडस बढ़ जाते हैं. कोई भी चीज खाने में कष्ट होता है. जिसके कारण मन व्याकुल रहता है.


किसी भी व्यक्ति के मुंह में सामान्यता बहुत से जीवाणु होते हैं जो कि उसके ओरल हाइजीन अर्थात मुंह की सफाई पर निर्भर करते हैं. ओरल हाइजीन के अभाव में यह जीवाणु अधिक हो जाते हैं. जिसके कारण स्टोमाटाइटिस या जिंजिवाइटिस हो जाता है.

इस रोग में मुंह के अंदर जीभ, तालु और होठों पर अल्सर या छाले पड़ जाते हैं. यह रोग गले में भी फ़ैल सकता है.

मुखपाक होने के सामान्य कारण-

तीक्ष्ण औषधियों तथा गरम मसाले के अधिक सेवन से.

अशुद्ध पारद तथा कच्चे अशुद मेटल्स एवं भष्मों के कुछ काल तक सेवन करने से.

कृमि दन्त, दंतबेस्टशोथ एवं नियमित सफाई ना होने के कारण.

विशेष कीटाणु यथा डिप्थीरिया,  ऑर्गेनिज्म, स्ट्रैप्टॉकोक्कस तथा सिफलिस जीवाणु, परनीसीयस, एनीमिया, स्परू, बेरी- बेरी आदि के प्रभाव.

विटामिन बी तथा विटामिन सी का अभाव होना.

पेट की गड़बड़ी से एवं अन्य रोगों के उत्पन्न होने से और एलर्जी कारणों से निर्बलता इस रोग का प्रमुख कारण है.

अधिक तंबाकू, शराब तथा धूम्रपान का सेवन करने से-


मुखपाक के लक्षण-

इसमें जीभ के अंकुर नष्ट हो जाते हैं और छोटे-छोटे व्रण बन जाते हैं. जो दर्द युक्त होते हैं. यह अल्सर एक के बाद दूसरे निकलते जाते हैं. एक अथवा अनेक अल्सर भी मिल सकते हैं.

यह अल्सर पीले रंग के होते हैं. इनके चारों तरफ लाल रंग का खेरा होता है.

इस रोग का आक्रमण कुछ दिनों अथवा कुछ सप्ताह तक रहता है और फिर स्वतः ही ठीक हो जाता है. किंतु रोग का आक्रमण इसी प्रकार से बार-बार होता रहता है.

इस रोग में रोगी के भोजन में तनिक भी मिर्च होने से उसका मुंह जलने लगता है.

मुखपाक दूर करने का आयुर्वेदिक एवं घरेलू उपाय-

1 .काला जीरा, कूठ, इंद्रजव इनको चबाने से मुखपाक मुखव्रण तथा मुंह की दुर्गंध दूर होता है.

2 .जावित्री, लौंग, गिलोय, धमासा, हरड़, बहेड़ा, आंवला इनका क्वाथ बनाकर शीतल होने पर शहद मिलाकर पीने से मुख पाक ठीक होता है.

3 .सतवन, कटु, परवल पत्र, हरड़, कुटकी, मुलेठी, अमलतास, लाल चंदन इन सभी को बराबर मात्रा में मिलाकर क्वाथ बनाकर पीने से मुखपाक ठीक होता है.

4 . दारू हल्दी के स्वरस में शहद मिलाकर पीने से मुखपाक, मुख के अन्य रोग नाड़ी व्रण तथा रुधिर विकार ठीक होता है.

5 .बिजोरा के फल की छाल खाने से मुंह की दुर्गंध नष्ट हो जाती है एवं मुखपाक से राहत मिलता है.


6 .अमरूद के पत्ते चबाने से मुखपाक ठीक होता है.

7 .त्रिफला चूर्ण यानी हरे, बहेरा, आंवला का चूर्ण एक चम्मच चबाकर गुनगुना पानी पीने से भूखपाक ठीक होता है.


8 .सत मुलेठी, पिपरमिंट, छोटी इलायची, लौंग, जावित्री, कपूर सबको बराबर मात्रा में लेकर पीसकर पानी से रति प्रमाण गोली बनाकर चूसने से मुखपाक के साथ मुख के कई रोग ठीक हो जाते हैं.

9 .बबूल के पत्ते चबाने से मुख पार्क से राहत मिलती है.


10 .कत्थे को महीन पीसकर उसमें थोड़ा सा शहद मिला लें. अब इसे मुख पार्क में लगाएं और मुंह झुका कर लार को नीचे टपकाए दिन में तीन- चार बार ऐसा करने से ठीक हो जाता है.


11 .शहद में फुला हुआ सुहागा को अच्छी तरह मिलाकर मुंह के छालों पर लगाने से ठीक हो जाता है.

12 .आंवले का चूर्ण सुबह-शाम 5-5 ग्राम की मात्रा में गर्म पानी से सेवन करने से मुखपाक ठीक हो जाता है.


13 .रात को सोते समय एक दो चम्मच इसबगोल की भूसी पानी के साथ सेवन करने से लाभ होता है.


14 .पानी में टमाटर का रस मिलाकर कुल्ले करने से मुख पार्क से राहत मिलता है.



15 .धनिया को पीसकर पाउडर बना लें. अब इस पाउडर को मुंह के छालों पर बुरककर लार नीचे गिराए इससे मुंह के छालों से राहत मिलेगी.


16 .इलायची के छिलकों को सुखाकर पीस लें. इस चूर्ण को पानी में भिगोकर या पानी से पेस्ट बनाकर तालू पर लगाएं.

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