साइटिका ( गृध्रसी ) रोग होने के कारण, लक्षण और घरेलू एवं आयुर्वेदिक इलाज

कल्याण आयुर्वेद- गृध्रसी, कटीस्नायु शूल, अर्कुलनसा, साइटिका, कुलंग, लंगडी का दर्द, वायु की पीड़ा एवं कूल्हे, जांघ का दर्द आदि नामों से जाना जाता है.

साइटिका ( गृध्रसी ) रोग होने के कारण, लक्षण और घरेलू एवं आयुर्वेदिक इलाज


यह एक विशिष्ट प्रकार का दर्द है जो नितंबों से शुरू होकर टखनों तक जाने वाली स्नायु यानी गृध्रसी नाड़ी में दर्द होने से उत्पन्न होता है. अर्थात यह साइटिका नर्व की सोथ युक्त अवस्था है. गृध्रसी तंत्रिका विकृत हो कर कमर से लेकर पैर के टखने तक भयंकर दर्द होती है. कभी कभी एक पैर और कभी कभी दोनों पैरों में दर्द होता है. जो बाद में बढ़कर अधिक हो जाता है इसे कुलंग रोग कहते हैं.

साइटिका ( गृध्रसी ) रोग होने के कारण, लक्षण और घरेलू एवं आयुर्वेदिक इलाज


साइटिका होने के कारण-

1 .नितंब संधिशोथ-

2 .कशेरुका शोथ.

3 .गठिया, वायु, उपदंश आदि रोग के कारण.

4 .स्नायु दुर्बलता, ठंड लगने, अधिक कठोर परिश्रम करने, अधिक चलने से.

5 .चोट लगने से.

6 .स्थानिक अस्थियक्ष्मा.

7 .श्रोणिगत अर्बुद का दबाव पड़ने से.

8 .इंटर वर्टेब्रल डिम्ब का फटना.

9 .एक ही स्थान पर लंबे समय तक बैठे रहने से.

10 .जो लोग घंटों कुर्सी पर बैठकर लगातार काम करते हैं उनमें साइटिका होने का अधिक संभावना रहता है.

11 .किसी भी कारण साइटिका नस पर दबाव पड़ने से.

अन्य कारण-

कुछ लोग इसका कारण फोकल सेप्सिस ( Focal sepsis ) मानते हैं. आमवात, अल्कोहल का ज्यादा सेवन करना, मधुमेह आदि भी इसका कारण हो सकता है.

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सहायक कारण-

1 .ठंडक तथा कमर की मांसपेशियों में झटका लगने से दर्द अधिक हो जाता है.

2 .अत्याधिक साइकिल, मोटरसाइकिल चलाने से भी नाड़ी पर दबाव पड़ता है. जिससे साइटिका हो जाता है.

3 .वैसे लोग साइटिका के दर्द से पीड़ित रहते हैं जिनके कूल्हे की हड्डी में किसी प्रकार का कोई विकार अथवा रोग होता है.

4 .कूल्हे और उसके नीचे जांघ के पिछले भाग में जहां जहां से होकर साइटिका नस गुजरती है वहां पर कोई संघातक चोट लग जाना अथवा किसी प्रकार का दबाव पड़ना अथवा गंभीर शल्यक्रिया से कोई विकृति हो जाने पर यह रोग हो जाता है.

5 .गठिया, वात रोग भी इस रोग के लिए जिम्मेदार हैं.

6 .जिन लोगों के शरीर में पहले से उपदंश, सूजाक, फिरंग, सिफलिस आदि रोग का घातक विष मौजूद रहता है. उनको 40 वर्ष की आयु के बाद साइटिका का रोग निश्चित ही होता है.

साइटिका के लक्षण-

* इस रोग में कमर से लेकर पैर तक साइटिका नस में लगातार दर्द होता है.

साइटिका ( गृध्रसी ) रोग होने के कारण, लक्षण और घरेलू एवं आयुर्वेदिक इलाज


* रोग के प्रारंभ में रोगी के नस में सुन्नता तथा झुनझुनाहट प्रतीत होती है. जिससे रोगी को चलने- फिरने, उठने- बैठने और लेटने के समय अत्यंत कष्ट होता है.

* इस दर्द में नितंबों से लेकर घुटने के पिछले हिस्से तक और कभी-कभी एड़ी तक की एक लकीर से खींची हुई प्रतीत होती है.

* कभी-कभी यह दर्द अधिक तेज होता है अथवा कभी कभी बहुत हल्का हो जाता है. तीव्र दर्द के समय रोगी का खड़ा रहना मुश्किल हो जाता है.

* इस रोग में सबसे पहले एक तरफ की साइटिका नाड़ी में ही दर्द होता है. दर्द किसी समय टांग में और किसी समय घुटने के पिछले हिस्से में प्रतीत होता है. यह दर्द कभी-कभी एक टांग में तो कभी-कभी दोनों टांगों में हो जाती है.

* साइटिका नाड़ी का दर्द यद्यपि बराबर बना रहता है फिर भी बिना पैर मुड़े आगे झुकने से, हंसने से अथवा छिकने से दर्द में बढ़ोतरी होती है.

कैसे समझें यह दर्द साइटिका ही है?

1 . साइटिका नाड़ी या उसकी शाखाओं के मार्ग पर दबाने से यदि रोगी को दर्द प्रतीत होता हो तो इस रोग का संदेह करना चाहिए.

2 .रोगी को कमर के बल लिटा कर टांग को बिना मोड़े बंक्षण संधि पर संकुचित करने अथवा थोड़ा उठाने पर दर्द होने लगता है तो उसकी पीछे की मांस पेशियों के ऊपर के भाग में फाइब्रोसिस अथवा बातिक साइटिका का संदेह करना चाहिए.

सामान्य चिकित्सा-

1 .रोगी को कठोर बेड पर यानी सीधे बेड चौकी या पलंग पर दो-तीन सप्ताह तक विश्राम देना अति आवश्यक है.

2 .पैर पर मालिश नहीं करनी चाहिए इससे दर्द बढ़ता है.

3 .एनिमा के द्वारा आंतों की सफाई करनी चाहिए.

4 .यदि मधुमेह हो तो उसकी उचित चिकित्सा करनी चाहिए.

5 .स्थानिक रूप से किसी वेदनाहर औषधि का उपयोग करना चाहिए. साथ ही गर्म पानी की बोतल का सिकाई करें. इससे लाभ ना होने पर इंफ्रारेड का उपयोग करना चाहिए.

6 .यदि दांतों की जड़ में पीप की उपस्थिति मिले तो उसकी उचित चिकित्सा आवश्यक है.

7 .ऐसा कोई काम ना करने दें. जिससे कमर एवं पैर पर वजन पड़े.

साइटिका का आयुर्वेदिक एवं घरेलू उपाय-

1 .एरंड तेल 20 मिलीलीटर और गोमूत्र 60 मिलीलीटर मिलाकर सुबह- शाम पिए और कृष्णा चूर्ण 3-3 ग्राम मधु से सेवन करें. इसके सेवन से पेट साफ होकर दर्द से राहत मिलेगी.

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2 .योगराज गुग्गुल 3-3 गोली दोपहर और शाम को महारास्नादि क्वाथ से सेवन करें.

3 .लहसुनादि वटी दो-दो गोली सुबह- शाम गुनगुने पानी के साथ सेवन करें.

4 .महानारायण तेल या विषगर्भ तेल या ज्योतिषमति तेल से मालिश करें.

नोट- ऊपर बताए गए आयुर्वेदिक औषधियों का नियमित सेवन करने से पुराने से पुराने साइटिका दूर होते देखा गया है.

इसके अलावा आयुर्वेद की कनकसुंदर रस, वातादि रस, जातिफल चूर्ण उत्तम है. बातनाशक और पौष्टिक पदार्थ खाने को दें.

5 .लहसुन की 2-3 कलियों को घी में तलकर सुबह खाली पेट चबाकर खाएं और गाय का दूध पिए. इसके नियमित सेवन करने से साइटिका दर्द से राहत मिलती है.

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6 .हरसिंगार के ढाई सौ ग्राम पत्ते को अच्छी तरह से साफ करके 1 लीटर पानी में उबालें. जब यह 500 मिलीलीटर बच जाए तो उतार कर इसे ठंडा करके छान लें. अब इसमें 1-2 रत्ती केसर मिलाकर प्रतिदिन 1 से 2 कप पिए. इसके नियमित कुछ दिनों तक सेवन पीने से साइटिका दर्द से निजात मिलती है.

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7 .सहजन साइटिका को दूर करने में मददगार होता है. सहजन के हरी पत्तियों, फल, सूखी पत्तियों में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, विटामिन ए, विटामिन सी और विटामिन बी कंपलेक्स प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो कि साइटिका को दूर करने में मददगार होता है. इसके लिए 100 ग्राम मुनगा ( सहजन ) की पत्ती लेकर 1 लीटर पानी और 25 ग्राम अजवाइन एवं 10 ग्राम मरीज का पाउडर मिलाकर उबालें. जब उबलते- उबलते 500ml बच जाए तो इसे आंच से उतारकर छान लें. अब इसमें इतना शहद डालें की यह स्वादिष्ट हो जाए. अब इसमें से 25 मिलीलीटर की मात्रा में सुबह-शाम पीने से साइटिका का दर्द ठीक हो जाता है.

साइटिका ( गृध्रसी ) रोग होने के कारण, लक्षण और घरेलू एवं आयुर्वेदिक इलाज


8 .100 ग्राम अजवायन को भूनकर पीसकर पाउडर बना लें. अब इसमें 5 ग्राम सेंधा नमक और 2 ग्राम भुनी हुई हींग का पाउडर मिलाकर सुरक्षित रख लें. अब एक चम्मच की मात्रा में खाना खाने के बाद सुबह- शाम इस पाउडर को सेवन करें एवं गुनगुना पानी पी लें. इसके नियमित सेवन करने से साइटिका दर्द से राहत मिलती है.

साइटिका ( गृध्रसी ) रोग होने के कारण, लक्षण और घरेलू एवं आयुर्वेदिक इलाज


आयुर्वेद चिकित्सक- डॉ. पी.के. शर्मा. ( एच.एल.टी. रांची )

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