नारी देह स्थौल्य (थायरायड ) होने के कारण, लक्षण एवं आयुर्वेदिक इलाज

कल्याण आयुर्वेद- इस रोग में महिला अतिशय मोटी हो जाती है. उसका शरीर भारी हो जाता है. शरीर पर चर्बी ही चर्बी दिखाई देता है. शरीर की स्थूलता के परिणाम स्वरूप महिला अनेक रोगों से कालांतर में ग्रसित हो जाती है.
नारी देह स्थौल्य (थायरायड ) होने के कारण, लक्षण एवं आयुर्वेदिक इलाज

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नारी देह स्थौल्य रोग होने के कारण-
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दिन में सोना, एक्सरसाइज नहीं करना, स्नेहयुक्त श्लेष्मल पदार्थों का पर्याप्त मात्रा में सेवन करते रहना इस रोग के प्रमुख कारण है. आधुनिक चिकित्सा विद्वानों का मत है कि थायराइड ग्लैंड में विकृति आने के कारण इस रोग की उत्पत्ति होती है.
नारी देह स्थौल्य (थायरायड ) होने के कारण, लक्षण एवं आयुर्वेदिक इलाज


इस रोग में मेद बढ़ने पर स्रोतों का मार्ग अवरुद्ध हो जाता है. इस रोग के परिणाम स्वरुप धातुओं का पोषण बंद हो जाता है. इसलिए मेद संग्रहित हो जाता है. मेद अधिकतर अस्थियों एवं उदर में रहता है. इसी कारण स्थूलता अधिकांश रुप से उदर में ही बढ़ती है. मेद के परिणाम स्वरुप वायु मार्ग अवरुद्ध के कारण पेट में ही भ्रमण करती रहती है. जिससे जठराग्नि की वृद्घि सामान्य से अधिक हो जाती है. यह खाए हुए भोजन को सुखा देती है. इससे भोजन का पाचन शीघ्र हो जाता है और महिला भोजन की अधिक इच्छा करने लगती है. इस प्रकार यह क्रम निरंतर चलता रहता है और महिला में अनावश्यक भोजन की मात्रा बढ़ती जाती है. परिणाम स्वरुप वह दिन पर दिन स्थूल होती जाती है.

नारी देह स्थौल्य के लक्षण-

महिला का स्थूल होना ही इसका मुख्य लक्षण है. इसके अतिरिक्त उपद्रव स्वरूप श्वास, तृषा, निद्रा, गले में घर-घराहट, अवसाद, क्षुधा, अति आर्तव, अनार्तव, आर्तव की अनियमितता, कष्टार्तव, बंध्यता, कैंसर, शरीर से दुर्गंध का आना, शरीर में दर्द रहना आदि रोग हो जाते हैं.
नारी देह स्थौल्य (थायरायड ) होने के कारण, लक्षण एवं आयुर्वेदिक इलाज


महिला के नितंब, पेट तथा स्तन नीचे की ओर लटक जाते हैं. साथ ही वह उत्साहीन हो जाती है. शरीर में शक्ति का पूर्ण रूप से अभाव हो जाता है.

नारी देह स्थौल्य (थायरायड ) का आयुर्वेदिक इलाज-

निम्न शास्त्रीय योगों में से किसी एक का विधिवत प्रयोग करना फायदेमंद होता है.

1 .अमृतादि गुग्गुल- 960 मिलीग्राम की मात्रा में शहद मिलाकर पानी के साथ सेवन करना चाहिए.
2 .त्र्युषनादि लौह- 240 मिलीग्राम से 480 मिलीग्राम की मात्रा में मधु के साथ सेवन करना चाहिए.
3 .विडंगादि लौह- एक से दो गोली शीतल जल के साथ सेवन करना चाहिए.
4 .नवक गुग्गुल- 480 मिलीग्राम की मात्रा में अश्वगंधादि चूर्ण के साथ मिलाकर दूध के साथ सेवन करना चाहिए.
5 .कामिनी कुल मंडल रस- 1-2 गोली सुबह- शाम गाय के दूध के साथ सेवन कराएं. साथ ही अशोकारिष्ट 20- 20 मिली लीटर का सेवन कराएं.
6 .त्रिफलादि तेल- इसका प्रयोग विभिन्न मार्गों से यथा- नस्य, मालिश, वस्ती एवं पान के रूप में किया जाता है.

यदि नियमित रूप से ऊपर बताए गए औषधियों में से किसी एक का सेवन कराया जाए और नियमित रूप से त्रिफलादि तेल की मालिश की जाए तो नारी देह स्थौल्य में आशातीत लाभ होता है.

अनुभव की मोती-

कांचनार गुग्गुल 2-2 गोली, अशोकारिष्ट 20- 20 मिलीलीटर सुबह- शाम और रात को त्रिफला चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में गुनगुने पानी के साथ नियमित सेवन करने से नारी देह स्थौल्य में अच्छा लाभ होता है.

नोट- नारी देह स्थौल्य में आहार-विहार का विशेष महत्व होता है. अतः इसका कड़ाई से पालन करना चाहिए. इस रोग में अधिकाधिक शारीरिक श्रम एवं व्यायाम करना चाहिए. चक्की चलाना, भ्रमण करना, लंघन, गर्म पानी से स्नान आदि फायदेमंद होता है.

महिला को पथ्य में जौ, चना, तिल, बाजरा, मूंग, मटर, अरहर, मोठ, वंशपत्र यह सभी 1 वर्ष के पुराने चीजों का सेवन कराना चाहिए, बैगन का भरता, कषाय रस वाले पदार्थ, पत्तों का साग, सहजन की फली का साग मेद नाशक, सुखी वस्तुओं का सेवन फायदेमंद होता है.भोजन से पहले कुछ पानी पिए.

इन चीजों से परहेज रखें-

महिला को चावल, गेहूं, उड़द, दूध, मलाई, दही, रबड़ी, मांस, मछली, शक्कर, आलू, तेल, घी, खट्टे पदार्थ, ठंडी पदार्थ का सेवन ना कराएं.

इस रोग की चिकित्सा 6 माह से 1 वर्ष तक करनी पड़ती है.

यह आलेख स्त्रीरोग चिकित्सा से ली गयी है.

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