गर्भधारण करने के लिए कब करना चाहिए सेक्स, जानें विस्तार से

हर महिला जीवन में एक बार माँ जरूर बनना चाहती है, क्योकि गर्भवती होना महिला को अनेकों प्रकार के ख़ुशी के पल से अवगत कराता है.  यदि आप  भी माँ बनने के बारे में सोच रही है तो ऐसे में आपको  इसके प्रति शारीरिक और मानसिक रूप से  तैयारी आरम्भ कर देनी चाहिए. माँ बनने का बेसब्री से इंतज़ार कर रही महिलाओं के लिए सबसे पहले  गर्भ ठहरने के लक्षण जानने की आवशयकता होती है, और गर्भवती होने  का सबसे पहला कदम  उपयुक्त समय पर सेक्स करना  होता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आपके गर्भधारण करने की  अधिक से अधिक संभावना हो. रिसर्च के आकड़े बताते हैं कि  एक औसतन  गर्भधारण करने से पहले कम से कम 78 बार सेक्स करने की आवश्यकता होती है. जिसका मतलब लगभग छह महीने का समय हो सकता हैं.
गर्भवती होने के लिए आपको यह  जानना बेहद जरूरी है कि आपकी बॉडी किस  प्रकार से काम करती है. फिर चाहे वह आपका पीरियड साइकल हो या फिर उन दिनों के बारे में जानना हो , जिस समय आपकी  बॉडी सबसे  अधिक फर्टाइल अवस्था में होती है. गर्भधारण करने के लिए दो बातों का सबसे अधिक ध्यान रखना जरुरी होता है, पहला कि आप अपने  पीरियड्स साइकल का सही सही हिसाब रखें, इसके लिए आप चाहें तो कैलेंडर में मार्क करने का बहुत पुराना तरीका भी प्रयोग  कर सकती हैं या आज कल के आधुनिक जमाने में बहुत से ऐप्स  का भी प्रयोग कर सकती हैं, जो आपके पीरियड्स साइकल को ट्रैक करने और उनका सही-सही हिसाब रखने में आपके लिए लाभकारी हो सकते हैं. दूसरी सबसे अधिक ध्यान देने वाली बात यह है कि गर्भधारण के लिए सेक्स करने का सबसे सही समय कौन सा  होना चाहिए है.
ऐसा देखा गया है कि प्रेगनेंसी के शुरुआती लक्षण सभी महिलाओं में एक जैसे नहीं होते हैं. एक गर्भवती को जो गर्भ ठहरने पर लक्षण महसूस  होते हैं, वह ज़रूरी नहीं कि दूसरी गर्भवती की भी महसूस हो.
किन चीजों से महिलाओं  में गर्भवती होने की संभावनाएं बढ़ जाती है?
यह सुनिश्चित अवश्य  करें कि आप और आपके पति आपके गर्भधारण के लिए पूरी तरह से मानसिक और शारीरक तरह से फिट है. इसके साथ ही नियमित रूप से असुरक्षित प्रेम संबंध बनाना सबसे महत्वपूर्ण है.
* सप्ताह में एक बार सेक्स करना पर्याप्त नहीं होगा. ऐसे में लगभग हर दूसरे या तीसरे दिन सेक्स करने की कोशिश करें.
* गर्भवती होने की सम्भावना बढ़ाने के लिए ओव्यूलेशन के एकदम सही समय का पता होना और उस समय सेक्स करना, जल्दी गर्भधारण में मदद प्रदान कर सकता है.  आपके गर्भवती होने की संभावना आपके पीरियड चक्र के उन दिनों में ज्यादा होती है, जब आप बहुत फर्टाइल होती हैं.
* यदि आप हर दूसरे या तीसरे दिन सेक्स करें, तो भी गर्भवती होने की आपकी संभावना उतनी ही रहती है, जितनी कि आपके ओव्यूलेशन के दिनों में.
* आप अपने शरीर में होने वाले बदलाव को खुद से भी महसूस कर सकती हैं जो संकेत देते हैं कि आप इस समय अधिक फर्टाइल हैं, जैसे कि सर्वाइकल म्यूकस का बढ़ जाना आदि. ऐसे दिनों में आपको प्रयास करना चाहिए कि आप कम से कम एक या दो बार सेक्स अवश्य करें.
* सामान्यत: प्रजनन विशेषज्ञ से सलाह लें कि गर्भवती होने के लिए कौन सी सेक्स स्थिति बेहतर रहेगी. कई धारणाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि गर्भधारण करने के लिए कुछ विशेष सेक्स स्थितियां बेहतर साबित होती है.
गर्भवती होने के लिए सेक्स करने का सही  समय  क्या होना चाहिए ?
यह तो हर कोई जानता है कि संतान उत्पन्न करने के लिए सेक्स की जरुरत होती है ,परन्तु अभी भी  लगभग 60 फ़ीसदी से भी अधिक लोगों को यह नहीं पता है कि संतान उत्पत्ति के लिए सेक्स  करने का सबसे अच्छा समय क्या होता है या हम इसको दूसरी भाषा में कह सकते हैं कि किस समय के दौरान सेक्स करने से महिला के गर्भवती होने की सम्भावना बढ़ जाती है. अधिकांश लड़कियों को शादी के बाद यह बात सही से नहीं पता होती  है  कि मासिक धर्म के कितने दिन बाद उनके गर्भवती होने की संभावना  बहुत अधिक बढ़ जाती है.
आइये आपको बताते हैं कि अगर आप गर्भवती होना चाहती है तो कब सेक्स करना आपके लिए बेहतर होगा-
अधिकांश  महिलाओं का मासिक धर्म 28-35 दिन का होता है,  यदि  किसी महिला का मासिक धर्म 1 तारीख  आया और लगभग यह 5 तारीख हो ख़त्म होगा. ऐसे में आपको 1 तारीख अपने डायरी में नोट कर लेना चाहिए  और अगले पीरियड  की तारीख  का इन्तजार  करें. मान लीजिये आपका अगला पीरियड भी 1 तारीख को आया तो  आप फिर से यह तारीख अपनी डायरी में  नोट कर लें. इस गणित के अनुसार आपका पीरियड का अंतराल 30 दिनों का होना चाहिए. अब 30 दिन  के आधे दिन के हिसाब से 15 तारीख के आस पास अगर आप सेक्स करेंगी तो गर्भवती होने की सम्भावना बहुत अधिक  बढ़ जायेगी. इसका कारण यह है कि 15 तारीख के आस पास आपकी ओवरी से एक अंडा निकलता है, जिसका जीवन 24 घंटे होता है, इस 24 घंटे में पुरुष  का स्पर्म आपके अंडे के संपर्क में आया तो स्पर्म के अंडे में प्रवेश करने के पूरी आशंका होती है और आप गर्भवती हो सकती हैं.
ऐसे में यह बिलकुल जरूरी नहीं कि आप अगर 15 वें दिन ही सेक्स करें तभी आप गर्भवती हों सकती हैं, अगर आप 13 वें या 14 वें दिन भी  सेक्स करेंगी तो भी गर्भवती होने की सम्भावना अधिक हो सकती है. इसके अलावा 16 वें या 17वें दिन भी सेक्स करना आपको गर्भवती बना सकता हैं. इस बात को ऐसे समझते हैं, मान लीजिए आपने 13 वें या 14  वें दिन  सेक्स किया, तो ऐसे में स्पर्म आपके गर्भाशय में 2-3 दिन तक घूमता  रहेगा, क्योकि माना जाता है कि महिला के गर्भ में पुरुष का स्पर्म लगभग 72 घंटे तक एक्टिव अवस्था में रहता है, ऐसे में 14वें या 15वें दिन अंडा निकलने पर स्पर्म अंडे में प्रवेश कर सकता और आप गर्भवती हो सकती हैं.
मान लीजिए यदि अंडा 15 को निकला तो , ऐसे में वह 24 घंटे जिन्दा रहेगा, और ऐसे में यदि 16 या 17वें दिन  सेक्स किया गया तो भी गर्भवती होने की पूरी उम्मीद हो सकती हैं. मतलब बीच के पांच दिन में गर्भवती होने की सबसे अधिक संभावना रहती है. इसलिए  यदि आप शिशु को जन्म देने के बारे में सोच रही हैं तो इन  पांच दिनों में या तो रोजाना या दूसरे दिन सेक्स करने का अवश्य प्रयास करें. पीरियड ख़त्म होने के लगभग 10 दिन पहले और 10 दिन  बाद तक आप बिना कंडोम का प्रयोग किये सेक्स कर सकती हैं क्योकि इस दौरान आपके गर्भवती होने की सम्भावना बहुत ही कम होती है.
नोट : अतः यह बात तो यह है कि  प्रेगनेंसी प्लान करने के लिए  महिला को अपने  ओवुलेशन का सही समय पता होना चाहिए. इसके लिए  सबसे जरुरी है कि आपको यह ज्ञात होना चाहिए कि आपके मासिक धर्म का केलेन्डर क्या है? हर महिला के मासिक धर्म की साइकिल 24 से 40 दिन के बीच की होती है. यदि आपको पता है कि आपका अगला मासिक धर्म कब आने वाला हैं तो उस डेट से 12 से 15 दिन पहले की डेट पता होने पर आप अपनी ओवुलेशन पीरियड को जान सकते हैं. इस प्रकार इस दौरान सेक्स करने से आपके गर्भवती होने की संभावना बहुत अधिक बढ़ जाती है.
ऑव्युलेशन क्या है ?
ओव्यूलेशन महिलाओं के मासिक धर्म का एक हिस्सा होता है. जब किसी महिला के अंडाशय से अंडे निकलते हैं तो इस प्रक्रिया को ओव्यूलेशन कहते हैं. अंडोत्सर्ग के दौरान जब ये अंडे अंडाशय में बनते हैं. तब ये शुक्राणु द्वारा निषेचित हो भी सकते हैं और नहीं भी. यदि ये अंडे निषेचित हो जाते हैं तो महिला के फैलोपियन ट्यूब से भ्रमण करते हुए गर्भाशय में पहुंच जाते हैं. जिसके कारण महिला गर्भवती हो जाती है. लेकिन जब ये अंडे निषेचित नहीं हो पाते हैं तो ऐसे में ये  यूट्रस द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं और फिर मासिक धर्म के दौरान शरीर से बाहर निकाल दिए होते हैं.
ओवुलेशन के लक्षण क्या हैं?
महिलाओं को अपने ओवुलेशन पीरियड की जानकारी होने के साथ साथ यह भी जानना बहुत जरुरी होता है कि उनके ओवुलेशन पीरियड के समय उनके शरीर में किस प्रकार के बदलाव महसूस होते हैं.
* बहुत सी महिलाएं जब ऑव्यूलेट करती हैं तो उन्हें ब्रेस्ट में दर्द और सूजन महसूस  हो सकता है.
* ऑव्यूलेशन के दौरान  कुछ महिलाओं में  सेक्स ड्राइव बढ़ जाती है.
* गर्भ ग्रीवा का श्लेम एक तरह का योनि स्राव है जो कभी–कभी आपके पैंटी पर भी देखा जा सकता है. पीरियड्स  के दौरान अधिकतर, बहुत कम श्लेम निकलता है, और यह बहुत चिपचिपा और गाढ़ा भी होता है. लेकिन, ओवुलेशन  के  दौरान और बाद में, इस स्राव में वृद्धि हो जाती है और इसके गाढ़ेपन में भी बदलाव  आता है. यह  चिकना और बहुत लचीला हो जाता  है. इसको आप अपने ओवुलेशन के दिनों के संकेत के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं.
* इस दौरान कुछ महिलाओं की सूंघने की क्षमता तीव्र हो जाती है. यह इस बात का संकेत है कि आपका ओव्यूलेशन पीरियड शुरू होने वाला है.
* ओव्यूलेशन के समय कुछ महिलाओं के पेट के निचले हिस्से  और लोअर बैक में हल्का दर्द  होना शुरू हो जाता है, कभी-कभी यह दर्द पेट के एक ही हिस्से में भी हो सकता है. इस दौरान कुछ महिलाओं का  सिर भारी और उनमें मूड स्विंग होने की भी सम्भावना हो सकती.
* ऑव्‍युलेशन के  दौरान आपकी गर्भाशय ग्रीवा ऊपर, नरम और अधिक खुली हुई होती है. यह ऑव्‍युलेशन का संकेत हो सकता है.
* ऑव्‍युलेशन के  दौरान महिला के शरीर का तापमान अधिक बढ़ जाता  है. शरीर का तापमान में हल्‍की सी बढ़ोत्‍तरी ऑव्‍युलेशन का संकेत होती है. ऑव्‍युलेशन के कुछ दिन के बाद भी तापमान में अधिकता रह सकती  है.
* ऑव्‍युलेशन के समय अधिक डिस्‍चार्ज होने के लक्षण भी दिख सकते हैं. ऐसा ऑव्‍युलेशन से ठीक पहले और इसके दौरान होता है. इस दौरान आपका शरीर सबसे अधिक उत्‍पादित मसक का निर्माण करता है.
ओवुलेशन प्रक्रिया क्या है?
जैसा की हम जानते हैं की ओवुलेशन  की प्रक्रिया  आमतौर पर आपके मासिक धर्म की अवधि शुरू होने के 12वें दिन से 16वें पर होती है. ऐसा माना हटा है जब एक लड़की का जन्म होता है. तब तब उस समय उसकी ओवरी में लगभग 2 करोड़ अंडे उपस्थित हैं जो लड़की के  पीरियड्स शुरू होने तक लगभग 500,000 तक रह जाते हैं. प्रत्येक महिला के मासिक धर्म चक्र के दौरान, एक अंडा विकसित और परिपक्व होता है. ओवुलेशन पीरियड  के दौरान महिला के  शरीर में एस्ट्रोजन नामक  हार्मोन उत्पन्न होता है, जो आपके यूटेरस की लाइनिंग को मोटाई प्रदान करता है और स्पर्म को अंदर प्रवेश करने के लिए अनुकूल वातावरण  प्रदान करता है. हाई एस्ट्रोजन हार्मोन ल्यूटिनाइजिंग हार्मोन (LH) में वृद्धि प्रदान करता है. ‘LH’ में वृद्धि  के कारण ही ओवरी से परिपक्व अंडा आसानी से  बाहर निकल पाता है और अंडे निकलने की प्रकिर्या ही ओवुलेशन  कहलाती हैं.  अधिकांशतः, LH होर्मोनेस में वृद्धि के 24 से 36 घंटे बाद ओवुलेशन होता है, यही वजह है कि LH में वृद्धि होना फर्टिलिटी होने के अधिक सम्भावना को बढ़ा देता है.
अगर ओव्यूलेशन अवधि जानने के बाद भी गर्भधारण में समस्या होती हैतो इन चीजों को जांचना चाहिए:
वजन: महिला का वजन सामान्य से कम है या बहुत अधिक होना भी प्रजनन क्षमता के लिए हानिकारक हो सकता है.  स्वस्थ शरीर के लिए बॉडी मास इंडेक्स (BMI) 18 से 24 के बीच होना चाहिए. अतः यदि आप प्रेग्नेंसी की तैयारी में हैं तो आपको अपना बॉडी मास इंडेक्स (BMI) समान्य रखने की कोशिश करना चाहिए.  कई  अध्ययन से यह बात सामने आई है कि मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) होने की बहुत अधिक  आशंका रहती है, जो बांझपन का एक प्रमुख कारण बन सकती है. वही दूसरी ओर, कम वजन होने से लेप्टिन हार्मोन की कमी आपकी भूख को नियंत्रित कर सकती है. जिसकी वजह से आपके पीरियड्स में दिक्कत पैदा हो सकती है. जिसकी वजह से आपकी प्रजनन क्षमता कम हो सकती है. आज कल लोग अपने फिटनेस को लेकर बहुत ही उत्साहित रहते है. जिसके लिए नियमित रूप से जिम भी जाते हैं. फिट रहना महत्वपूर्ण है, लेकिन कई बार फिटनेस को लेकर बहुत अधिक उत्साही होना भी आपके लिए हानिकारक हो सकता है. कई अध्ययन के अनुसार कठिन व्यायाम करना आपके मासिक चक्र को  प्रभावित  कर सकता हैं, जिससे गर्भ धारण में समस्याएं पैदा हो सकती हैं.
महिला का पहले से किसी बीमारी से ग्रषित होना- 
यदि  आप किसी प्रजनन संबंधी  समस्यायों से पहले से ग्रषित  हैं तो ऐसे में अपने डॉक्टर से परामर्श लेने में देरी न करें. क्योकि इस प्रकार की बीमारियां आपको प्रेग्नेंट होने में बाधा पंहुचा सकती हैं. कई बार देखा गया है कि क्लैमाइडिया और गोनोरिया जैसे यौन संक्रमण सालों बाद भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं. अपने डॉक्टर से परामर्श लेकर मधुमेह, अस्थमा, थाइरॉयड, मिर्गी जैसी बीमारियों की जांच करवाएं. क्योकि इस प्रकार की बीमारियां आपके गर्भधारण को प्रभावित कर सकती हैं. यौन संक्रमित बीमारियों की भी जांच कराना जरुरी होता है. क्योंकि प्रेग्नेंसी की बात आने पर आपको अपनी मेडिकल हिस्ट्री के बारे में पता होना बहुत  जरूरी होता  है.
तनाव- अध्ययन के अनुसार  बहुत अधिक तनाव भी  गर्भधारण में समस्याएं उत्पन कर सकता है क्योकि अधिक तनाव के कारण बहुत से हार्मोनल परिवर्तन होते हैं, जिसके परिणामस्वरूप, ओव्यूलेशन में भी बदलाव हो  सकते  हैं.
इसके अतिरिक्त और भी निम्न कारण हो सकते हैं :
* पति और पत्नी की  कोई पुरानी या लंबे समय से चल रही बीमारियां,
* पति और पत्नी दोनों कितना नियमित संभोग करते हैं,
*महिला की  उम्र, आहार और उसकी जीवनशैली,
* आपके पति की उम्र, आहार और उनकी जीवनशैली,
* पति और पत्नी शारीरिक रूप से कितना स्वस्थ हैं,
*अगर आप काफी लम्बे समय से गर्भधारण का प्रयास कर रही हैं और फिर भी असफलता हाथ लग रही हो तब ऐसे में  जल्द से जल्द डॉक्टरी मदद लें.
*गर्भावस्था से पहले डॉक्टरी जांच (प्री-प्रेग्नेंसी चेक-अप) करवा लेना बेहतर विकल्प रहता है.
ओवुलेशन किट कैसे आपके लिए लाभकारी होता है:
*यदि आपकी बहुत सी  कोशिशों के बाद भी गर्भधारण नहीं हो पा रहा  है, तो आपको ओवुलेशन टेस्ट किट की मदद लेनी चाहिए. ओवुलेशन प्रेडिक्टर किट महिला के शरीर में मौजूद ल्यूटीनाइज़िन्ग हार्मोन (LH) में वृद्धि का पता लगाती है. इस होर्मोनेस में वर्द्धि ओवुलेशन से 36 घंटे पहले देखने को मिलती है. विशेषज्ञों के अनुसार ओवुलेशन टेस्ट किट का ज्यादातर प्रयोग उन महिलाओं द्वारा होता है जो बहुत समय  से कोशिश  के बाद भी प्रेग्नेंट नहीं हो पा रही हैं.
* विशेषज्ञों के अनुसार प्रेग्नेंट होने का सबसे अच्छा तरीका ओवुलेशन किट का प्रयोग हो सकता है. एलएच होर्मोनेस के लेवल में वृद्धि के कुछ देर बाद ही अगर आप सेक्स करते हैं, तो पुरूष के शुक्राणु और महिला के अंडे के मिलने की संभावना 99 प्रतिशत तक बढ़ जाती है और महिला के  गर्भधारण करने की संभावना भी अधिक हो जाती है.
ओवुलेशन किट क्या है?
ओवुलेशन किट को ओवुलेशन प्रेडिक्टर किट (OPK) के नाम से भी जानते हैं. इस किट द्वारा आप अपने  मूत्र में ल्यूटिजिनिंग हार्मोन में वृद्धि का पता लगा सकती है. इस किट का  परीक्षण मूत्र में एलएच हार्मोन में वृद्धि के आधार पर आपके ओवुलेशन के समय को बताता है. इस  किट में दो लाइनें होती हैं. एक लाइन कंट्रोल लाइन है. यह लाइन  आपको बताती है कि किट काम कर रही है और दूसरी लाइन टेस्ट लाइन है. जब इस टेस्ट लाइन का  रंग कंट्रोल लाइन की तुलना में गहरा हो जाता है तब वह हॉर्मोन बढ़ा हुआ प्रतीत होता है. यह वह समय है जब आपको  गर्भवती होने  के लिए सेक्स करने की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए.
ओवुलेशन टेस्ट किट के परिणामों की जांच-
पॉजिटिव रिजल्ट मिलने पर- ओवुलेशन टेस्ट किट पर दो लाइने देखने को मिलती हैं, यदि  टेस्ट लाइन कंट्रोल लाइन की तुलना में  अधिक गहरी है तो इसका मतलब है कि आपके एलएच में वृद्धि हुई है और आप अगले 12 से 36 घंटों में ओवुलेशन करने को तैयार हो सकते हैं.
निगेटिव रिजल्ट मिलने पर- यदि टेस्ट लाइन कंट्रोल लाइन से हल्की है, तो इसका मतलब है कि आपके एलएच हार्मोन में कोई वृद्धि नहीं हुई है या फिर केवल एक टेस्ट लाइन या फिर एक कंट्रोल लाइन ही दिख रही हो तो भी इसका अर्थ यही है कि एलएच में कोई बहुत  वृद्धि नहीं हुई है.
ओवुलेशन टेस्ट किट रिजल्ट में कोई रेखा ना दिखना- यदि आपको टेस्ट के दौरान कोई भी कंट्रोल लाइन नहीं दिखती, तो इसका मतलब है कि आपके दवरा टेस्ट गलत तरह से किया गया है. ऐसे में सही परिणाम न मिलने पर इस टेस्ट किट को मूत्र में 5 सैकंड के लिए डुबोकर रखें और 10 मिनट तक इंतजार करें. इसके बाद परिणाम को ठीक से पढ़ें. यदि फिर भी कोई कंट्रोल लाइन न दिखे तो यह बिलकुल क्लियर है कि टेस्ट असमान्य तरीके से किया गया है, इसलिए इस प्रयोग की गई  स्ट्रिप को फेंक दें,  दोबारा इसका  प्रयोग  न करें.
ओवुलेशन किट कितनी सही हैं?
कई महिलाओं में ओवुलेशन टेस्ट किट को लेकर अनेको प्रकार की शंका दिमाग में रहती है जैसे कि इस किट से रिजल्ट सही आएगा या नहीं. तो आपको बता दें कि कैलेंडर और टेम्पेरेचर मैथड की तुलना में ओवुलेशन किट अधिक सही और सटीक परिणाम देती है. इस किट द्वारा लगभग 99 प्रतिशत परिणाम सही आते हैं, बशर्ते इस किट को सही तरीके से प्रयोग  किया  गया हो.  परन्तु इस टेस्ट से  इस बात की पुष्टि करना कठिन होता है कि आपका ओवुलेशन अगले दिन होगा या दो दिन बाद होगा. कुछ महिलाओं में देखा गया है कि उनमें अंडे के निकले बिना ही एलएच में वृद्धि का अनुभव होता है. जिसे ल्यूटिनाइज्ड अनरप्चर्डपॉलिकल सिंड्रोम के रूप में जाना जाता है.
ओवुलेशन डिटेक्शन किट को सही से प्रयोग करने के टिप्स:
कोशिश करें कि लगभग एक ही समय के यूरिन के नमूने को इकट्ठा करें.
* सुबह उठते ही अपने यूरिन द्वारा टेस्ट न करें क्योकि इससे ओवुलेशन किट के रिजल्ट गलत आ सकते हैं.
* इस किट का उपयोग करने से लगभग 2 घंटे पहले तक कोशिश करें कि बहुत अधिक पेय पदार्थ न पिएं क्योकि, अत्यधिक तरल पदार्थ का सेवन आपके मूत्र को पतला कर सकता, जिससे आपके LH लेवल  का पता लगाना मुश्किल हो जाएगा.
*रिजल्ट दस मिनट के अंदर ही चेक करें, पॉजिटिव रिजल्ट गायब नहीं होता है, लेकिन कुछ देर  बाद कुछ निगेटिव रिजल्ट्स के साथ दूसरे रंग का बैंड प्रदर्शित करने लगता है.
* एक बार उपयोग की गई टेस्ट स्टिक को फिर से उपयोग न करें.
* पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (PCOS) से ग्रषित महिलाओं में बहुत अधिक मात्रा में LH हॉर्मोन पाया जाता है, इसलिए उनके केस में ओवुलेशन किट काम नहीं करती है.

Post a Comment

0 Comments