कई पोषक तत्वों से भरपूर होती है ये 10 सब्जियां, सेवन करने से बढ़ जाती है इम्यूनिटी

कल्याण आयुर्वेद- किसी भी सब्जियों का सेवन करना सेहत के लिए फायदेमंद होता है क्योंकि हर सब्जियों में कोई न कोई पोषक तत्व मौजूद होता है जो सेहत को दुरुस्त रखता है.
कई पोषक तत्वों से भरपूर होती है ये 10 सब्जियां, सेवन करने से बढ़ जाती है इम्यूनिटी
इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए सब्जियों का सेवन करने की बात करें तो पत्ता गोभी, गोभी, ब्रोकली, बैगन, शिमला मिर्च, टमाटर आदि की बात आ जाती है. इसके अलावे लोग प्याज, खीरा, ककड़ी, हरी या लाल मिर्च, मूली, धनिया, अदरक, लहसुन, आंवला, नींबू, गाजर, मकई, कच्चा आम आदि का भी खूब सेवन करते हैं.
आमतौर पर बाजार में आपको पत्ता गोभी, फूल गोभी, गिलकी, तोरई, भिंडी, लौकी, बैगन, कद्दू, करेला, पालक, मेथी, अरबी, सरसों का साग, सेम की फली, मटर, ग्वार फली, सहजन, टिंडा, शिमला मिर्च, भावनगरी मिर्च, कटहल, शकरकंद आदि सब्जियां आसानी से मिल जाएगी. लेकिन हम जिस सब्जी के बारे में बात कर रहे हैं वह बहुत ही कम बाजार में मिल पाती है.
इन सब्जियों का सेवन करना मौसम के अनुसार ही बेहतर होता है क्योंकि कुछ की तासीर गर्म होती है तो कुछ की तासीर ठंडी होती है, ऐसी में ठंडी तासीर वाले सब्जियों का सेवन करना सर्दियों में नुकसानदायक होता है तो वही गर्म तासीर वाले सब्जियों का सेवन करना गर्म मौसम में नुकसानदायक हो सकता है.
चलिए जानते हैं उन 10 सब्जियों के बारे में-
1 .केल की सब्जी-
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हम केले की सब्जी की बात नहीं कर रहे हैं. केल की सब्जी के बारे में लगभग सभी लोग जानते होंगे. केल की सब्जी में विटामिंस, खनिज और वैसे सब प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. वैसे केल का प्रयोग सलाद, स्वीटर, फ्राई, स्मूदी, पास्ता आदि के रूप में सेवन किया जाता है. लेकिन इसकी भाजी और भुंजिया भी बनाई जाती है. वनस्पति विज्ञान के अनुसार यह मूली और सरसों परिवार का सदस्य होता है.
2 .ताजा हरा लहसुन-
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जैसे हरा प्याज होता है उसी तरह हरा लहसुन भी होता है. प्याज की लंबी पत्तों की तरह लहसुन के पत्ते भी लंबे होते हैं. इनको काटकर सब्जी बनाई जाती है. जैसे- मूली के पत्तों की सब्जी बनाई जाती है. उसी तरह इसका स्वाद बढ़ाने के लिए लहसुन के पत्तों को किसी अन्य सब्जी जैसे गोभी, आलू के साथ मिलाकर भी बनाया जाता है. यह सेहत के लिए बहुत ही लाभदायक होता है. इसकी सब्जी हृदय रोग और कैंसर जैसे रोग को होने से रोकते हैं. इसके सेवन से इम्यून पावर मजबूत होती है.
3 .अजमोद-
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अजमोद को कई प्रकार से उपयोग में लाया जाता है. अजमोद की सब्जी भी बनाई जाती है. चूर्ण भी, शरबत और चटनी भी बनाई जाती है. अजमोद में इम्यून पावर को मजबूत करने की क्षमता होती है क्योंकि यह विटामिन ए, विटामिन बी और विटामिन सी से भरपूर होती है. इसके अलावा इसमें पोटेशियम, मैग्नीज, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, कैल्शियम, आयरन, सोडियम और फाइबर भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है.
4 .जिमीकंद-
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जिमीकंद को हिंदी में सुरनकंद कहा जाता है. हाथी के पंजे की आकृति के समान होने के कारण इसे अंग्रेजी में एलीफेंट याम या एलीफैंट फुट याम भी कहते हैं. जिमीकंद एक बहुत ही गुणकारी सब्जी होती है. जिमीकंद के पत्ते दो 3 फुट लंबे, गहरे हरे वह हल्के हरे धब्बे वाले होते हैं. इसकी पत्तियां अनेक छोटी-छोटी लंबो त्रिगोल पत्तियों से गुटों में घिरी होती है. इसका कंद चपटा, अंडाकार और गहरे भूरे बादामी रंग का होता है. अनेक संप्रदायों में प्याज, लहसुन के साथ-साथ जिमीकंद से दूर रहने की सलाह दी जाती है क्योंकि इसके सेवन से कामुकता में बढ़ोतरी होती है.
जिमीकंद में विटामिन ए, विटामिन बी मौजूद होते हैं. यह विटामिन बी-6 का अच्छा स्रोत होता है तथा रक्तचाप को नियंत्रित कर हृदय को स्वस्थ रखता है. जिमीकंद में ओमेगा-3 काफी मात्रा में मौजूद होता है. यह खून के थक्के जमने से रोकता है. इसमें एंटीऑक्सीडेंट विटामिन सी और बीटा कैरोटीन पाया जाता है जो कैंसर पैदा करने वाले फ्री रेडिकल से लड़ने में मददगार होता है. इसमें पोटेशियम होता है जिससे पाचन में सहायता मिलती है. इस में तांबा पाया जाता है जो लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाकर शरीर में रक्त के बहाव को बेहतर बनाता है.
आयुर्वेद के अनुसार जिमीकंद उन लोगों को नहीं खाना चाहिए जिनको किसी भी प्रकार का चर्म या कुष्ठ रोग हो. जिमीकंद अग्नि दीपक, रुखा, कसैला, खुजली करने वाला, रुचिकारक, बिष्टमी, चपरा, काफॉर बवासीर रोग नाशक होता है. इसे आप कभी कभार इसलिए खा सकते हैं क्योंकि इसमें ओमेगा-3 होता है और इसमें भरपूर मात्रा में तांबा मौजूद होता है.
5 .बथुआ-
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बथुआ सब्जी का नाम बहुत कम लोगों ने ही सुना होगा. बथुआ एक वनस्पति है जो खरीफ की फसलों के साथ उगती है. बथुए में आयरन, पारा, सोना और क्षार पाया जाता है. बथुए में आयरन प्रचुर मात्रा में मौजूद होता है. ग्रामीण क्षेत्र में इसकी अधिकतर सब्जी बनाई जाती है. इसका रायता भी बनता है और लोग कई तरह के डिश बनाकर इसका सेवन करते हैं. कुछ लोग गोभी और मेथी की तरह बथुए का पराठा बनाकर सेवन करते हैं. यह बेहद स्वादिष्ट होता है.
यह गोंगूरा या पालक के पत्तों की तरह दिखने वाला छोटा सा हरा भरा पौधा होता है. बथुए के सेवन से न सिर्फ पाचन शक्ति बढ़ती है बल्कि अन्य कई बीमारियों से भी छुटकारा मिलती है. सर्दियों में इसका सेवन करना कई बीमारियों को दूर रखने में मदद करता है. यह साग प्रतिदिन खाने से गुर्दे में पथरी नहीं होती है. कब्ज और पेट रोग के लिए तो यह जैसे रामबाण दवा है. बथुआ आमाशय को बलवान बनाता है. गर्मी से बढ़े हुए यकृत को ठीक करता है. इसकी प्रकृति ठंडी होती है तथा यह अधिकतर गेहूं के खेत में गेहूं के साथ उगता है और जब गेहूं बोया जाता है उसी सीजन में मिलता है वैसे आलू के खेत में भी यह बहुत पाया जाता है.
6 .गोंगूरा-
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गोंगूरा की सब्जी भी बनती है और चटनी अचार भी यह बहुत ही स्वादिष्ट होती है. इसमें आयरन, कैल्शियम और विटामिन सी प्रचुर मात्रा होती है. पालक के पत्ते की तरह बनाई जाने वाली गोंगूरा की सब्जी स्वास्थ्य और पाचन के लिए बहुत लाभदायक होता है. इसके अलावा इसका अचार भी बनाया जाता है. गोंगुरा को मराठी में अंबाडीची कहा जाता है.
7 .मशरूम-
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मशरूम को हिंदी में खुम्भ और वर्तमान में इस पौधे को मशरूम कहा जाता है. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के जंगलों में यह स्वादिष्ट और पौष्टिक सब्जी सैकड़ों सालों से बैगा आदिवासी लोग खाते आ रहे हैं. आदिवासी लोग इसे चिरकोपिहरी भी कहते हैं. स्वाद में यह आलू की तरह ही लगती है. लेकिन इसमें भरपूर शारीरिक ताकत पैदा करने की ताकत होती है. इसके साथ ही कई और भी सब्जियां हैं जैसे पुटपूरा, बोड़ा, पुट्टू, इनके अलग-अलग क्षेत्रों में अलग- अलग नाम है.
मशरूम के सेवन से शरीर में सर्विकल कैंसर के लिए जिम्मेदार ह्यूमन, पेपिलोमा वायरस खत्म हो सकता है. जिससे इस कैंसर से निजात संभव हो सकती है. ह्यूमन पेपिलोमा वायरस यानी एचपीवी त्वचा, मुंह और गले के जरिए सबसे तेजी से फैलने वाले वायरसों में से एक है. जिसकी वजह से सर्विकल मुंह व गले का कैंसर होता है. मशरूम के और भी कई फायदे हैं. इससे पाचन क्रिया दुरुस्त रहती है और त्वचा में निखार आता है.
मशरूम कई प्रकार के होते हैं. भारत के मैदानी भागों में श्वेत बटन मशरूम को शरद ऋतु में नवंबर से फरवरी तक ग्रीष्मकालीन श्वेत बटन मशरूम को सितंबर से नवंबर व फरवरी से अप्रैल तक काले कपड़े मशरूम को फरवरी से अप्रैल तक धींगरी मशरूम सितंबर से मई तक पराली मशरूम को जुलाई से सितंबर तक तथा दूधिया मशरूम को फरवरी से अप्रैल व जुलाई से सितंबर तक पैदा किया जा सकता है.
8 .चौलाई का साग-
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चौलाई का साग तो आपने बहुत खाया ही होगा. लेकिन बहुत कम. यह सब्जी बहुत ही आसानी से मिल जाती है. यह हरी पत्तेदार सब्जी है. जिसके डंठल और पत्तों में प्रोटीन, विटामिन और खनिज की प्रचुर मात्रा होती है. चौलाई में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन, मिनरल्स और आयरन प्रचुर मात्रा में मौजूद होते हैं.
चौलाई की सब्जी खाने से आपके पेट और कब्ज संबंधी किसी भी प्रकार के रोग में लाभ होगा. पेट के विभिन्न रोगों से छुटकारा पाने के लिए सुबह-शाम चौलाई का रस पीने से काफी लाभ मिलता है. चौलाई की सब्जी का नियमित सेवन करने से वात रक्त व त्वचा विकार दूर हो जाते हैं.
चौलाई को तंदूलिए भी कहते हैं. चौलाई दो तरह की होती है एक सामान्य पत्तों वाली तथा दूसरी लाल पत्तों वाली. कटेली चौलाई तिनछठ के व्रत में खोजी जाती है. भादो की कृष्ण पक्ष की षष्टि को यह व्रत होता है. चलाई को खाने से आंतरिक रक्तस्राव बंद हो जाता है. यह सब्जी खूनी बवासीर, चर्मरोग, गर्भ गिरना, पथरी रोग और पेशाब में जलन जैसे रोग में भी बहुत फायदेमंद सिद्ध हुई है.
9 .कुंदरू-
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कुंदरू का नाम तो आपने कम ही सुना होगा. कुंदरू को टिंडोरा नाम से भी जाना जाता है. माना जाता है कि 100 ग्राम कुंदरू में 93.5 ग्राम पानी, 1.2 ग्राम प्रोटीन, 18 के कैलोरी ऊर्जा, 40 ग्राम कैलशियम, 3.1 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 30 मिलीग्राम पोटैशियम, 1.6 ग्राम फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं. इसमें beta-carotene भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है.
कुंदरू के पत्ते और फूल भी काफी गुणकारी है. जितना इसका फल है. हाल ही में एक शोध में यह माना गया है कि खाने में प्रतिदिन 50 ग्राम कुंदरू का सेवन करने से हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को आराम मिलता है.
10 .कोझियारी भाजी-
कोझियारी भाजी की भाजी साल में दो-तीन बार जरूर खाना चाहिए. इसके सेवन से कई तरह की रोग दूर हो जाते हैं. अधिकतर आदिवासी इस भाजी को खाते हैं. माना जाता है कि इसे खाने वाला कभी बीमार नहीं पड़ता है. छत्तीसगढ़ के बैगा आदिवासी लोग इस भाजी को खाकर हमेशा स्वस्थ और तंदुरुस्त बने रहते हैं. बैगा आदिवासी मानते हैं कि जंगलों में पाई जाने वाली कोझियारी भाजी को साल में एक बार जरूर खाना चाहिए. कोझियारी भाजी मतलब जंगल में होने वाली सफेद मूसली का पत्ता. यह सभी जानते हैं कि सफेद मूसली काफी शक्ति वर्धक होती है जो कई गुप्त रोगों को जड़ से खत्म करने की शक्ति रखती है.
इसके अलावा आप सब्जियों में भी आजमा सकते हैं. तोटाकुरा, सोया, हरि अजवाइन, हरे प्याज की घास, अरबी पत्ता, अरबी जड़, पेठा, ब्रोकली, गांठ गोभी, रावल, कच्चे केले की सब्जी, कच्चे केले का तना, कच्चे केले का फूल, पुदीना, धनिया, करी पत्ता, फ्रेंच बींस, ग्वार फली, सहजन की फली, पेठा, कमल ककड़ी, सुरतीकंद, आंवलामकाई, मूंगे की फली आदि.
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