कोरोना वैक्सीन बनने में लग सकते हैं 4-5 साल का समय, तब तक इस संक्रमण से कैसे निपटें

कल्याण आयुर्वेद- विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि कोरोनावायरस पर नियंत्रण में चार- पांच साल का समय लग सकते हैं. ऐसे में केवल वैक्सीन पर निर्भर नहीं रहा जा सकता है. ऐसे में भी रास्ते और तरीके क्या हो सकते हैं. जिसकी मदद से हम कोरोनावायरस पर काबू पा सकते हैं. इतना ही नहीं बल्कि इसका संक्रमण होने के बावजूद इसके घातक प्रभाव को रोका जा सके.ऐसे कई मुद्दे हैं जिनका ख्याल रखे बिना दुनिया का कोरोनावायरस से निपटना असंभव होगा.
कोरोना वैक्सीन बनने में लग सकते हैं 4-5 साल का समय, तब तक इस संक्रमण से कैसे निपटें
कोरोना वायरस से जुड़े कई मुद्दों का जवाब यहां से जाने-
कोरोना वायरस के संक्रमण के दुनिया भर में बढ़ रहे हैं.मामले-
कोरोना वायरस के मामले दुनिया भर में रुकने का नाम नहीं ले रहा है फिर भी देश के कुछ हिस्सों को सावधानी से फिर से खोलने की तैयारी की जा रही है. तब भी कई हॉट स्पॉट में कोरोनावायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. नए मामलों की रिपोर्ट की जा रही है और विशेषज्ञों को चिंता है कि दुनिया के कुछ हिस्से जल्द ही कोरोनावायरस दूसरी लहर का सामना कर सकता है.
यह तब जब विभिन्न देशों में 100 से अधिक इस समय एक सफल वैक्सीन तैयार करने या विभिन्न दवाओं या उपचारों पर लगातार प्रयोग कर रहे हैं जो वायरस से लड़ने में कारगर हो सके.
हम अकेले वैक्सीन पर नहीं रह सकते हैं निर्भर-
हालांकि विश्व स्वास्थ संगठन के वैज्ञानिक अब कह रहे हैं कि हमें केवल वैक्सीन पर उम्मीदें नहीं रखनी चाहिए. क्योंकि यह संकट को कम करने या बड़े पैमाने पर फैलने से रोकने का समाधान नहीं होगा. दरअसल इस तरह के वायरस को रोकने में चार- पांच साल का वक्त लग सकता है.
क्या लॉक डाउन मददगार नहीं है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी पिछली रिपोर्ट में कहा था कि लॉक डाउन कोरोना को रोकने में मददगार रहा है. लेकिन यह वायरस को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका नहीं हो सकता है. वायरस को फैलने से रोकने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि कम से कम 60- 70% आबादी घातक संक्रमण से प्रतिरक्षा हासिल करें. हर आयु, वर्ग या श्रेणी को प्रभावित किए बिना कोरोनावायरस प्रति झुंड प्रतिरक्षा संभव नहीं है, ऐसे में इसका एकमात्र संभव तरीका तेजी से एक टीका तैयार करना है.
हो रहे हैं वैक्सीन के तेजी से ट्रायल-
वैश्विक स्तर पर मोर्डेना, सनोफी और नोवावैक्स जैसी कंपनियां अपने संबंधित टीके के लिए मानव परीक्षण शुरू करने की राह पर हैं जो मुख्य रूप से शरीर के अंदर वायरस की अनुवांशिक RNA को इंजेक्ट करेगी. ताकि यह देखा जा सके की प्रतिरक्षा प्रणाली इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है. यह कुछ सबसे तेज परीक्षण है जिन्हें हम देख रहे हैं. कुछ ने कहा है कि सितंबर तक हमारे पास एक लाख खुराक तैयार होगा.
टीके के विकास में क्या हो सकता है गलत?
एक टीका विकसित करने के लिए कई चिकित्सा समूहों और विशेषज्ञों की प्रयास जारी है और आशा जनक परिणाम प्राप्त करने का दावा भी कर रहे हैं फिर भी किसी दिए गए उत्पाद की व्यवहार यता या प्रभाव कारिता जैसे मुद्दे बचे रहेंगे. यहां तक कि अगर किसी दिए गए टीके परीक्षण को मंजूरी मिल जाती है तो भी बहुत से क्लीनिकल परीक्षणों से गुजरना पड़ता है. लागत एक ऐसा मुद्दा बना हुआ है जो कुछ के लिए उत्पाद को अप्राप्य बना हुआ है. विशेष रूप से विकसित या विकासशील देशों में.
वैक्सीन विरोधी समुदाय से खतरा-
दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ते वैक्सीन विरोधी आंदोलन भी चल रहे हैं जो चिंताओं को और बढ़ाते हैं वे मानते हैं कि वैक्सीन लेना एक व्यक्तिगत विकल्प होना चाहिए ना की अनिवार्य कदम. यह संक्रमण फैलने में योगदान कर सकते हैं और भले ही अन्य लोगों को यह टीका लग जाए.
क्लीनिकल परीक्षण में लगता है समय?
क्लीनिकल परीक्षण तीन चरणों में होते हैं जो इसे लंबा खींचते हैं. एक प्रायोगिक वैक्सीन जिसे सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है उसे सीमित तरीके से लोगों तक पहुंचाया जाता है. जैसे कि उच्च जोखिम वाले समूह जैसे स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं आदि को एक और मुद्दा जो एक टीके के तेजी से विकास में बाधा डालता है. वह लाइसेंसी अतीत में एक अनुमोदित वैक्सीन का सबसे तेज रोल आउट मॉम्प्स वैक्सीन सभी जरूरी अनुमति और लाइसेंस प्राप्त करने के लिए 4 साल के करीब लगे थे.
हम किन अन्य मुद्दों का सामना कर रहे हैं?
अन्य मुद्दे जो अत्यधिक संभावना बनाते हैं कि वायरस समस्या बना रहेगा. वह इसके परिवर्तन की समस्या है. कोरोना वायरस एक तरह का है और हम अभी भी वायरस के शरीर पर हमला करने के विभिन्न तरीकों की खोज कर रहे हैं. जिससे एक प्रभावी टीका बनाने का काम और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है. SARA.CoV केवल गुजरते महीनों के साथ मजबूत हो रहा है. अधिक लोगों को संक्रमित कर रहा है और विभिन्न आयु समूहों में विभिन्न लक्षणों को दिखा रहा है.
कोरोना वायरस मौसमी फ़्लू की तरह लौट सकता है वापस ?
एक तरफ वापस लौटने का मुद्दा भी है जो वैज्ञानिकों और डॉक्टरों को लगता है कि फ्लू की तरह कोरोना वायरस भी बहुत अधिक मौसमी संक्रमण के रूप में विकसित हो सकता है और धीमी गति के प्रसारित होने के बाद वापस आ सकता है.
इससे निपटने के लिए क्या किया जा सकता है?
हम जिस तरह से रहते हैं आते जाते हैं या काम करते हैं उसमें यह वायरस बहुत सारे बदलाव करेगा. लेकिन अभी लंबे समय के लिए एकमात्र चीजों प्रसार को कम करने में मदद कर सकती है. जहां तक संभव हो सके उतना सामाजिक दूरी और स्वच्छता की कोशिश करें. बिना मास्क घर से बाहर ना निकले, संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाकर रखें, कोरोनावायरस संक्रमण से जुड़े कोई भी लक्षण दिखे तो डॉक्टर की तुरंत सलाह लें.

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