डॉक्टरों को जवाब देने के बाद भी 81 वर्षीय कोरोना संक्रमित पिता को बेटे ने कर दिखाया स्वस्थ

कल्याण आयुर्वेद- आज पूरी दुनिया में कोरोनावायरस का संक्रमण तेजी से फैल चुका है. कोरोना वायरस संक्रमण का सबसे ज्यादा बुजुर्ग शिकार हुए हैं. बहुत कम मामलों में कोरोनावायरस के कब्जे से छूटकर बुजुर्ग स्वस्थ हो सके. लेकिन लंदन में एक बेटे ने अपने 81 वर्षीय पिता को कोरोना के शिकंजे से छुड़ाकर स्वस्थ कर दिया है. इस बेटे ने अपने पिता को अस्पताल से लाकर घर में ही इलाज से ठीक कर दिया. जबकि डॉक्टरों ने मरीज के बचने की उम्मीद छोड़ दी थी.
डॉक्टरों को जवाब देने के बाद भी 81 वर्षीय कोरोना संक्रमित पिता को बेटे ने कर दिखाया स्वस्थ
डीएनए रिपोर्ट के अनुसार लंदन के 81 वर्षीय सूर्यकांत सूरी नथवानी उन भाग्यशाली उम्रदराज व्यक्तियों में से एक हैं. जिन्होंने कोरोना को मात दी है. लेकिन उनकी इस जीत के पीछे उनके बेटों का सबसे बड़ा योगदान रहा है.
दरअसल 81 वर्षीय सूर्यकांत की सेहत बिगड़ने पर जब अस्पताल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने फेफड़ों की हालत देखकर वेंटीलेटर लगाने में असमर्थता जताई साथ ही उनके बचने की संभावना से भी इंकार कर दिया. जिसके बाद सूर्यकांत ने अपने बेटे को घर ले जाने के लिए कहा और कहा कि वह अपने घर में ही मरना चाहते हैं अस्पताल में नहीं. बस पिता की इस आखिरी ख्वाहिश को सुनने के बाद बेटा उन्हें घर ले आया. लेकिन उसके मन में कोई दूसरी ही योजना चल रही थी.
55 साल राज नथवानी यह जानते थे कि कोरोनावायरस की वजह से उनके पिता के बचने की संभावना कम दिखाई दे रही है. लेकिन वह अपने पिता की जिंदगी की खातिर वायरस से जंग में जुट गए. राज ने घर के एक कमरे को ही पिता के लिए आईसीयू बेड की तरह तैयार किया. उन्होंने अपने पिता से कहा कि आप मरने नहीं जा रहे हैं. हम आपकी यहां देखभाल करेंगे.
राज को खुद भी एक गुमान नहीं था कि वह जो कह रहे हैं वह आने वाले समय में सच साबित होने जा रहा है. जनवरी से ही राज लगातार कोरोनावायरस से जुड़ी खबरों पर नजर रखे हुए थे.
दरअसल, घर में मौजूद बुजुर्ग माता-पिता की वजह से वह कोरोना से जुड़ी हर खबर हर लक्षण और सावधानियों का नियमित पालन भी कर रहे थे. इस वजह से उन्हें मालूम था कि पिता की देखभाल और इलाज के लिए उन्हें क्या-क्या करना होगा.
हालांकि राज खुद भी दिल के मरीज हैं. पिछले साल नवंबर में उनको हार्ट अटैक हुआ था. इस बार वह महामारी से निपटने के लिए मानसिक तौर पर तैयार हो चुके थे.
राज के पिता के फेफड़ों में संक्रमण बुरी तरह से फैल चुका था. राज जब अपने पिता को अस्पताल ले गए तो डॉक्टरों ने कोरोनावायरस बताया. डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट नहीं दिया जा सकता है क्योंकि उनके फेफड़ों की हालत काफी गंभीर हो चुकी थी. जिसके बाद राज ने पिता को अस्पताल में मरने के लिए छोड़ने से बेहतर घर लाकर उनकी देखभाल करने का फैसला किया.
राज ने घर में ही एक कमरा सैनिटाइज कर पिता के लिए तैयार किया. उन्होंने अस्पताल के आईसीयू रूम की तरह ही पिता के लिए एक गूगल स्प्रेडशीट तैयार की. जिसमें पिता के टेंपरेचर ब्लड प्रेशर और ऑक्सीजन की सैचुरेशन लेवल का रिकॉर्ड रखा. एक आईपैड के जरिए पिता की 24 घंटे वीडियो मॉनिटरिंग कि जिसमें अमेरिका में मौजूद उनके भाई भी शामिल रहे. गूगल स्प्रेडशीट के रिकॉर्ड के मुताबिक वह अपने डॉक्टर दोस्त से समय-समय पर सलाह लेते रहे. इसी बीच पिता की कोरोनावायरस संक्रमण रिपोर्ट पोजितिवे आई. लेकिन डॉक्टरों के लिए पीपीई न होने की वजह से होम विजिट कर पाना संभव नहीं था. ऐसे में उन्होंने एक एंटीबायोटिक दवा की सलाह दी साथ ही ऑक्सीजन की दिमाग में कमी होने पर पेट के बल लेटने की सलाह दी. जिससे फेफड़ों को ऑक्सीजन मिल सके.
हालांकि राज ने घर में ऑक्सीजन के लिए सीपीएपी मशीन इस्तेमाल किया. ताकि उन्हें सांस लेने में परेशानी न हो. लगातार प्रयासों और करीबी मॉनिटरिंग से सूरी नथवानी की हालत में सुधार होते चला गया और वो कोरोना संक्रमण से ठीक हो गए. अब राज यह मानते हैं कि उनके पिता ब्रिटेन के अस्पतालों में भर्ती दूसरे कोरोना मरीजों के मुकाबले घर में ज्यादा बेहतर स्थिति में थे.
इसलिए कोरोना से डरने की जरूरत नहीं है बल्कि डटकर मुकाबला करने की जरूरत है.
धन्यवाद.
स्रोत- news18

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