कोरोना संक्रमित को ठीक कर सकता है ये आयुर्वेदिक योग, जानें इनके गुणों के बारे में..

कल्याण आयुर्वेद- कोरोना वायरस संक्रमण आज विश्वव्यापी महामारी का रूप ले चुका है. इस वायरस छुटकारा पाने के लिए अभी तक कोई निश्चित इलाज उपलब्ध नहीं है और न ही कोई वैक्सीन उपलब्ध है. जिसके कारण दहशत का माहौल बना हुआ है. हालांकि कोरोनावायरस संक्रमित इलाज से ठीक भी हो रहे हैं. लेकिन निश्चित तौर पर न तो इसका कोई दवा उपलब्ध हो पाई है और न ही वैक्सीन.
कोरोना संक्रमित को ठीक कर सकता है ये आयुर्वेदिक योग, जानें इनके गुणों के बारे में..
ऐसे में लोगों ने एक बार फिर भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पत्तियों पर भरोसा जताते हुए आयुर्वेद को मान्यता दी है. कई लोगों ने इस पद्धति को अपनाना भी शुरू कर दिया है. कई आयुर्वेदाचार्यों का मानना है कि इस पद्धति से कोरोना संक्रमण को दूर किया जा सकता है.
कोरोना संक्रमित को ठीक कर सकता है ये आयुर्वेदिक योग, जानें इनके गुणों के बारे में..
राज्य आयुर्वेद कॉलेज एवं अस्पताल के सहायक प्रोफेसर डॉ मनदीप जयसवाल ने बताया है कि आयुर्वेद में बहुत सी ऐसी दवाएं हैं जो हजारों वर्षों से कई तरह की बीमारियों में अचूक असर कर रही है. और ये बात सही भी है. आधुनिक चिकित्सा पद्धति ( एलोपैथ ) से लोग थक- हारकर आयुर्वेद की ओर जाते हैं और ठीक भी होते हैं. लेकिन हमारे देश में लोग आधुनिक चिकित्सा पद्धति के सामने सामान्यतः आयुर्वेद को वरीयता नहीं देते हैं.
उन्होंने बताया है कि आज हम सब जिस कोविड-19 रोग से लड़ रहे हैं उसका पहला कदम बचाव करना है. इसके लिए सबसे पहले स्वच्छता को अपनाना होगा, इसके अलावा जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी है उनके संक्रमित होने का खतरा काफी कम होता है. इसलिए आयुर्वेद में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली विभिन्न औषधियों योग एवं आहार और विहार बताए गए हैं.
वही डब्ल्यूएचओ ( विश्व स्वास्थ्य संगठन ) ने भी आयुर्वेद औषधियों को अपनाने पर जोर दिया है. ऐसे में आज हम कुछ आयुर्वेद औषधियों के बारे में बताने जा रहे हैं जो कोरोनावायरस संक्रमण को खत्म करने में मददगार हो सकता है.
चलिए जानते हैं उन आयुर्वेदिक औषधियों के बारे में-
1 .च्यवनप्राश-
कोरोना संक्रमित को ठीक कर सकता है ये आयुर्वेदिक योग, जानें इनके गुणों के बारे में..
10-10 ग्राम सुबह- शाम च्यवनप्राश दूध या गर्म पानी के साथ सेवन करना फायदेमंद होगा.
च्यवनप्राश लगभग 50 तरह की जड़ी- बूटियों के मिश्रण से तैयार की जाती है. इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होने के अलावे सूजन से राहत दिलाने में मदद करता है. हृदय को स्वस्थ रखता है, पाचन और चयापचय में सुधार करता है, सर्दी- खांसी की समस्या से बचाव करने और इसे दूर करने में मददगार होता है.
च्यवनप्राश में आंवला और अन्य जड़ी बूटियां मौजूद होती है जो विटामिन सी से समृद्ध होती है जो किसी भी तरह के संक्रमण और वायरस और बैक्टीरिया से बचाव करने में मददगार होता है.
इसके सेवन करने से रक्त साफ होता है. श्वसन संबंधी परेशानियों से छुटकारा मिलती है, यह हड्डियों को भी मजबूत करने में मददगार होता है. इसके सेवन से कोलेस्ट्रोल को भी नियंत्रित रखने में मदद मिलती है. वही च्यवनप्राश का सेवन करना त्वचा स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होता है. जिससे किसी भी तरह के वायरस को हमला करने से बचाव करने में त्वचा को मदद मिलती है.( सोना, चांदी युक्त च्यवनप्राश अधिक फायदेमंद होगा.)
2 .सितोपलादि चूर्ण-
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2 से 3 ग्राम की मात्रा में शहद के साथ सुबह- शाम सितोपलादि चूर्ण का सेवन करना कोरोनावायरस संक्रमण में मददगार हो सकता है.
सितोपलादि चूर्ण एक आयुर्वेदिक औषधि है जो कफ, खांसी और जुकाम जैसे रोगों को दूर कर पाचन क्रिया व प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में मदद करती है.
इस चूर्ण के सेवन करने से श्वास, खांसी, टीबी, हाथ और पैरों में जलन, भूख नहीं लगना, जिह्वा की शून्यता, पसली का दर्द, अरुचि, बुखार को दूर करता है. यह बढ़े हुए पित को शांत करता है. कफ को छाटता है अन्न पर रूचि उत्पन्न करता है. जठराग्नि को तेज करता है और पाचक रस को उत्तेजित कर भोजन को अच्छी तरह से पचाता है.
पित्त के कारण कफ सुखकर छाती में बैठ गया हो, प्यास अधिक लगती हो, हाथ- पांव और शरीर में जलन हो. खाने की इच्छा ना हो. मुंह से खून आए, कफ के साथ खून आए, थोड़ा-थोड़ा बुखार रहता हो, बुखार रहने के कारण शरीर कमजोर हो जाना आदि उपद्रव में यह काफी फायदेमंद होता है.
बच्चों के सूखा रोग में जब बच्चा कमजोर और निर्बल हो जाए साथ-साथ थोड़ा ज्वर भी बना रहे. श्वांस, खांसी भी हो तो इस चूर्ण के साथ प्रवाल भस्म और स्वर्ण मालती वसंत की थोड़ी मात्रा मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से काफी लाभ होता है.
बिगड़े हुए जुकाम में भी इस चूर्ण का सेवन करना फायदेमंद होता है. अधिक सर्दी लगने, शीतल जल और समय में जल पीने से जुकाम हो गया हो, कभी-कभी ये जुकाम रुक भी जाता है. इसका कारण यह है कि जुकाम होते ही यदि सर्दी रोकने के लिए शीघ्र ही उपाय किया जाए तो कफ सुख जाता है. परिणाम स्वरूप यह होता है कि सिर में दर्द, सूखी खांसी, शरीर में थकावट, आलस्य और देह भारी मालूम पड़ना, सिर भारी, अन्न में रुचि रहती है फिर भी खाने की इच्छा का ना होना आदि उपद्रव में इसका सेवन करना लाभदायक होता है. ऐसी स्थिति में इस चूर्ण को शरबत बनप्सा के साथ देने से बहुत लाभ होता है. क्योंकि यह रुके हुए दूषित कफ को पिघलाकर बाहर निकाल देता है और इससे होने वाले उपद्रव को भी शांत कर देता है.
सितोपलादि चूर्ण में गिलोय सत मिले होने के कारण यह अच्छा एंटीबायोटिक होने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है.
3 .महासुदर्शन वटी-
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2 गोली सुबह- शाम गर्म पानी के साथ सेवन करना फायदेमंद हो सकता है.
महासुदर्शन वटी का सेवन किसी भी कारण से और किसी भी तरह की बुखार को दूर करने के लिए सदियों से किया जा रहा है. इसके सेवन से पसीना आता है और बुखार कम होती है. पेशाब की मात्रा को बढ़ाता है और पाचन शक्ति को ठीक करता है.
इसके सेवन से मलेरिया, फ्लू टाइफाइड, शीत ज्वर, लिवर स्प्लीन की बीमारी के कारण होने वाले बुखार, विषम ज्वर, मासिक ज्वर यानी किसी भी तरह का बुखार हो इसके सेवन से दूर होती है.
महासुदर्शन वटी एक बेहतरीन एंटीमलेरियल, एंटीवायरल और एंटीपायरेटिक गुणों से भरपूर होता है, बेहतरीन एंटीऑक्सीडेंट है, जीवाणु संक्रमण से लड़ता है और शरीर को इंफेक्शन से बचाता है.
पेट का इन्फेक्शन, रेस्पिरेट्री इनफेक्शन और मूत्र संस्थान के संक्रमण में भी यह फायदेमंद होता है. यह दवा किसी भी संक्रमण से लड़ने में मददगार होती है और शरीर की इम्युनिटी पावर को भी बेहतर बनाती है.
बुखार के कारण लीवर और स्प्लीन का बढ़ जाना, थकान, उल्टी, भूख की कमी जैसी समस्या को दूर करती है.
4 .रसोन सूचीवेध- ( INJECTION )
1ml मांस पेशी में 2 दिन बाद दिया जाता है. हालांकि रोग के अनुसार प्रतिदिन भी दिया जा सकता है.
आयुर्वेद में इस सूचीवेध ( injection ) का इस्तेमाल राज्यक्षमा ( टीबी ) एवं अन्य फुफ्फुस विकार, वात विकार, न्यूमोनिया, सर्दी- खासी, बुखार आदि श्वसन संस्थान के रोगों में किया जाता है.
इसके इस्तेमाल से कफ ढीला हो जाता है तथा उसमें मौजूद बैक्टीरिया को मारता है. यह श्वसन संक्रमण से निजात दिलाता है.
इसका प्रयोग स्वर यंत्र शोथ, श्वास नली शोथ, ब्रोंकाइटिस, टाइफाइड बुखार में किया जाता है. यह हृदय के लिए बलदायक होता है, डिप्थीरिया नाम उग्र गले के विकार को ठीक करता है.
इसका प्रयोग जोड़ों के संक्रमण, गठिया, साइटिका, लकवा आदि में भी किया जाता है.
इसमें एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबायोटिक गुण मौजूद होते हैं जो शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाते हैं. आयुर्वेद के अनुसार यह हृदय रोग, हाई कोलेस्ट्रोल, सर्दी- जुकाम, बुखार में बेहद असरकारी औषधि है. ( नोट- यह injection सिद्धि फार्मेसी द्वारा बनी बनाई आती थी लेकिन अब नही आती है लेकिन कुछ जानकर आयुर्वेद चिकित्सक यह injection बनाकर इतेमाल करते हैं.)
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5 .इसके अलावा लक्षणों के अनुसार अन्य आयुर्वेद औषधियां भी दी जा सकती है जैसे- एलादि वटी, मरिच्यादी वटी, वासारिष्ट, कंटकारी अवलेह, मेथी पाक इत्यादि.
6 .अगर नींद नहीं आ रही है तो रोगी को अश्वगंधा, मुलेठी व शतावरी का चूर्ण सेवन करना फायदेमंद होगा.
नोट- यह पोस्ट शैक्षणिक उद्देश्य से लिखा गया है. किसी भी प्रयोग से पहले योग्य चिकित्सक से सलाह लें और यह  लेख  25 वर्षों से आयुर्वेद चिकित्सा अनुभव के आधार पर लिखा गया है. लेकिन यह लेख दावा नहीं करता है कि कोरोनावायरस संक्रमण इसके प्रयोग से ठीक ही हो जाएगा.
धन्यवाद.

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