अध्ययन- पहले जितना सोचा था उससे बहुत अधिक है बच्चों को कोरोना वायरस का खतरा

एक अध्ययन के अनुसार बच्चों, किशोरों और युवाओं व्यस्को को कोविड-19 से गंभीर जटिलताओं का पूर्व के अनुमान से कहीं अधिक है. इस अध्ययन में बताया गया है कि जिन लोगों को पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं उनके लिए कोरोनावायरस का जोखिम कहीं ज्यादा है. अमेरिका के रटगर्स विश्वविद्यालय से आने वाली इस अध्ययन के सह लेखक लॉरेंस क्लेनमेन ने कहा- यह विचार है कि कोविड-19 युवा लोगों को नहीं हो रहा है या नहीं होगा यह कहना गलत है.
जेएमएम पीडियाट्रिक्स में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार जिन बच्चों में मोटापे जैसी अन्य बीमारी है. उनके बहुत बीमार पड़ने की ज्यादा संभावना है. क्लेनमेन ने चेताया यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि जिन बच्चों को गंभीर बीमारी नहीं है उनके लिए भी जोखिम है अभिभावकों के वायरस को गंभीरता से लेने की जरूरत है. अध्ययन में पहली बार उत्तर अमेरिका में गंभीर रूप से बीमार कोविड-19 के बाल रोगियों के लक्षणों के बारे में बताया गया है.
रिसर्च में वैज्ञानिकों ने बच्चों और युवा वयस्कों नवजात मिलाकर 48 लोगों पर अध्ययन किया गया जो अमेरिका और कनाडा में कोविड-19 के कारण मार्च और अप्रैल में बच्चों के आईसीयू, पीआईसीयू में भर्ती किए गए थे. इस अध्ययन में पाया गया है कि 80% बच्चे पूर्व से गंभीर स्थितियों जैसे इम्यून कमजोरी, मोटापा, मधुमेह, दौरे आना या फेफड़े की बीमारी से ग्रस्त थे.
शोधकर्ताओं ने कहा है कि इन बच्चों में से 40% विकास में देरी या अनुवांशिक विसंगतियों के कारण तकनीकी सहायता पर निर्भर थे. उन्होंने कहा है कि कोविड-19 के कारण 20% से अधिक के दो या ज्यादा अंगों ने काम करना बंद कर दिया और लगभग 40 फ़ीसदी को सांस की नली या जीवन रक्षक प्रणाली पर रखने की जरूरत पड़ी.
शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में कहा है कि निगरानी काल के खत्म होने पर करीब 33% बच्चे कोविड-19 की वजह से अस्पताल में ही थे.
उन्होंने कहा है कि 3 बच्चों को वेंटीलेटर की जरूरत थी जबकि एक को जीवन रक्षक प्रणाली पर रखा गया था. अध्ययन में यह भी कहा गया है कि 3 सप्ताह के अध्ययन काल की अवधि के दौरान दो बच्चों की मौत भी हो गई. रॉबर्ट वुड जॉनसन मेडिकल स्कूल के बाल रोग विभाग में पीआईसीयू से संवाद और अध्ययन में शामिल हरी प्रेम राजशेखर ने कहा- यह अध्ययन कोविड-19 के बाल रोगियों पर शुरुआती प्रभाव की जानकारी देने के लिए आधारभूत समझ उपलब्ध कराता है.
कोविड-19 की वजह से आईसीयू में भर्ती वयस्कों के बीच मृत्यु दर जहां 62% वही वही अध्ययन में पाया गया है कि पीआईसीयू मरीजों में 4. 2% थी प्लेन मेन के अनुसार चिकित्सक बच्चों में कोविड-19 सिंड्रोम भी देख रहे हैं. पूर्व की रिपोर्टो का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया है कि कोविड-19 से ग्रस्त बच्चों में दिल का दौरा पड़ने का खतरा ज्यादा है और इस स्थिति को पीडियाट्रिक मल्टीसिस्टम इन्फ्लेमेटरी सिंड्रोम करार दिया.
स्रोत- खबर इंडिया टीवी

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