बच्चा जन्म लेते ही क्यों रोने लगता है? जानें वजह

कल्याण आयुर्वेद- आपने यह देखा होगा कि बच्चा जब जन्म लेता है तो काफी तेजी से रोने लगता है तो आसपास के लोगों को यह मालूम पड़ जाता है कि बच्चे का जन्म हो चुका है और सब लोग खुशी मनाने लगते हैं.
बच्चा जन्म लेते ही क्यों रोने लगता है? जानें वजह
लेकिन जब बच्चा जन्म लेता है और बिल्कुल भी नहीं रोता है तो उसकी आवाज नहीं निकलती है तो खुशी की जगह हमें बहुत दुखी होना पड़ता है क्योंकि बच्चा बहुत नाजुक स्थिति में होता है. कई बार उसका बचना असंभव हो जाता है क्योंकि उसके फेफड़ों में एमनीओटिक नाम का पानी भरा होता है वह बाहर नहीं निकल पाता है इसलिए बच्चा बहुत मुश्किल से ही अच्छे से रह पाता है.
क्या होता है एमनीओटिक फ्रूट ?
बच्चा के फेफड़े में एमनीओटिक फ्रूट भरा होता है. यह वह पानी होता है जो मां के गर्भ में बच्चे को सही रखता है, जो फेफड़ों में ऑक्सीजन की चेंजिंग में रोक बना होता है. इसलिए इस पानी को फेफड़ों से निकालने के लिए जरूरी है कि बच्चा जोर- जोर से रोए और चिल्लाए. तब यह पानी बाहर निकल पाता है. अगर यह पानी बाहर नहीं निकल पाया तो बच्चा रोएगा ही नहीं और बच्चा मुश्किल से ही अच्छी तरह स्वस्थ रह सकता है.
बच्चे जन्म लेते ही क्यों रोने लगते हैं?
बच्चे के फेफड़ों में एम नॉट इन फ्लूइड वह पानी होता है जो मां के गर्भ में बच्चे को सही रखता है जो फेफड़ों में ऑक्सीजन की चेंजिंग में रोक बना होता है. इसलिए इस पानी को फेफड़ों से निकालने के लिए जरूरी है कि बच्चा जोर-जोर से रोए. बच्चे की चिल्लाने की वजह से एंबोटिक्स फ्रूट का पानी फेफड़ों से निकल जाता है और बच्चा आराम से सांस लेने लगता है और हंसने लगता है. बच्चा जन्म लेने के बाद बिल्कुल ना रोए तो आप यह मान लो कि बच्चे के फेफड़ों में एमनीओटिक नाम का भरा हुआ पानी बाहर नहीं निकल सकता है और बच्चा आराम से सांस नहीं ले सकता है. इसकी वजह से बच्चे की मृत्यु भी हो सकती है.

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