सिर्फ कमजोर और बुजुर्ग ही नहीं बल्कि यह काम करने वाले भी तेजी से हो रहे हैं कोरोना संक्रमण का शिकार

कल्याण आयुर्वेद- कोरोना वायरस संक्रमण का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है. इस खतरनाक वायरस ने अब तक लगभग 32,00,000 से ज्यादा लोगों को संक्रमित कर दिया है और 2,00,000 से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया है क्योंकि कोरोना वायरस संक्रमण का न तो आज तक कोई सटीक इलाज उपलब्ध है और न ही वैक्सीन बन पाई है. वहीं अब इसके लक्षण भी बदलते जा रहे हैं. इतना ही नहीं अधिकतर मामले बिना लक्षणों वाले सामने आ रहे हैं.
सिर्फ कमजोर और बुजुर्ग ही नहीं बल्कि यह काम करने वाले भी तेजी से हो रहे हैं कोरोना संक्रमण का शिकार
बताया जा रहा है कि कमजोर और बुजुर्ग लोगों को यह वायरस जल्दी प्रभावित कर सकता है. लेकिन एक नए अध्ययन में यह दावा किया गया है कि धूम्रपान करने वाले लोग भी कोरोनावायरस संक्रमण की चपेट में जल्दी आ रहे हैं.
यह दावा भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर के वैज्ञानिक के एक अध्ययन के मुताबिक तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करने की कोरोना वायरस की प्रकृति के आधार पर किया गया है.
इस अध्ययन ने उन लोगों को भी आगाह किया है जिनमें कोविड-19 के लक्षण नजर नहीं आ रहे हैं. लेकिन उनके सूंघने की क्षमता कम हो गई है और खाते समय स्वाद का पता चलना भी कम हो गया है. लोगों को यह लक्षण महसूस होते ही स्व पृथक वास में रहना चाहिए और विशेषज्ञों की राय लेनी चाहिए.
अमेरिकन केमिकल सोसायटी द्वारा प्रकाशित प्रख्यात अंतरराष्ट्रीय जनरल में कोविड-19 महामारी की न्यूरोलॉजिकल अंतर्दृष्टि शीर्षक वाले अध्ययन के अनुसार संक्रमित लोगों की सूंघने और स्वाद पाने की क्षमता कम होना, उन्हें उनके केंद्रीय पूरी तंत्रिका तंत्र को और उनके मस्तिष्क की अंदरूनी संरचना को विनाशकारी प्रभाव के साथ वायरस के संक्रमण के लिए आसानी से निशाना बना देता है.
अध्ययन दल का नेतृत्व सूरजीत घोष ने किया जो आईआईटी जोधपुर में प्राध्यापक हैं. अध्ययन में इस बात का जिक्र किया गया है कि कोरोनावायरस एक विशेष मानवी ग्राही ( रिसेप्टर ) एचएसीई-2 ( ह्यूमन एंजियोटेंशिन कन्वर्टिंग एंजाइम-2 ) के संपर्क में आता है जो वायरस के प्रवेश बिंदु पर भी हुआ करता है और ज्यादातर मानव अंगों में फेफड़े से लेकर सांस नली तक की लगभग हर जगह उपस्थिति होती है.
घोष ने बताया है कि कोविड-19 रोगियों का न्यूरोलॉजिकल संक्रमण की जद में आना धूम्रपान जैसी चीजों से बढ़ सकता है.
एक प्रायोगिक अध्ययन के मुताबिक धूम्रपान मानव ग्राही और निकोटीनिक ग्राही के बीच संपर्क के चलते कोविड-19 के संक्रमण के खतरे को बढ़ा सकता है.
अध्ययन दल ने कोविड-19 संक्रमित रोगियों के मस्तिष्क की जांच करने और उसका विश्लेषण करने का भी सुझाव दिया है.
अध्ययन में कहा गया है कि जब कोविड-19 रोगियों के मस्तिष्क की जांच की जाती है. तब उम्र दराज व्यक्ति और पहले से किसी बीमारी से ग्रसित व्यक्ति पर धूम्रपान के पड़ने वाले प्रभाव का विश्लेषण करने से कोविड-19 रोगियों पर धूम्रपान के अतिरिक्त खतरे को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है.
स्रोत- लोकमत न्यूज़.

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