तनाव से बढ़ता है महिलाओं में दिल का खतरा

तनाव से बढ़ता है महिलाओं में दिल का खतरा
कल्याण आयुर्वेद- पिछले 20 वर्षों में दिल के दौरे से पुरुषों की मौत की संख्या कम हुई है. जबकि खासतौर से युवा महिलाओं की मौत का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है. इसकी वजह तनाव को माना गया है. एक शोध के अनुसार दैनिक के विषय में होने वाला तनाव महिलाओं के दिल पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है.
तनाव से बढ़ता है महिलाओं में दिल का खतरा
नौकरी, घर की देखभाल, बच्चे और रिश्तेदार आदि कई कारण है जो तनाव का कारण बनते हैं. यही तनाव महिलाओं के दिल पर बोझ बढ़ा देता है. निष्कर्षों के अनुसार प्रतिवर्ष करीब 45% महिलाओ और 38% पुरुषों की मृत्यु ह्रदय रोग से होती है.
तनाव से बढ़ता है महिलाओं में दिल का खतरा
जिन महिलाओं में एसडीएल का स्तर कम होता है.कोलेस्ट्रॉल और उच्च रक्तचाप की समस्या है धूम्रपान और शराब का सेवन करती हैं और स्वस्थ आहार लेती हैं और एक्सरसाइज नहीं करती हैं ऐसी महिलाओं में हृदय रोग से होने वाली मौत का खतरा काफी अधिक होता है.
इसके अलावा अनियमित मासिक धर्म, समय से पहले रजोनिवृत्ति, गर्भावस्था की समस्याएं, गर्भावधि मधुमेह और हार्मोन प्रतिस्थापन उपचार भी महिलाओं में हृदय की स्थिति को खराब करता है.
ऑस्ट्रेलिया की मेडिकल यूनिवर्सिटी ऑफ वियेना एलेग्जेंड्रा विलर कहती है, हृदय रोग के मामले में महिलाओं की उम्र विवरण में भिन्नता है, साथ ही हृदय के जोखिम कारकों और संवहनी परिवर्तनों का भी आकृति विज्ञान अलग है.
महिलाओं में इन रोगों का निदान और चिकित्सा अक्सर मुश्किल हो जाती है. वही ईसीजी परीक्षण और एर्मेगोट्री भी कम निर्णायक होते हैं. हालांकि महिलाओं के लिए लगातार कई ऐसे प्रयोग और परीक्षण स्थापित किए जा रहे हैं जिनसे उन्हें हृदय रोग से बचाया जा सके. वसा की मात्रा और मधुमेह के बाद होने वाले तनाव विकार भी महिलाओं के स्वास्थ्य में काफी अहम भूमिका निभाते हैं.
शोधार्थी कहते हैं कि महिलाओं को सक्रिय रूप से दैनिक दिनचर्या में आराम की अवधि को शामिल करने की जरूरत है. इसके अलावा तनाव को कम करने के लिए पर्याप्त शारीरिक गतिविधियों को पहले से ही सुनिश्चित कर लेना चाहिए. इससे हृदय रोग के खतरे को कम करने में मदद मिलती है.

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