भाग्य चमकाना है तो शनि जयंती और वट सावित्री अमावस्या पर करें सरल उपाय

ज्योतिष शास्त्र- 22 मई को शनि जयंती है. इस दिन सूर्य पुत्र शनि देव का जन्म दिवस मनाया जाता है. इस दिन अमावस्या तिथि भी है. शनि देव ने इस तिथि पर ही जन्म लिया था. इस दिन विधिवत पूजा और उपासना करने से शनि की असुविधा को दूर किया जा सकता है.
भाग्य चमकाना है तो शनि जयंती और वट सावित्री अमावस्या पर करें सरल उपाय
माना जाता है कि शनिदेव जिस पर मेहरबान हो जाएं उसे रंक से राजा बनने में देर नहीं लगती है तो वहीं इनकी तिरछी नजर हो जाए तो नुकसान का अंदाजा लगाना भी काफी मुश्किल होता है. शनिदेव जब अशुभ होते हैं तो एक साथ कई कष्ट देते हैं. यहां तक कि कभी-कभी मृत्यु तुल्य कष्ट भी प्रदान करते हैं. इसलिए इन्हें प्रसन्न रखना बहुत जरूरी हो जाता है.
शनिदेव का परिचय-
शनिदेव को  यमाग्रज, छायात्म्ज, नीलकाय, क्रूर कुशांग, कपिलाक्ष, असितसॉरी, अकैसुबन और पंगु इत्यादि कहा जाता है. इनके सिर पर स्वर्णमुकुट, गले में माला तथा शरीर पर नीले रंग के वस्त्र और शरीर भी इंद्रनीलमणि के समान. शनि गिद्ध पर सवार रहते हैं. इनके हाथों में धनुष बाण और त्रिशूल रहते हैं.
भाग्य चमकाना है तो शनि जयंती और वट सावित्री अमावस्या पर करें सरल उपाय
शनि ग्रह की क्या है शक्ति?
लाल किताब के अनुसार शनि ग्रह के देवता भैरव जी और परंपरागत ज्योतिष के अनुसार शनि देव हैं. इनका गोत्र- कश्यप, जाति- छत्रिय, रंग- श्याम नीला, वाहन- गिद्ध, भैंसा, दिशा- वायव, वस्तु- लोहा, फौलाद, पोशाक- जुराब, जूता, पशु- भैंस या भैंसा, वृक्ष- कीकर, आक और खजूर, राशि- बुध, शुक्र, राहु, मित्र- सूर्य चंद्र और मंगल शत्रु और बृहस्पति समय भ्रमण काल एक राशि में अढ़ाई वर्ष, नक्षत्र- पुष्य, अनुराधा, उत्तराभाद्रपद, शरीर के अंगों में दृष्टि, बाल, भवें, कनपटी, पेशा- लुहार, तरखान और मोची, फिसिफत- मूर्ख, अखड़, कारीगर, गुण देखना, भालना, चालाकी, मौत और बीमारी, शक्ति- जादू मंत्र देखने- दिखाने की शक्ति, मंगल के साथ हो तो सर्वाधिक बलशाली. शनिदेव मकर और कुंभ राशि के स्वामी है. तुला में उच्च का और मेष में नीच का माना गया है. 11वां भाव पक्का घर, 10वीं और अष्टम पर भी आधिपत्य.
भाग्य चमकाना है तो शनि जयंती और वट सावित्री अमावस्या पर करें सरल उपाय
कर्म होता है संचालित-
शनि से ही हमारा कर्म जीवन संचालित होता है. दशम भाव को कर्म पिता तथा राज्य का भाव माना गया है. एकादश भाव को आय का भाव माना गया है. अतः कर्म, सत्ता तथा आय का प्रतिनिधि ग्रह होने के कारण कुंडली में शनि का स्थान महत्वपूर्ण माना गया है.
शनि देव को माना जाता है न्यायाधीश-
माना जाता है कि कुंडली में सूर्य है राजा, बुध है मंत्री, मंगल है सेनापति, शनि है न्यायाधीश, राहु- केतु है प्रशासक, गुरु हैं अच्छे मार्ग का प्रदर्शक, चंद्र है माता और मन का प्रदर्शक, शुक्र है पति के लिए पत्नी और पत्नी के लिए पति तथा वीर्य बल. जब समाज में कोई व्यक्ति अपराध करता है तो शनि के आदेश के तहत राहु और केतु उसे दंडित करने के लिए सक्रिय हो जाते हैं. शनि की कोर्ट में दंड पहले दिया जाता है. बाद में मुकदमा इस बात के लिए चलता है कि आगे यदि इस व्यक्ति के चाल- चलन ठीक रहे तो दंड की अवधि बीतने के बाद इसे फिर से खुशहाल कर दिया जाए.
सताना, किसी के पीठ पीछे उसके खिलाफ कोई कार्य करना, चाचा- चाची, माता-पिता, सेवकों और गुरु का अपमान करना, ईश्वर के खिलाफ होना, दांतो को गंदा रखना, तहखाने की कैद, हवा को मुक्त करना, भैंस या भैंसों को मारना, सांप, कुत्ते और कौवों को सताना, अपंग और सफाई कर्मी का अपमान करना आदि शनि के मूल मंदिर जाने से पूर्व उक्त बातों पर प्रतिबंध लगाएं.
शनि के अशुभ की निशानी क्या है?
शनि के अशुभ प्रभाव के कारण मकान या मकान का हिस्सा गिर जाता है या क्षतिग्रस्त हो जाता है, नहीं तो लड़ाई- झगड़े का. कर्ज के कारण मकान बिक जाता है. अंगो के बाल तेजी से झड़ जाते हैं. अचानक आग लग सकती है. धन संपत्ति का किसी भी तरह नाश होता है. समय पूर्व दांत और आंख की कमजोरी, झूठे इल्जाम लगने लगते हैं, यदि व्यक्ति अपना चाल- चलन ठीक नहीं रखता है जेल या फांसी तक की सजा हो सकती है.
फेफड़े सिकुड़ने लगते हैं और तब सांस लेने में दिक्कत होती है. हड्डियां कमजोर होने लगती है. तब जोड़ों का दर्द भी पैदा हो जाता है. रक्त की कमी और रक्त में बदबू बढ़ जाती है. पेट संबंधी विकार होने लगते हैं. सिर की नसों में तनाव अनावश्यक चिंता और घबराहट बढ़ जाती है.
क्या है शनि की शुभ होने की निशानी-
शनि की स्थिति यदि शुभ है तो व्यक्ति विकास करता है. उसके जीवन में किसी प्रकार का कष्ट नहीं होता है. नाखून और बाल मजबूत होते हैं. ऐसा व्यक्ति न्याय प्रिय होता है और समाज में मान- सम्मान खूब बना रहता है. उस व्यक्ति के कोई शत्रु नहीं होते हैं और वह सभी से सहयोग प्राप्त करता है. खुशहाल जीवन यापन करता है.
शनि शांति के उपाय-
* सर्वप्रथम भगवान भैरव की उपासना करें.
*शनि की शांति के लिए महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी करना उत्तम होता है.
* तिल, उड़द, भैंस, लोहा, तेल, काला वस्त्र, काली गौ और जूता दान देना चाहिए.
* कौवे को प्रतिदिन रोटी खिलाना चाहिए.
* छाया दान करें अर्थात कटोरी में थोड़ा सा सरसों का तेल लेकर अपने चेहरे को देखकर शनि मंदिर में अपने पापों की क्षमा मांगते हुए रख आवें. दांत साफ रखें,
* अंधे- अपंगों, सेवकों और सफाई कर्मियों से अच्छा व्यवहार करें.
* कहते हैं कि जो व्यक्ति प्रतिदिन हनुमान चालीसा पढ़ कर शनिदव को जो पसंद नहीं है उसका पालन करता रहता है तो भगवान शनिदेव उसको किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं देते हैं.
भाग्य चमकाना है तो शनि जयंती और वट सावित्री अमावस्या पर करें यह सरल उपाय-
22 मई को अमावस्या है इस दिन वट सावित्री अमावस्या तथा शनि जयंती मनाई जाएगी इस दिन शनि दोषों से मुक्ति के लिए शनि देव की विशेष पूजा अर्चना की जाती है. जो जातक शनि की महादशा, साढ़ेसाती, ढैया अंतर्दशा के प्रभाव में हैं उन्हें शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए विशेष उपाय करना चाहिए.
1 .काले घोड़े की नाल या नाव की कील का छल्ला बीच की अंगुली में धारण करें. इस खास अवसर पर उपरोक्त उपाय करने से अच्छे फल मिलते हैं तथा भाग्य में उन्नति होती है.
2 .कासें के कटोरे को सरसों या तिल के तेल से भरकर उसमें अपना चेहरा देखकर दान करें.
3 .शनि यंत्र धारण करें.
4 .काले घोड़े की नाल अपने घर के दरवाजे के ऊपर स्थापित करें. मुंह ऊपर की ओर खुला रखें दुकान या फैक्ट्री के द्वार पर लगाएं तो खुला मुंह नीचे की ओर रखें. इन उपायों से आप अपने कष्ट दूर कर सकते हैं तथा शनि महाराज की कृपा प्राप्त कर सकते हैं.
5 .800 ग्राम तिल तथा 800 ग्राम सरसों का तेल दान करें, काले कपड़े, नीलम का दान करें.
6 .हनुमान चालीसा पढ़ते हुए प्रत्येक चौपाई पर एक परिक्रमा करें.
7 .पीपल वृक्ष की परिक्रमा करें, समय प्रातः काल मीठा दूध वृक्ष की जड़ में चढ़ाएं तथा तेल का दीपक पश्चिम की ओर बत्ती कर लगाएं और शं शनिश्चराय नमः पढ़ते हुए एक-एक दाना मीठी नुक्ती का प्रत्येक परिक्रमा पर एक मंत्र तथा एक दाना चढ़ाएं, पश्चात शनि देवता से कृपा प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करें.
8 .काले कुत्ते को तेल लगाकर रोटी खिलाएं.
9 .काला सुरमा सुनसान स्थान में हाथ भर गड्ढा खोदकर दबा दें.
10 .काली गाय जिस पर कोई दूसरा निशान ना हो का पूजन कर आठ बूंदी के लड्डू खिलाकर उसकी परिक्रमा करें तथा उसकी पूंछ से अपने सिर को आठ बार झाड़ दें.
भाग्य चमकाना है तो शनि जयंती और वट सावित्री अमावस्या पर करें सरल उपाय
इन राशियों पर है शनि की नजर-
शनि की साढ़ेसाती धनु, मकर और कुंभ राशि पर है. वही मिथुन और तुला राशि पर शनि की ढैया है. इसलिए इन राशि वालों को विशेष ध्यान देने की जरूरत है. शनि एक न्यायप्रिय ग्रह है इसलिए इन्हें अन्याय पसंद नहीं है. कलयुग में शनि को मनुष्य को उसके किए गए कर्मों का फल इसी जन्म में देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इसलिए शनिदेव व्यक्ति के अच्छे बुरे कर्मों का फल उसे इसी जन्म में प्रदान करते हैं. शनि को धोखा देने वाले, स्वार्थी, दूसरों के हक का अतिक्रमण करने वाले और रिश्वत लेने वाले व्यक्ति बिल्कुल भी पसंद नहीं है. ऐसे लोगों को शनि कठोर दंड देते हैं.
सावधानी-
कुंडली के प्रथम भाव यानी लग्न में हो तो भिखारी को तांबा या तांबे का सिक्का कभी दान ना करें अन्यथा पुत्र को कष्ट होगा. यदि आयु भाव में स्थित हो तो धर्मशाला का निर्माण ना कराएं. अष्टम भाव में हो तो मकान ना बनवाएं और ना ही खरीदें. उपरोक्त उपाय भी लाल किताब के जानकार व्यक्ति से पूछ कर ही करें.
नोट- यह पोस्ट शैक्षणक उद्देश्य से लिखा गया है. किसी भी प्रयोग से पहले आप किसी जानकार ज्योतिष से सलाह अवश्य लें. धन्यवाद.

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