चीन में बसे नोएडा के डॉक्टर ने भारत में कोरोनावायरस के बारे में क्या कहा? आप भी जानिए

कल्याण आयुर्वेद- शंघाई में बसे नोएडा के एक डॉक्टर का कहना है कि कोविड-19 के खिलाफ अपनी लड़ाई जीतने के काफी करीब है और जिंक, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एंटीबायोटिक एजिथ्रोममाईसिन का संयोजन कोरोनावायरस मरीजों को ठीक करने में सक्षम रही है.
चीन में बसे नोएडा के डॉक्टर ने भारत में कोरोनावायरस के बारे में क्या कहा? आप भी जानिए
सेंट माइकल हॉस्पिटल में मेडिकल डायरेक्टर इंटरनल मेडिसिन डॉक्टर संजीव चौबे ने आईएएनएस के साथ बात करते हुए कहा है कि कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए इस संयोजन को विस्तृत रूप से अपनाया गया है और इसके परिणाम स्वरूप रोगी ठीक भी हो रहे हैं और उनकी चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता में भी कमी आ रही है.
कोविड-19 मरीजों के लिए किस तरह का उपचार है?
जिंक, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एजिथ्रोमाईसीन से सकारात्मक रिजल्ट आए हैं और इससे कोविड-19 के कई मरीजों को ठीक करने में मदद मिल रही है. स्कोर्बिक एसिड, विटामिन बी कंपलेक्स, जिंक, सेलेनियम एल कार्निटाइन, विटामिन B12 और ग्लूटाथिओन नॉरमल सलाइन के इस संयोजन को कम से कम 6 सप्ताह के लिए सप्ताह में दो बार मरीजों में प्रशासित किया जाना चाहिए. यह रोग से बचने का एक और उपाय है और अन्य दवाओं के साथ ही साथ स्पशरेंमुख लक्षण लक्ष्नात्मक दोनों ही प्रकार के मरीजों के लिए उपयुक्त है.
चीन में कोविड-19 को लेकर आपकी क्या अनुभव रहे हैं कितने परीक्षणों के बाद किसी व्यक्ति को कोरोना वायरस संक्रमण से मुक्त करना सुरक्षित है?
किसी मरीज को कोविड-19 मुक्त करने के लिए कोरोनावायरस का परीक्षण कम से कम 9 बार किया जाना चाहिए. चीन में ऐसा ही किया जा रहा है. चीन में यह प्रक्रिया कारगर रही है और यह भारत में भी काम करेगा. आटी- पीसीआर के माध्यम से कम से कम 5 परीक्षण तो होना ही चाहिए.
कोरोना वायरस मुख्य रूप से श्वसन प्रणाली को ही अपनी चपेट में लेता है या फिर दूसरे अंगों को भी नुकसान पहुंचता है?
इलाज की इस श्रेणी में सिर्फ श्वसन प्रणाली पर ही गौर नहीं करना चाहिए क्योंकि समस्या की जड़ कहीं और भी हो सकती है. कोविड-19 शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को भी क्षति पहुंचा सकता है. चीन में कोरोनावायरस के एक मरीज की स्ट्रोक के चलते मौत हो गई. शव का परीक्षण करने पर धमनियों की सबसे अंदरूनी परत सूजी हुई मिली. इससे यह निष्कर्ष निकाला गया कि कोरोना वायरस ने धमनियों की परत को प्रभावित किया है. जिसके चलते थक्के जम गए. परिणाम स्वरूप शख्स को दिल का दौरा पड़ा. इसलिए यह कहा जा सकता है कि कोविड-19 सिर्फ श्वसन ही नहीं बल्कि श्वसन प्रणाली से जुड़ी हुई अन्य हिस्सों को भी प्रभावित कर सकता है.
क्या आपको लगता है कि जुलाई के अंत तक भारत में कुरौना वायरस के मामलों की संख्या अपने चरम पर होगी?
ऐसा लगता है कि भारत अभी ही अपने चरम पर है और जून के अंत या जुलाई के पहले सप्ताह से मामलों की संख्या में कमी देखने को मिलेगी. अगर सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों का पालन किया जाए तो स्थिति निश्चित तौर पर सुधरेंगे. लेकिन अगर इनका सही से पालन नहीं किया गया तो स्थिति बिगड़ सकती है. जनसंख्या का घनत्व मामलों की संख्या में बढ़ोतरी का एक प्रमुख कारक हो सकता है. सरकार को हॉटस्पॉट इलाकों को ढूंढने पर ध्यान देने और लोगों से नियमों का पालन करने की अपील करनी चाहिए. आखिरकार यह जनता की भलाई के लिए ही तो है.
चीन कोविड-19 के खिलाफ कैसे लड़ रहा है?
ऐसा लगता है कि चीन ने वुहान को ना खोलकर इस लड़ाई पर जीत हासिल की है. चीन में कोविड-19 मरीजों के लिए कई तरह के कार्यक्रम को आयोजित किया जा रहा है. जहां प्रशासन संक्रमित लोगों से लगातार संपर्क कर रही है. भारत में सरकार को दिशा निर्देशों का पालन करने वाले को पुरस्कृत किया जाना चाहिए. इससे समाज में एक सकारात्मक बदलाव आएगा.
स्रोत- आईएएनएस.

Post a Comment

0 Comments