इन आदतों पर काबू पाकर हम बच सकते हैं कोरोनावायरस से, आईसीएमआर ने बताएं उदाहरण, देखें परखे और सावधान रहें

कल्याण आयुर्वेद- आज कोरोना संक्रमण पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बना हुआ है. इसके लक्षणों को लेकर पिछले 5 महीनों में बहुत सारी बातें सामने आई है.
आपको बता दें कि इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च आईसीएमआर ने देशवासियों के हित में कुछ बातों पर जोर देते हुए बताया है कि हम अपने दैनिक जीवन में किन आदतों पर काबू पाकर कोरोनावायरस संक्रमण से खुद को बचाव कर सकते हैं. कोरोना वायरस संक्रमण के ज्यादातर मामले नजदीकी संपर्क में आने से फैले हैं. ऐसे में संक्रमण को रोकने के लिए शारीरिक दूरी और साफ- सफाई का ध्यान रखना जरूरी है.
देश में इटली के पर्यटकों में सबसे पहले सामने आए कोरोना संक्रमण के मामले के अध्ययन से प्राप्त निष्कर्षों को साझा करते हुए आईसीएमआर ने कहा है कि नजदीकी लोगों में संक्रमण के ज्यादा मामले पाए गए हैं. ऐसे में नजदीकी संबंध वालों की पहचान करना, उनकी जांच करना और पॉजिटिव पाए जाने पर आइसोलेशन में रखना, इसके कम्युनिटी ट्रांसमिशन को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है.
भारत में शुरुआत में संक्रमित पाए गए 16 इतालवी पर्यटकों और एक भारतीय में कोरोनावायरस संक्रमण को लेकर मार्च-अप्रैल के बीच विस्तृत अध्ययन किया गया था.
इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च में आईसीएमआर का यह अध्ययन प्रकाशित किया गया है. कहा है कि पॉजिटिव पाए गए बहुत से मरीजों में कोई लक्षण नहीं था. ऐसे में कॉन्ट्रैक्ट ट्रेसिंग इसके प्रसार को थामने की दिशा में सबसे अहम है.
आईसीएमआर ने बताया है कि साल 2009 में फैले स्वाइन फ्लू से सबक लेते हुए सरकार ने इस बार इंटेलीजेंट टेस्टिंग स्ट्रेटजी अपनाई है और कोविड-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में अपनी तैयारी को मजबूत किया है.
आज देश में 432 सरकारी और 178 निजी जांच घरों में प्रतिदिन 1.1 लाख सैंपल की जांच हो रही है. जांच की क्षमता को अगले कुछ दिनों में 2,00,000 प्रतिदिन पहुंचाने का लक्ष्य है.
दुनिया भर से मिली जानकारियों के अनुसार जांच के दायरे को विदेश से आने वाले प्रवासी श्रमिकों और कोविड-19 से लड़ाई में लगे योद्धाओं तक बढ़ाया गया है.
बढ़ी जरूरतों के हिसाब से उत्तर प्रदेश, बिहार, बंगाल जैसे राज्यों में जांच के लिए और प्रयोगशालाओं और जांच मशीनें स्थापित की जा रही है.

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