गिलोय को आयुर्वेद में माना जाता है अमृत, जानिए किस- किस रोगों को खत्म करने में आती है काम

कल्याण आयुर्वेद- गिलोय को आयुर्वेद में अमृत समान गुणकारी माना गया है. मान्यता है कि गिलोय जिस पेड़ के पास मिलती है और यदि उसे आधार बना ले तो उस पेड़ के गुण उसमें आ जाते हैं.
गिलोय को आयुर्वेद में माना जाता है अमृत, जानिए किस- किस रोगों को खत्म करने में आती है काम
गिलोय कई प्रकार के होते हैं और यह जरूरी नहीं है कि हर गिलोय उत्तम हो. बिना सहारे की गिलोय व नीम पर चढ़ी गिलोय श्रेष्ठ मानी जाती है. इसकी छाल, जड़, तना और पत्ती एंटीऑक्सीडेंट्स, कैल्शियम, फास्फोरस, प्रोटीन और अन्य न्यूट्रिएंट्स मौजूद होते हैं.
गिलोय के पत्ते से लेकर इसकी लकड़ी में भी कमाल से गुण होते हैं. इसकी लकड़ी मतलब डंठल के टुकड़े का काढ़ा बनाकर पीने से शरीर के कई विकारों को दूर करता है. इसे अन्य जड़ी बूटियों के साथ मिलाकर भी इस्तेमाल किया जाता है. गिलोय का सत्व 2- 3 ग्राम, चूर्ण 3-4 ग्राम और काढ़ा के रूप में 50 से 100 मिलीलीटर सेवन किया जा सकता है.
गिलोय हमारे शरीर के कई संक्रमण और रोगों को दूर करने में काफी मददगार होता है. यह केवल बुखार ही नहीं बल्कि दर्द, मधु में एसिडिटी, सर्दी. जुकाम. खून की कमी. कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के अलावा रक्त को शुद्ध कर शारीरिक और मानसिक कमजोरी दूर करने में भी लाभदायक होता है.
गिलोय को आयुर्वेद में माना जाता है अमृत, जानिए किस- किस रोगों को खत्म करने में आती है काम
इसके अलावा गिलोय का सेवन पेट से जुड़ी समस्या और मोटापे को कम करने के लिए भी किया जाता है. इसके लिए आप एक चम्मच गिलोय के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह-शाम पिए.
यदि पेट में कीड़े हो गए हो और कीड़े के कारण शरीर में खून की कमी हो रही है तो पीड़ित व्यक्ति को कुछ दिनों तक नियमित रूप से गिलोय का सेवन करना फायदेमंद होता है क्योंकि खून की कमी को दूर करता है.
गिलोय के रस का नियमित रूप से सेवन करने से पाचन से जुड़ी समस्या दूर रहती है. हमारा पाचन तंत्र ठीक से काम करता है. इसके लिए आंवले के चूर्ण के साथ नियमित रूप से सेवन करना चाहिए.
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नोट- कहा जाता है कि किसी चीज का अति नुकसानदायक हो सकता है इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि इसका सेवन ज्यादा मात्रा में नहीं करना चाहिए क्योंकि इसकी तासीर गर्म होती है और मुंह में छाले हो सकते हैं.

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