गोमूत्र का सेवन करने से दूर होती है कई गंभीर बीमारियां, जानें

कल्याण आयुर्वेद- गोमूत्र को शास्त्रों में अमृत माना जाता है. गोमूत्र कीटाणु नाशक है जो शरीर के कई जटिल बीमारियों को दूर करने में मददगार होता है.
गोमूत्र का सेवन करने से दूर होती है कई गंभीर बीमारियां, जानें
गोमूत्र में कार्बोलिक एसिड, यूरिया, फास्फेट, यूरिक एसिड, पोटैशियम और सोडियम होता है. जब गाय का दूध देने वाला महीना होता है तब उस गाय के मूत्र में लेक्टोजन रहता है जो हृदय और मस्तिष्क की बीमारियों के लिए काफी लाभदायक होता है.
गोमूत्र के फायदे-
1 .वात, पित्त और कफ के कुल 148 रूप है. इन 148 रोगों को अकेले दूर करने की क्षमता रखने वाली अभी कोई वस्तु है तो वह है देसी गाय का गोमूत्र यह वात, पित्त, कफ तीनों को सम अवस्था में लाने के लिए मददगार होता है जो सभी रोगों जड़ होते हैं.
2 .गोमूत्र में वात और कफ के सभी रोगों को पूरी तरह से समाप्त करने की शक्ति होती है. पेट के रोगों को गोमूत्र खत्म करता है. लेकिन कुछ औषधियों के साथ इसका सेवन करना पड़ता है.
3 .आधा कप गोमूत्र सुबह खाना खाने के 1 घंटे पहले सेवन करने से बवासीर ( बादी और खूनी दोनों ) फिस्टुला, भगंदर, आर्थराइटिस, जोड़ों का दर्द, उच्च रक्त दबाव यानी हाई ब्लड प्रेशर, हृदयाघात, कैंसर आदि ठीक करने के लिए सेवन किया जाता है.
4 .गोमूत्र में वही 18 सूक्ष्म पोषक तत्व मौजूद होते हैं जो मिट्टी में होते हैं. शरीर की बीमारियों को ठीक करने के लिए शरीर को जीतने घटक चाहिए वह सब गोमूत्र में उपलब्ध है. जैसे- सल्फर की कमी से रोग होते हैं.
5 .गोमूत्र से हड्डियों के रोग भी दूर होते हैं. गोमूत्र से खासी, सर्दी, जुकाम, दमा, टीवी, अस्थमा जैसी सब बीमारियां दूर होती है.
6 .टीबी के मरीजों के लिए गोमूत्र का सेवन करना काफी फायदेमंद होता है क्योंकि इससे जब एक बार टीबी ठीक हो जाता है तो दुबारा नहीं होता है.
7 .गोमूत्र शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार होता है. इससे प्रतिरोधक क्षमता इतनी बढ़ जाती है कि शरीर में कोई बीमारियां प्रवेश नहीं कर पाती है.
8 .टीबी की बीमारी में डॉट की गोलियों का असर बहुत रहती है. गौमूत्र के साथ सेवन करने से 20 गुना अधिक हो जाता है अर्थात सिर्फ गोमूत्र पीने से टीबी 3 से 6 महीने में जड़ से खत्म हो जाता है.
9 .गोमूत्र का असर गले के कैंसर पर, आहार नली के कैंसर पर, पेट के कैंसर पर बहुत ही अच्छा प्रभावी होता है गोमूत्र के असर को कैंसर के केस में अध्ययन प्रयोग के लिए गुजरात में एक बहुत बड़ा अस्पताल बन रहा है.
10 .शरीर में जब करक्यूमिन नाम का तत्व की कमी हो जाती है तभी शरीर में कैंसर रोग होता है. गोमूत्र में यही करक्यूमिन भरपूर मात्रा में मौजूद होता है और पीने के तुरंत बाद पचने वाला होता है. जिससे कि यह तुरंत असर कारक होता है.
11 .कितनी भी पुरानी गठिया का दर्द हो, गोमूत्र का सेवन किया जाए तो यह जड़ से खत्म हो जाता है. इसके लिए कुंवारी गाय ( बछिया ) का मूत्र लेकर इसे 8 कपड़े में छानकर आधा से एक कप की मात्रा में सुबह खाली पेट पीना चाहिए.

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