मिल गई कोरोनावायरस की वैक्सीन, पहली खेप में चार करोड़ बनाने का काम हुआ शुरू

 मिल गई कोरोनावायरस की वैक्सीन, पहली खेप में चार करोड़ बनाने का काम हुआ शुरू
कल्याण आयुर्वेद- आज कोरोनावायरस से पूरी दुनिया जंग लड़ रही है और कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए कई देश वैक्सीन ढूंढने में लगे हुए हैं. लेकिन कोरोना से जंग में विज्ञान की अपनी दिक्कतें हैं. किसी भी क्लिनिकल ट्रायल में लगने वाला समय, लेकिन अब इस समय को बहुत कम करने के लिए वॉलिंटियर्स की संख्या को बढ़ाकर इस दिशा में काम हो रहा है. इसके लिए तैयार की जा रही है 10,000 कोरोना कमांडो की सेना, जो मिलकर कोरोना का काम तमाम करेगी. जिनके शरीर में कोरोनावायरस का ऐसा बारूद बनेगा की कोरोना का खौफ खत्म हो जाएगा.
 मिल गई कोरोनावायरस की वैक्सीन, पहली खेप में चार करोड़ बनाने का काम हुआ शुरू
ब्रिटेन से कोरोना को खत्म करने की खबर कभी भी आ सकती है. साउथम्पटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने क्लिनिकल ट्रायल के लिए 10,000 वॉलिंटियर्स की भर्ती शुरू कर दी है. जिनके शरीर पर दवा का प्रयोग का असर देखा जाएगा. इस साल की शुरुआत यानी जनवरी से इस वैक्सीन पर काम शुरू है. सबसे अच्छी बात यह है कि शुरू से लेकर अब तक सब ठीक रहा और चिंपांजी पर इस दवा का असर अच्छा रहा है. जिसके बाद अब मानव ट्रायल शुरू होने जा रहा है. इस ट्रायल के समय को कम किया जा सके इसलिए 10000 से ज्यादा वॉलिंटियर्स पर यह ट्रायल होगा.
अच्छी बात यह है कि पहले चरण के नतीजे बेहतर रहे हैं. जिसके बाद अब कोरोना से जंग में मंजिल नजर आने की उम्मीद जगी है. वैज्ञानिकों का आत्मविश्वास दिखाता है कि वह जल्द ही कामयाब हो सकते हैं. वैक्सीन पर जनवरी में काम शुरू हुआ. जिसमें चिंपांजी के लिए वायरस का इस्तेमाल किया गया है और यह वही दवा है जिसे यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफर्ड के जेलर इंस्टीट्यूट और ऑक्सफर्ड वैक्सीन ग्रुप द्वारा विकसित किया गया है.
अगले चरण में बुजुर्गो व्यस्कों को और बच्चों की जरूरत पड़ेगी. जिन पर बड़े पैमाने पर ट्रायल होंगे.
 मिल गई कोरोनावायरस की वैक्सीन, पहली खेप में चार करोड़ बनाने का काम हुआ शुरू
18 से 55 साल की 250 ऐसे लोग जो कोरोना वायरस संक्रमित उनके संपर्क में आए हो, 120 ऐसे लोग जो 70 वर्ष से ज्यादा उम्र के हों कम से कम 55 वर्ष की उम्र के 250 स्वस्थ लोगों का एक और ग्रुप यानी वैज्ञानिक अलग-अलग उम्र के लोगों पर रिसर्च करना चाहते हैं ताकि हमारे शरीर की इम्युनिटी पर होने वाले असर की जांच की जा सके, साथ ही बुजुर्गों और बच्चों के शरीर में होने वाले अंतर के बारे में भी जाना जा सके और हर उम्र के लोगों के शरीर पर इसके साइड इफेक्ट की जानकारी प्राप्त हो सके.
ट्रायल के दूसरे और तीसरे राउंड में ChAdOx1 या फिर वैक्सीन (MenACWY ) की एक या दो खुराक दी जाएगी. आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि ChAdOx1 दवा चिंपांजी के एक सामान्य कोल्ड वायरस के कमजोर संस्करण से बनी है. हालांकि जब यह मनुष्य के शरीर में जाएगी तो यह बीमारी नहीं दवा का काम करेगी. इसे उन जिनों के साथ जोड़ा जाएगा जो कोविड-19 वायरस से प्रोटीन बनाते हैं यानी जीन प्रोटीन के जरिए वायरस शरीर में अपना रास्ता बनाता है उन्हीं प्रोटीन से जाकर सीधे यह दवा जुड़ जाएगी.
वैज्ञानिकों ने इस दवा को लेकर इतना आत्मविश्वास दिखाया है कि इस दवा को बनाने का करार पहले ही हो चुका है और एस्ट्रजेनका जैसी जानी-मानी फार्मा कंपनी पहली खेप में किसकी 4,00,00,000 वैक्सिंग बनाने पर काम शुरू कर चुकी है.
न्यूज़ स्रोत- न्यूज़24 ऑनलाइन.

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