खांसी, सुखी खांसी और कफ को जड़ से खत्म करता है यह आयुर्वेदिक औषधि, जानें बनाने के तरीके और फायदे

कल्याण आयुर्वेद- बदलते मौसम के साथ खांसी, सर्दी, जुकाम, बुखार आदि होना आम समस्या है. जिससे काफी लोग परेशान हो जाते .हैं वहीं यदि इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए लोग अंग्रेजी दवाइयों का सेवन करते हैं तो कई बार उनकी यह तकलीफ बढ़ जाती है क्योंकि अंग्रेजी दवाओं के सेवन से कफ सूख जाता है और यह सूखी खांसी में परिवर्तित हो जाती है जो कई दिनों तक परेशान करती रहती है. ऐसे में यदि आयुर्वेदिक औषधि का सहारा लिया जाए तो यह काफी फायदेमंद साबित होगा.
खांसी, सुखी खांसी और कफ को जड़ से खत्म करता है यह आयुर्वेदिक औषधि, जानें बनाने के तरीके और फायदे
आज हम खासी और कफ को दूर करने के लिए जिस औषधि के बारे में बात कर रहे हैं उसका नाम है सितोपलादि चूर्ण. यह एक आयुर्वेदिक औषधि है जो कफ खांसी और जुकाम जैसे रोगों को दूर कर पाचन व इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है.
सितोपलादि चूर्ण बनाने की विधि-
सितोपलादि चूर्ण बनाने के लिए 100 ग्राम वंशलोचन, 200 ग्राम मिश्री, 50 ग्राम पीपल, 25 ग्राम छोटी इलायची, और 15 ग्राम दालचीनी लेना है. अब इन सभी को पीस कर पाउडर बना कर सुरक्षित रख लें. आपका सितोपलादि चूर्ण तैयार हो गया.
खांसी, सुखी खांसी और कफ को जड़ से खत्म करता है यह आयुर्वेदिक औषधि, जानें बनाने के तरीके और फायदे
सेवन विधि-
2 ग्राम चूर्ण को एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर सुबह-शाम सेवन करना है.
खांसी, सुखी खांसी और कफ को जड़ से खत्म करता है यह आयुर्वेदिक औषधि, जानें बनाने के तरीके और फायदे
सितोपलादि चूर्ण के फायदे-
1 .इस चूर्ण के सेवन से श्वास, खांसी, टीबी, हाथ और पैरों की जलन, अग्निमांद्य, जिह्वा की शून्यता, पसली का दर्द, अरुचि, ज्वर और रक्त पित्त शांत हो जाता है.
2 .इसके सेवन से बढ़े हुए पित शांत होता है. कफ ढीला हो जाता है. अन्न के प्रति रुचि उत्पन्न करता है. जठराग्नि को तेज करता है और पाचक रस को उत्तेजित कर भोजन को बचाता है.
3 .पीत की बढ़ोतरी के कारण कफ सुखकर छाती में बैठ गया हो. प्यास अधिक हो, हाथ, पांव और शरीर में जलन हो, खाने की इच्छा ना हो, मुंह से खून गिरना, साथ ही थोड़ा-थोड़ा बुखार का रहना, बुखार रहने के कारण शरीर निर्बल और दुर्बल तथा कांति हिन हो जाना आदि उपद्रव में इस चूर्ण का सेवन करना फायदेमंद होता है. इससे काफी लाभ होता है.
4 .बच्चों के सूखा रोग में जब बच्चा कमजोर और निर्बल हो जाए, साथ ही थोड़ा- थोड़ा बुखार भी बना रहे, श्वास या खांसी की समस्या भी हो तो इस चूर्ण के साथ प्रवाल भस्म और स्वर्ण मालती वसंत की थोड़ी मात्रा मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से अच्छा लाभ होता है.
खांसी, सुखी खांसी और कफ को जड़ से खत्म करता है यह आयुर्वेदिक औषधि, जानें बनाने के तरीके और फायदे
5 .हाथ व पैरों के तलवों में होने वाली जलन से भी छुटकारा दिलाने में काफी मददगार होता है. इसके लिए सुबह-शाम इसका सेवन करना चाहिए.
6 .बिगड़े हुए जुकाम में भी इस चूर्ण का सेवन किया जाता है. अधिक सर्दी लगने शीतल जल अथवा और समय में जल पीने से जुकाम हो गया हो कभी-कभी यह जुकाम रुक भी जाता है. इसका कारण यह है कि जुकाम होते ही यदि सर्दी रोकने के लिए शीघ्र ही उपाय किया जाए तो कफ सूख जाता है. परिणाम स्वरूप यह होता है कि सिर में दर्द, सूखी खांसी, शरीर में थकावट, आलस्य और शरीर का भारी मालूम पड़ना, सिर भारी लगना, अन्न में रुचि रहते हुए भी खाने की इच्छा ना होना आदि समस्याएं होती है. ऐसी स्थिति में इस चूर्ण को शर्बत बनाप्सा के साथ देने से बहुत लाभ होता है क्योंकि यह रुके हुए दूषित कफ को पिघलाकर बाहर निकाल देता है और इससे होने वाले उपद्रव को भी दूर कर देता है.
नोट- सितोपलादि चूर्ण कई आयुर्वेदिक कंपनियों की बनी बनाई हुई मिलती है.
यह जानकारी अच्छी लगे तो लाइक, शेयर करें और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारियां रोजाना पाने के लिए इस चैनल को अवश्य फॉलो कर लें. धन्यवाद.

Post a Comment

0 Comments