बीमारियों से लड़ने की क्षमता में इजाफा करता है गिलोय, ऐसे करें सेवन

कल्याण आयुर्वेद- फिलहाल कोरोना वायरस महामारी के दौर में हर कोई बीमारियों से लड़ने की क्षमता यानी इम्यून सिस्टम में इजाफा करने में लगा हुआ है. डॉक्टर इस बीमारी से बचने के लिए कई तरह के प्रयोग करने को कह रहे हैं.
बीमारियों से लड़ने की क्षमता में इजाफा करता है गिलोय, ऐसे करें सेवन
वही आयुष मंत्रालय ने शरीर में इम्यून सिस्टम मजबूत करने के लिए कई तरह के नुस्खे भी सुझाए हैं क्योंकि कोरोना से निपटने के लिए अब तक कोई कारगर उपाय नहीं खोजा जा सका है इसलिए डॉक्टरों का कहना है कि अगर व्यक्ति का इम्यून सिस्टम मजबूत हो तो वह कोरोना से आसानी से लड़ सकता है.
रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के लिए भारतीय आयुर्वेद में कई तरह के नुस्खे बताए गए हैं. लेकिन इनमें से गिलोय का महत्व सबसे अधिक है. गिलोय के सेवन से शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता में इजाफा होता है. दरअसल शरीर की रक्त कोशिकाएं दो तरह की होती है लाल रक्त कोशिकाएं यानी आरबीसी और श्वेत रक्त कोशिकाएं यानी डब्लू बीसी.
श्वेत रक्त कणिकाएं और मजबूत हो तो शरीर में बाहरी रोगों से लड़ने की क्षमता भी बढ़ जाती है और गिलोय जिसे गुडूची और गुरीच के नाम से भी जाना जाता है जो सीधे तौर पर डब्ल्यूबीसी को मजबूत बनाती है. इसलिए गिलोय इम्यून सिस्टम बढ़ाने के लिए असरदार है.
चलिए जानते हैं गिलोय में पाए जाने वाले गुणों के बारे में-
गिलोय में तीन तरह के पाए जाते हैं एल्केलाइड-
गिलोय में तीन तरह के एल्केलाइड पाए जाते हैं. गिलोइनिन, ग्लूकोसाइड और बरबेरिंन जो श्वेत रक्त कणिकाओं यानी डब्ल्यूबीसी को बढ़ाते हैं और अधिक संख्या में डब्ल्यूबीसी शरीर की कोशिकाओं की रक्षा करते हैं और नई कोशिकाओं के निर्माण में भी मददगार होते हैं इसलिए गिलोय को इम्यूनोबूस्टर भी कहा जाता है.
गिलोय का जूस या सत्व-
गिलोय का जूस या सत्व का नियमित सेवन करने से रोग प्रतिरोधक क्षमता तो बढ़ाता ही है साथ ही सर्दी- जुकाम समेत कई तरह की संक्रामक बीमारियों से दूर रखता है.
होते हैं एंटीपायरेटिक गुण-
गिलोय में एंटीपायरेटिक गुण होते हैं जो पुराने से पुराने बुखार को भी ठीक कर देते हैं. इसी वजह से मलेरिया, डेंगू और स्वाइन फ्लू जैसे गंभीर रोगों में होने वाले बुखार से आराम दिलाने के लिए गिलोय के सेवन की सलाह दी जाती है. चिकनगुनिया बुखार की दवा के रूप में भी गिलोय का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है.
गिलोय में होती है एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण-
गिलोय में एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं. इसलिए यह सांसो से संबंधित रोगों से आराम दिलाने में प्रभावशाली है. गिलोय को नियंत्रित करता है साथ ही साथ इम्यूनिटी पावर को भी बढ़ाता है. जिससे अस्थमा और खांसी जैसे रोगों से बचाव होता है और फेफड़ों को स्वस्थ रखता है.
किडनी से जुड़ी बीमारियों का है रामबाण दवा-
गिलोय के सेवन से शरीर में इंसुलिन का स्राव अधिक हो जाता है और इन्सुलिन रेजिस्टेंस को कम करता है. इस तरह यह डायबिटीज के मरीजों के लिए भी काफी लाभदायक औषधि है.
त्वचा की समस्याओं को करता है दूर-
गिलोय त्वचा प्रॉब्लम को भी दूर करता है. त्वचा संबंधी रोगों और एलर्जी को दूर करने में यह सहायक होता है. अर्टिकेरिया में त्वचा पर होने वाले चकत्ते हो या चेहरे पर निकलने वाले कील- मुंहासे गिलोय इन समस्याओं को ठीक करने में मदद करता है.
नोट- आयुर्वेद में गिलोय का सत्व, काढ़ा आदि बनी बनाई उपलब्ध है और इसका सेवन आसानी से किया जा सकता है फिर भी आप मात्रा एवं सही उपयोग के लिए चिकित्सक की राय जरूर लें.
धन्यवाद.

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