इस खतरनाक बीमारी में हिस्सेदारी पुरुषों की, लेकिन ज्यादा कष्ट होता है महिलाओं को, जानें बचाव के उपाय

कल्याण आयुर्वेद- एसटीडी यानि सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज या यौन संचारित रोग यह वह रोग या संक्रमण है जो यौन संपर्क द्वारा एक से दूसरे व्यक्ति में संचारित हो सकते हैं. एड्स भी इसी तरह का एक रोग है. एसटीडी पूरी दुनिया में है. कहीं ज्यादा तो कहीं कम, जगह कोई भी हो लेकिन इसका कष्ट सबसे ज्यादा महिलाओं को ही होता है.
इस खतरनाक बीमारी में हिस्सेदारी पुरुषों की, लेकिन ज्यादा कष्ट होता है महिलाओं को, जानें बचाव के उपाय
40 वर्षों से एसटीडी का अध्ययन करने वाले डॉक्टर हेडफील्ड का कहना है कि एसटीडी जैविक और मनोवैज्ञानिक रूप से सेक्सीस्ट यानी महिला विरोधी है. इन बीमारियों का सबसे बुरा प्रभाव महिलाओं पर ही होता है. दुनिया में क्लैमाइडिया और गोनोरिया नाम की बीमारी बांझपन और एकटॉपिक प्रेगनेंसी के प्रमुख कारणों में से हैं.
अमेरिका के सेंटर्स ऑफ डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक गोनोरिया, क्लैमाइडिया और सिफलिस के मामले अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं. पिछले 1 साल में कुल 2.4 मिलियन संक्रमण का पता लगा है. इस रिपोर्ट के अनुसार पता चलता है कि युवाओं में विशेषकर लड़कियों पर सबसे ज्यादा खतरा है. सीडीसी का अनुमान है कि STD के सभी नए मामले 15 से 24 वर्ष की आयु के लोगों में देखे गए हैं जबकि 4 में से 1 सेक्सुअली एक्टिव किशोरी में यह रोग दिखाई देते हैं.
महिलाओं को ही क्यों ज्यादा होती है परेशानी-
रिपोर्ट बताती है कि महिलाएं ही यौन संक्रमित रोग से सबसे ज्यादा पीड़ित होती हैं. इसकी कई वजह है जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है जैसे कि-
महिलाओं में संक्रमण होता है आसानी से-
विषमलैंगिक जोड़ों में यह बीमारियां महिला से पुरुषों की तुलना में पुरुष से महिला में अधिक आसानी से प्रसारित होती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि वेजिना की त्वचा पेनिस की त्वचा की तुलना में पतली और ज्यादा नाजुक होती है. इसलिए बैक्टीरिया और वायरस का अंदर चले जाना काफी आसान होता है और वेजिना की नमी से बैक्टीरिया जल्दी विकसित होते हैं. एक बार इंफेक्शन हो गया तो यह महिला की स्वास्थ्य पर काफी बुरा असर डालते हैं.
इस खतरनाक बीमारी में हिस्सेदारी पुरुषों की, लेकिन ज्यादा कष्ट होता है महिलाओं को, जानें बचाव के उपाय
उदाहरण के लिए हरपीज रोग एक महिला को होता है तो महिला जननांग की प्रकृति के कारण उसे बहुत सारे दर्दनाक फफोले निकलते हैं जबकि पुरुषों में इतने फफोले नहीं होते हैं. दूसरा उदाहरण है human papillomavirus या HPV जो सर्वाइकल कैंसर का कारण बनता है और अगर यह जल्दी पकड़ में ना आए तो जानलेवा हो सकता है. पुरुषों को भी एक सीधी से पेनाइल कैंसर हो सकता है. लेकिन वह महिलाओं के सर्वाइकल कैंसर की तुलना में इसे आप 100वें हिस्सा कह सकते हैं. वर्ल्ड कैंसर रिसर्च फंड के अनुसार सर्वाइकल कैंसर दुनिया में आठवां सबसे आम कैंसर है.
इन लक्षणों को गंभीरता से नहीं लेती है महिलाएं-
इन बीमारियों के लक्षण अक्सर महिलाओं में साफ- साफ दिखाई नहीं देते हैं उन्हें आसानी से महिलाओं की कोई दूसरी परेशानी समझा जा सकता है. उदाहरण के लिए अगर किसी महिला को पेशाब में थोड़ी जलन होती है तो वह उसे बहुत गंभीरता से नहीं लेती हैं. उसके लिए रात की मसालेदार खाने को दोषी देकर नजरअंदाज कर देते हैं. ज्यादा से ज्यादा महिलाएं इसे ईस्ट इन्फेक्शन समझ लेती है और खुद ही उसका उपचार भी कर लेती हैं. जबकि हो सकता है कि उसकी फैलोपियन ट्यूब में क्लैमाइडिया प्रभाव डाल रहा हो. एसटीडी से संक्रमित पुरुषों या महिलाओं में ऐसे लक्षण नहीं होते हैं कि उन्हें पता चले कि वह संक्रमित हैं भारतीय महिलाओं में भी क्लैमाइडिया तेजी से बढ़ रहा है.
लक्षण पहचानना नहीं होता आसान-
कोई पुरुष यदि शिकायत लेकर डॉक्टर के पास जाता है तो उसके होने के पीछे की वजह बहुत कम ही होती है. जिसका आसानी से पता भी लग जाता है और इलाज शुरू हो जाता है. लेकिन जब एक महिला ऐसी परेशानी को लेकर डॉक्टर के पास जाती है तो उसके अनेकों कारण हो सकते हैं. तब उनके यूरिन का सैंपल लिया जाता है, वजाइना की जांच की जाती है, जिससे कारण और निवारण का पता चल सके और इसमें काफी समय भी लगता है.
इस खतरनाक बीमारी में हिस्सेदारी पुरुषों की, लेकिन ज्यादा कष्ट होता है महिलाओं को, जानें बचाव के उपाय
यौन संक्रमण के कारण-
यौन रोगों की बढ़ती संख्या का अहम कारण है कंडोम के इस्तेमाल में कमी होना. विशेषज्ञों का कहना है कि यही सबसे महत्वपूर्ण गलती है क्योंकि सुरक्षा का केवल यही एक तरीका है.
महिलाएं यौन संक्रमण से बचने के लिए करें यह उपाय-
1 .पहले तो अपने दिमाग में यह गिल्ट निकाल दे कि एसटीडी केवल बुरे काम करने वाले लोगों में ही होती है. यह आम धारणा है लेकिन यह गलत है यह किसी को भी हो सकती है.
2 .अपने शरीर को अच्छी तरह से जाने सामान्य से कुछ भी अलग महसूस होता है तो इसे नजरअंदाज ना करें. योनि स्राव या गंध रहित योनि स्राव हो या स्राव में कोई भी परिवर्तन दिखाई दे. जेंटल शोर हो गाँठ या सूजन महसूस हो, मासिक धर्म साइकल में परिवर्तन हो या सेक्स के बाद स्पॉटिंग हो तो समझ लीजिए कि आपको डॉक्टर से मिलना जरूरी है.
इस खतरनाक बीमारी में हिस्सेदारी पुरुषों की, लेकिन ज्यादा कष्ट होता है महिलाओं को, जानें बचाव के उपाय
3 .नियमित रूप से जांच करवाते रहनी चाहिए. 24 साल या इससे कम की महिलाएं जो यौन रूप से सक्रिय हो उन्हें साल में एक बार क्लैमाइडिया का टेस्ट करवाना चाहिए.
4 .योनि स्राव सामान्य होता है लेकिन अपने अंडर गारमेंट्स को हमेशा सूखा रखने का प्रयास करें क्योंकि गिला अंडर गारमेंट्स बैक्टीरिया पैदा कर सकता है और इन्फेक्शन का कारण बन सकता है.
5 .मासिक धर्म के दौरान हर 4 से 6 घंटे बाद पैड को बदलना जरूरी है, नहीं तो इंफेक्शन का खतरा अधिक हो जाता है.
6 .सेक्स के बाद वेजिना को अच्छी तरह से साफ करना बहुत जरूरी है. इससे आप इंफेक्शन से बच सकती हैं.
वेजिना के लिए केमिकल युक्त साबुन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, कम केमिकल वाला साबुन और गुनगुने पानी का ही इस्तेमाल करना चाहिए.
7 .सुरक्षित सेक्स की आदत डालें.
8 .एक से अधिक पुरुषों के साथ शारीरिक संबंध बनाना इस बीमारी को बढ़ावा देता है इसलिए ऐसा करने से बचना चाहिए.
इस खतरनाक बीमारी में हिस्सेदारी पुरुषों की, लेकिन ज्यादा कष्ट होता है महिलाओं को, जानें बचाव के उपाय
9 .सेक्स के दौरान कंडोम का इस्तेमाल करना इस बीमारी से बचाव करने में मददगार होगा.
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