कई तरह के संक्रामक बिमारियों से दूर रखता है इस जानवर का दूध पीना, बढ़ जाती है दोनों इम्युनिटी

कई तरह के संक्रामक बिमारियों से दूर रखता है इस जानवर का दूध पीना, बढ़ जाती है दोनों इम्युनिटी
कल्याण आयुर्वेद- प्रतिदिन  एक गिलास दूध पीना सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है. यह ज्यादातर लोग जानते और मानते हैं. छोटे बच्चों से लेकर बड़े-बूढ़ों तक के लिए कैल्शियम का सबसे अच्छा जरिया दूध पीना माना गया है. लेकिन क्या आप जानते हैं सिर्फ गाय का ही नहीं, बकरी का दूध पीकर भी बॉडी के लिए जरूरी न्यूट्रिशन की पूर्ति की जा सकती है. रिसर्च में भी ये बात साबित हो चुकी है कि बकरी का दूध डाइजेशन से लेकर ग्रोथ में मददगार होता है. इसके अलावा, इसे पीने से इम्युनिटी बढ़ जाती है. जिससे कई संक्रामक रोगों से शरीर को लड़ने की शक्ति मिलती है.
कई तरह के संक्रामक बिमारियों से दूर रखता है इस जानवर का दूध पीना, बढ़ जाती है दोनों इम्युनिटी
बकरी के दूध पिने के फायदे-
1 .यह आसानी से पच जाता है. बकरी के दूध में लिपिड कण गाय के दूध में काफी छोटे होते हैं. बड़ी संख्या में छोटे व्यास के साथ वसा ग्लोबुल्स होने से बकरी का दूध अधिक सुपाच्य होता है. इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और फोस्फोरस प्रचुर मात्रा होती है.
2 .यह पॉलीअनसेचुरेटेड वसा PUFA की उच्च मात्रा है. यह LDL एलडीएल (खराब) कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है. यह हृदय रोग, जठरांत्र रोगों और एलर्जी की रोकथाम में मददगार है. इसके अलावा पाचन विकार, दमा, अल्सर, एलर्जी, सूखा रोग, क्षय रोग में काफी फायदेमंद होता है.
3 .बकरी का दूध शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, जिससे शरीर को कोई बीमारी प्रभावित नहीं कर पाती है. यह एलर्जी के लिए भी लाभदायक होता है.
4 .बकरी का दूध ज्यादा सफ़ेद होता है. ये इसलिए की इसमें विटामिन ए की मात्रा अधिक होती है. विटामिन ए प्रतिरक्षा और एंटीबॉडी प्रतिक्रियाओं को प्रभावित करता है.
5 .बकरी के दूध में पोटेशियम, कैल्शियम, क्लोराइड, फास्फोरस, सेलेनियम, जिंक और तांबा गाय के दूध की तुलना में अधिक होते है. यह आंत की सूजन को कम करने और कोलाइटिस से राहत देता है.
6 .बकरी के दूध में गाय के दूध से ज्यादा पौष्टिक और स्वास्थ्यकर तत्व होते हैं. बकरी के दूध का नियमित सेवन आपको ताकतवर बनाता है और बिमारियों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है. बकरी का दूध कई रोगों के उपचार एवं रोकथाम में लाभदायक है, जैसे कि-
पचने में आसानकुछ लोगों को गाय के दूध से गैस और सूजन या पेट फूलने की समस्या होती है. बकरी का दूध इन पेट से सम्बंधित विकारों का समाधान है. ऐसा इसलिए है क्योंकि बकरी के दूध में फैट के तत्व छोटे होते हैं और ये गाय के दूध की अपेक्षा जल्दी टूट या पच भी जाते हैं. इसके अलावा बकरी के दूध में मौजूद पोटेशियम की मात्रा मानव शरीर में क्षारीय गुण पैदा करता है. गाय के दूध में इन पोषक तत्वों की कमी होती है. जिससे गैस जैसी समस्या उत्पन्न होती है.
*होमाजनाइजेशन से रखता है दूर-  इसका प्राकृतिक रूप से एकरूप होने का गुण होमाजनाइज़्ड का मतलब है एक रूपता. गाय के दूध में फैट होता है. जिसकी पानी जैसी परत इसकी सतह पर आ जाती है. इसको दूर करने के लिए गाय के दूध के साथ एक प्रक्रिया करनी होती है जिसे होमाजनाइजेशन कहा जाता है, इससे फैट के अणु ख़त्म हो जाते हैं. इससे क्रीम बनती है और दूध होमोजेनेस और अच्छी तरह मिला हुआ बनता है. होमाजनाइजेशन के नुकसान भी हैं. इससे दूध में तथा साथ ही साथ हमारे शरीर में फ्री रेडिकल्स इकट्ठे होते हैं. ये आगे चलकर स्वास्थ्य से सम्बंधित परेशानियां पैदा करते हैं. बकरी का दूध प्राकृतिक रूप से होमोग्नाइज़्ड होता है और इसके साथ अन्य कोई प्रक्रिया करने की आवश्यकता नहीं होती है. इसलिए बकरी का दूध आपको होमाजनाइजेशन से दूर रखता है.
इससे एलर्जी कम होती है- गाय के दूध में हाई लेवल मिल्क प्रोटीन होता है जिसे कैसिइन कहते हैं. बहुत से बच्चों को इस दूध से एलर्जी होती हैं, परिणामस्वरूप उलटी, दस्त, खुजली आदि होते हैं. इन एलेर्जीज से बचने के लिए बकरी के दूध को एक विकल्प के रूप में लिया जा सकता है. बकरी के दूध में कैसिइन की मात्रा बहुत कम होती है.
लेक्टोज इंटॉलरेंस-जैसी समस्या नहीं: लेक्टोज को भी मिल्क शुगर के रूप में जाना जाता है. इस लेक्टोज को पचाने के लिए मनुष्य शरीर में एक एंजाइम पैदा होता है जिसे लेक्टेस कहते हैं. जिन लोगों में लेक्टेस की कमी होती है उनमे ‘लेक्टोज इंटॉलरेंस’ जैसी समस्या रहती है. बकरी के दूध में लेक्टोज की मात्रा कम होती है जिससे यह पचने में आसान रहता है.
अधिक पोषक- बकरी के दूध में विटामिन ए की अधिकता होती है जिसे मानव शरीर द्वारा आसानी से अवशोषित कर लिया जाता है. इसमें विटामिन बी-2 और राइबोफ्लेविन की मात्रा भी अधिक होती है जिसे प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट्स जैसे तत्व भी आसानी से पच जाते हैं. बकरी के दूध में प्रोटीन, कैल्शियम और फास्फोरस की भी अधिकता होती है. यह एंटीबॉडीज का निर्माण कर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है. बकरी का दूध बायो-आर्गेनिक सोडियम का भी अच्छा स्त्रोत है जो पाचन क्षमता बढ़ाने वाले एन्जाइम्स पैदा करता है.
डेंगू रोग के उपचार मेंडेंगू बीमारी से हम हर साल एक समस्या के रूप में रुबरु होते हैं. यह रोग जमे हुए पानी में पनपने वाले एडीज मच्छर के काटने से होता है. बीमारी से बचने के लिए सतर्क और सावधान रहें तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाएं. इसके लिए जरूरी है रक्त कणिकाओं की संख्या में इजाफा होना. शोध में पाया गया है कि बकरी का दूध रक्तकणों को बढ़ाने में मदद करता है, जो डेंगू से लड़ने के लिए बेहद आवश्यक है.
मधुमेह के रोग के उपचार में– बकरी के दूध का सेवन करने से शरीर में मौजूद एसिड आसानी से पच जाता है. जिससे उच्च रक्तचाप, कैंसर और मुधमेह आदि का इलाज आसानी से हो सकता है.
* देता है ताकत- बकरी के दूध में कई गुण होते हैं जो शरीर के आलस्य को दूर करने के साथ-साथ थकान, मांसपेशियों का खिचाव, सिर दर्द और वजन का बढ़ना आदि की समस्याओं को आसानी से ठीक कर देता है.
रोगप्रतिरोधक क्षमता बढाने मेंशोध में पता चला है कि बकरी के दूध में सेलेनियम की अधिक मात्रा होती है. जिससे यह दूसरे दुधारू पशुओं की तुलना में तीन गुना अधिक सेलेनियम प्रदान करती है जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा देता है.
एचआईवी के रोग के उपचार में– बकरी के दूध में मौजूद गुण से एचआईवी एड्स से पीडि़त मरीजों को लंबे समय तक बचाया जा सकता है. सीडी 4 काउन्टस को बढ़ाता है बकरी का दूध. जो एचआईवी पीडि़त रोगीयों की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम करता है.
इम्यूनिटी बढ़ाए दूध- बकरी के दूध में सेलेनियम नामक एक मिनरल पाया जाता है जो बॉडी के इम्यून पावर को बढ़ाने में मददगार होता है. स्ट्रॉन्ग इम्यूनिटी बॉडी को कई तरह के रोगों से दूर रखती है. बहुत से डॉक्टर भी बकरी का दूध पीने की सलाह देते हैं.
कई तरह के संक्रामक बिमारियों से दूर रखता है इस जानवर का दूध पीना, बढ़ जाती है दोनों इम्युनिटी
डेंगू से बचाव में फायदेमंद है बकरी का दूध, जानिए कारण-
डेंगू से बचने के लिए सावधानियां तो आवश्यक है ही, रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना भी बेहद जरूरी है. इसके लिए जरूरी है रक्त कणिकाओं की संख्या में इजाफा होना. एक शोध के अनुसार बकरी का दूध रक्तकणों को बढ़ाने में मदद करता है, जो डेंगू से लड़ने के लिए बेहद आवश्यक है.
इस तरह से बकरी का दूध डेंगू से बचने के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है. हरे पौधों और पत्ति‍यों को आहार के रूप में ग्रहण करने के कारण इसके दूध में भी औषधीय गुण होते हैं, और यह कई तरह की बीमारियों को दूर करने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यही कारण है कि जो व्यक्ति नियमित तौर पर बकरी का दूध पीता है, उसे बुखार जैसी समस्याएं बहुत कम होती है.
बकरी के दूध में विटामिन और मिनरल्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो बीमारियों से लड़ने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं. विटामिन बी6, बी12, विटामिन डी, फोलिक एसिड और प्रोटीन से भरपूर बकरी का दूध शरीर को पुष्ट कर, प्रतिरक्षी तंत्र को मजबूत करता है, जिससे बीमारियों की संभावना नहीं के बराबर हो जाती है.
एक अन्य शोध के अनुसार किसी बच्चे को बकरी का दूध पिलाने पर उसकी रोधप्रतिरोधक क्षमता में इस कदर इजाफा होता है, कि उसके बीमार होने की संभावना नहीं के बराबर होती है. हालांकि 1 साल से छोटे बच्चों को बकरी का दूध नहीं पिलाना चाहिए, क्यों‍कि इससे उन्हें एलर्जी का खतरा होता है.
बकरी के दूध में पाया जाने वाला प्रोटीन, गाय या भैंस के दूध में मौजूद प्रोटीन की तुलना में बेहद हल्का होता है. जहां गाय के दूध का पाचन लगभग 8 घंटे में होता है, वहीं बकरी का दूध पचने में महज 20 मिनट का समय लगता है.
बकरी का दूध अपच की समस्या को दूर कर शरीर में उर्जा का संचार करता है. इसके अलावा इसमें मौजूद क्षारीय भस्म आंत तंत्र में अम्ल का निर्माण नहीं करता जिससे थकान, मसल्स में खिंचाव, सिर दर्द आदि की समस्या नहीं होती.
डेंगू के इलाज व डेंगू से बचाव में बकरी का दूध बेहद कारगर उपाय है. इतना ही नहीं बकरी का दूध एड्स जैसी बीमारी के लिए भी बेहद फायदेमंद और कारगर उपचार के तौर पर जाना जाता है.
आमतौर पर लोग गाय या भैंस का दूध पीते हैं. बता दें कि जितना फायदेमंद गाय या भैंस का दूध होता है उतना ही गुणकारी बकरी का दूध पीना भी है. 
कई तरह के संक्रामक बिमारियों से दूर रखता है इस जानवर का दूध पीना, बढ़ जाती है दोनों इम्युनिटी
बकरी का दूध पीने के कुछ चमत्कारी फायदे-
बकरी के दूध के पोष्टिक तत्वों का अवलोकन
लिपिड (वसा): फैट को लिपिड भी कहा जाता है. यह दूध का एक अहम् हिस्सा होता होता है क्यूंकि इससे स्वाद उत्पन्न होता है. लिपिड का 97% भाग ट्राई एसाइल ग्लिसरॉल (TAG) नामक पदार्थ का होता है. बाकी 3% में अन्य लिपिड पदार्थजैसे DAG, MAG, cholesterol और फैटी एसिड होते हैं.
बकरी के दूध में फैट छोटे छोटे गोलों के रूप में होता है जिन्हें फैट ग्लोब्युल्स कहते हैं. बकरी में यह ग्लोब्युल्स गाय केदूध से  7 गुना छोटे होते हैं जिससे इन्हें पचाना बहुत आसान होता है .
किसी भी दूध के फैट में 3 तरह के फैटी एसिड होते हैं. एक लंबी चेन वाले फैटी एसिड, मध्यम चेन वाले फैटी एसिड औरछोटी चैन वाले फैटी एसिड. बकरी के दूध में अधिकता मध्यम और छोटी चेन वाले फैटी एसिड्स की होती है. जैसे कैप्रिकएसिडकैप्रोइक एसिडकैप्र्य्लिक एसिडलोरिक एसिड आदि. इन फैटी एसिड्स में में 4 से 18 कार्बन अणु होते हैं. बकरीके दूध में पॉली अन्सेचूरेटेड फैटी एसिड्स भी होते हैं और साथ ही साथ कन्जूगेटेड लिनोलेइक एसिड भी पाया  जाता है. छोटे और मध्यम फैटी एसिड कई बीमारियों को ठीक करने के काम आते हैं, यह मुख्य रूप से रोग करने वाले जीवाणु का नाश करते हैं.
कन्जूगेटीड लिनोलेनिक एसिड (CLA) एक बायो एक्टिव लिपिड की तरह काम करता है जिसका रोगप्रतिरोधक क्षमता पर अनुकूल प्रभाव होता है. CLA  बकरी के दूध में मिलने वाला सबसे महत्वपूर्ण बायो एक्टिव तत्वहोता है और यह प्रतिरोधक क्षमता के अन्य तत्व जैसे साइटोकाइनस,  इकोसेनाइट्स  तथा प्रोस्टाग्लैंडिन आदि  को भीसुचारु रुप से कार्य करने सहायता करता है. मनुष्य में आईजीई (IgE) एंटीबॉडी से होने वाली एलर्जी को भी कम करता हैऔर साथ ही साथ आंतों में होने वाली सूजन को भी कम करने में मददकरता है.
बकरी के दूध में फैट का एक बहुत बड़ा हिस्सा मीडियम चेन ट्राइग्लिसराइड्स (MCT)  का बना होता है जो आहार में मौजूद विभिन्न पोषक तत्वों को हमारे खून में अवशोषित करने में मदद करता है. मुख्यता कैप्रोइक और काप्रय्लिकएसिड MCT का हिस्सा होते हैं और इनमें जीवाणु और कीटाणुओं से लड़ने की क्षमता भी होती है. इसी वजह से MCT ग्राम नेगेटिव और ग्राम पॉजिटिव बैक्टीरिया के संक्रमण से बचाव भी करता है. कुछ अन्य लिपिड गंग्लियोसाइड्स औरसरेब्रोसाइड्स  भी बकरी में पाए जाते हैं.
 इनका बच्चों के दिमागी विकास में एक महत्वपूर्ण योगदान होता है क्योंकि यहलिपिड दिमाग के  टिश्यूज बनाने में मदद करते हैं.
बकरी के दूध मे मिलने वाले प्रोटीन-
बकरी के दूध में मुख्यतः दो प्रोटीन मिलते हैं एक केसीन और दूसरा वेह.
केसीन कुल प्रोटीन का लगभग 80% होता है जो4 रूपों में मिलता है αs1, αs2, β and κ-casein. वेह प्रोटीन भी दो रूपों में मिलता है अल्फा  लेक्ट – एल्बुमिन (α- lactalbumin) और बीटा लेक्ट – ग्लोब्युलिन (β-lactglobulin).
गाय के दूध के मुकाबले बकरी के दूध में अल्फा एस केसीन (αs) की मात्रा कम होती है जबकि बीटा केसिन (β-casein) अधिक होता है. गाय के दूध में मुख्य प्रोटीन αs1 केसिन होता है जबकि बकरी के दूध में  बीटा केसीन सबसेअधिक होता है जो A2 टाइप का होता है.
यह देखा गया है कि जिस दूध में αs1 केसीन होता है उसे पचने में अधिक समय लगता है क्योंकि αs1 केसीन आमाशयमें पूरी तरह डाइजेस्ट नहीं हो पाता. इस हिस्से को पूरी तरह पचने के लिए छोटी आंत के निचले हिस्से तक आना पड़ता है जिसे डूडीनम कहते हैं यहाँ αs1 को पचाते हैं.
बकरी के दूध का केसीन गाय के दूध से बिल्कुल अलग होता है इसमें बीटाकेसिन कि मात्रा सबसे अधिक होती है जो कि आसानी से ऊपरी आंत में ही पच जाता है.
टोरिन- टोरिन बकरी के दूध में मिलने वाला सबसे अहम अमीनो एसिड होता है जिसकी मात्रा बकरी के दूध में गाय केदूध से  40 गुना अधिक होती है. टोरिन मनुष्य के शरीर में विभिन्न कार्य प्रणालियों एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैयह ग्रोथदिमागी विकास,  बाईल साल्ट्स के निर्माण और कोशिकाओं की झिल्ली में कैल्शियम की आवाजाही को भीनियंत्रित करता है| यह क्रिया हृदय की कोशिकाओं के लिए सबसे अधिक आवश्यक होती है.
इससे ओसमोरेगुलेशन नामक क्रिया संपन्न होती है और शरीर में पानी का संचालन और नियंत्रण बना रहता है. इसकी की कमी से मनुष्य में कार्डियोमायोपैथी, एपिलेप्सी और ग्रोथ की कमी और अन्य बीमारियां देखने को मिलती हैं. बकरीके दूध का प्रोटीन हर तरह से मुकम्मल होता है और  यह गाय के दूध की तरह बलगम पैदा नहीं करता है.
बीटा लेक्ट  ग्लोब्युलिन प्रोटीन  खून में रेटिनॉल नामक पदार्थ को कैरी करता है जोकि नजर को तेज करने के काम में आता है. साथ ही साथ इसमें कैंसर प्रतिरोधक क्षमता कीटाणु और जीवाणु नाशी योग्यता भी होती है. यह शरीर की शिराओं में खून के थक्के जमने कभी बचाता है.
दूसरा प्रोटीन अल्फा  लेक्ट  
एल्बुमिन के गहन अध्ययन से यह बात सामने आई है कि वह ब्लैडरऔर  स्किन कैंसर के मरीजों में ट्यूमर कोशिकाओं को मारने में सफल रहा है. इसी प्रोटीन  को जब एक अन्य लिपिडओलिक एसिड के साथ काम्प्लेक्स बनाकर खून में इंजेक्ट किया गया तो इसने आश्चर्यजनक रूप से ब्रेस्ट कैंसर कीसेल्स को खत्म कर दिया. बकरियों से प्राप्त  बीटा केसिन  से बने कुछ पेप्टाइड्स ब्लड प्रेशर को कम करने में अत्यंतसार्थक सिद्ध हुए हैं. इनमें सबसे महत्वपूर्ण ऐस इन्हीबिटरी पेप्टाइड (ACE inhibitory peptide) मिला है, यहपेप्टाइड angiotensin converting enzyme रोकता है. जिससे ब्लड प्रेशर कम हो जाता है. कुछ और एंजाइम बकरी केदूध के केसीन (αs) को तोड़कर कुछ ऐसे पेप्टाइड्स बना देते हैं जिन के अंदर अत्यंत प्रभावशाली एंटीआक्सीडेंट कैपेसिटीहोती है. यह मुख्य रूप से अल्फा केसीन पेप्टाइड में देखी गई है. इन पेप्टाइडस में ग्राम नेगटिव बैक्टीरिया को मारने किक्षमता भी होती है.
बकरी के दूध में मिलने वाले कार्बोहाइड्रेट-
लैक्टोज़ एक मुख्य कार्बोहाइड्रेट है जो कि बकरी के दूध में मिलता है और यह गाय के दूध के मुकाबले बकरी के दूध में कम होता है. यह अन्य तत्वों की तरह लीवर में ना बन कर यह बकरी के थनों में बनता है जहां पर अल्फा  लेक्ट -एल्बुमिन (α- lactalbumin) एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
लैक्टोज़ एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है जो खून में कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस तथा विटामिन डी के अवशोषण को बढ़ाता है. एक और महत्वपूर्ण बात जो कि लैक्टोज़ से जुड़ी हुई है वह यह कि थानों में लैक्टोज़ का उत्पादन बकरी में दूधकी मात्रा को निर्धारित करता है. यह लैक्टोज़ ग्लूकोज और गलक्टोज़ के जुड़ने से बनता है.
लैक्टोज़ से बना एक दूसरा कार्बोहाइड्रेट जिसे लैक्टोज़ डेराइवड ओलिगोसेकराइडस (LDO) कहते हैं. यह ओलिगोसेकराइडस मानव पोषण में बहुत उपयोगी होते हैं क्योंकि इनमें प्री बायोटिक और संक्रमण विरोधी (anti-infective) गुण होते हैं. कुछ अध्ययनों में यह ओलिगोसेकराइडस (LDO) इंफेक्शन और इन्फ्लामेशन की वजह से होनेवाले पेट के दर्द में बहुत लाभकारी सिद्ध हुए हैं. इसलिए इसका इस्तेमाल कमजोर पाचन तंत्र को ठीक करने के लिए किया जा रहा है. बकरी के दूध में इन ओलिगोसेकराइडस (LDO) की मात्रा मनुष्य के दूध से कम होती है परंतु अन्य गाय-भैंसोंऔर भेड़ के दूध से अधिक होती है. और साथ ही साथ बकरी के दूध में मिलने वाले ओलिगोसेकराइडस (LDO) कीसंरचना मनुष्य के दूध में मिलने वाले ओलिगोसेकराइडस (LDO) के समान ही होती है.
कई तरह के संक्रामक बिमारियों से दूर रखता है इस जानवर का दूध पीना, बढ़ जाती है दोनों इम्युनिटी
इसलिए बकरी का दूध मानव शिशु पोषण में बहुत लाभकारी सिद्ध होता है-यदि हम इस तथ्य की भीतर से जांच करें तो हम जानेंगे कि इन्फ्लामेशन से लड़ने का तंत्र LDO द्वारा प्रोत्साहित कियेगए ब्यूटाईरेट नामक तत्व से कार्यरत होता है. साथ ही साथ LDO इन्फ्लामेशन करने वाले हानिकारक बैक्टीरिया कोआंतो पर नहीं चिपकने देता और उपयोगी बैक्टीरिया जैसे लेक्टोबेसिलस और बाईफ़ीडो बैक्टीरिया की उतपत्ति को बढ़ता है.
स्पेन में हुए एक और अध्यन के अनुसार जब बकरी के दूध के LDO को IBD (Inflammatory Bowel Disease) औरकोलाइटिस से ग्रसित चूहों को दिया गया तो इन्फ्लामेशन में भारी कमी देखने को मिली. इन चूहों कि आंतो का जबपरिक्षण किया गया तो कोलाइटिस के कारण होने वाले ज़ख्मो में काफी कमी देखी गयी.
इससे यह निष्कर्ष निकाला गया कि बकरी के दूध में मौजूद लैक्टोज़ डेराइवड ओलिगोसेकराइडस (LDO)  इन्फेक्शनद्वारा होने वाली इन्फ्लामेशन रोधी गुण होते हैं और यह क्षतिग्रस्त आंत को स्वस्थ करने में मदद करता है. इसलिए कहाजाता है कि कमज़ोर पाचन वाले व्यक्तियों और खासकर बच्चो और बूढों को नियमित रूप से बकरी का दूध देना चाहिए.
विटामिन: बकरी के दूध में गाय के दूध से अधिक तथा मनुष्य के दूध के बराबर विटामिन A होता है. बकरी समस्त बीटाकैरोटीन को विटामिन A में बदल देती है इसलिए बकरी का दूध गाय के दूध से अधिक सफ़ेद होता है.  विटामिन A शिशुकि दोनों प्रकार कि रोग प्रतिरोधक क्षमताओं को बढाता है. एक वह प्रतिरोधक क्षमता जो बच्चे में खुद होती है और एक वह प्रतिरोधक क्षमता जो बच्चे को मां से प्राप्त होती है.विटामिन ए की कमी से प्रतिरोधक तंत्र की कोशिकाएं सुचारु रुप से काम नहीं कर पाती. विटामिन ए के साथ विटामिन डीहड्डियों के अलावा प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी सहायक होता है. विटामिन सी भी बकरी के दूध में प्रचुर मात्रा मेंमिलता है और इस विटामिन के अंदर एंटीऑक्सीडेंट और एंटीवायरल गुण होते हैं जो जो बच्चों की शारीरिक मजबूती कोबढ़ाने में मदद करते हैं.
बकरी के दूध में मिलने वाले खनिज-बकरी के दूध में पोटैशियम, कैल्शियम, क्लोराइड, फास्फोरस, सेलेनियम, जिंक और कॉपर गाय के दूध से अधिक मात्रा मेंहोते हैं.
पोटेशियम शरीर के एसिड बेस संतुलन को बनाए रखने के लिए बहुत जरूरी होता है साथ मे ये  मांसपेशी दिमाग की नसेंकिडनियों के कार्य में भी मदद करता है. बकरी के दूध में क्लोराइड की मात्रा  और पशुओं के दूध के मुकाबले कहीं ज्यादा होती है. जिसकी वजह से इसका स्वाद भी थोड़ा खारा हो जाता है. क्लोराइड शरीर में तरल संतुलन (fluid balance), खूनकी पीएच (pH) और ऑसमोटिक प्रेशर को संतुलित रखता है. यह लीवर की कार्यप्रणाली को भी दुरुस्त रखता है और साथही साथ आमाशय में हाइड्रोक्लोरिक एसिड का उत्पादन भी करता है.
कैल्शियम हड्डियों के लिए लाभकारी होता है और मांसपेशी संकुचन खासतौर से दिल की मांसपेशियों की ताकत के लिएएक अहम तत्व होता है. सेलेनियम घातक फ्री रेडिकलस से कोशिकाओं का बचाव करता है. यह कोशिकाएं मुख्य रूप सेखून में मिलने वाली श्वेत रक्त कोशिकाएं होती हैं. जिनसे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है.
हाल ही में हुए एक अध्ययन में यह देखा गया है कि डेंगू के मरीजों में फ्री रेडिकल्स का उत्पादन अत्याधिक बढ़ जाताहै जिससे शरीर ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस नामक अवस्था में आ जाता है. जिससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बिल्कुल समाप्ति की कगार पर पहुंच जाती है. ऐसे में सेलेनियम एंटीआक्सीडेंट की तरह काम करता है और शरीर पर फ्रीरेडिकल्स के प्रहार को कम करने में मदद करता है. यह काम सेलेनियम ग्लूटाथिओन  परओक्सिडेज़ नामक एंजाइम्स केसाथ जुड़कर करता है.  इसीलिए बकरी का दूध डेंगू के बुखार में लाभकारी होता है. यही नहीं बकरी के दूध में मौजूद LDO और मीडियम चेन फैटी एसिड भी डेंगू के वायरस को निष्क्रिय करते हैं. साथ ही साथ टोरीन ब्लड प्लेटलेट्स का महत्वपूर्ण तत्व होता है, खून के मुकाबले टोरीन की मात्रा प्लेटलेट्स में 400 तक अधिक होती है.
एंटीबायोटिक के प्रति उत्पन्नं होते प्रतिरोध की वजह से पशु और पौधों द्वारा निर्मित पोषक तत्वों के ऊपर रिसर्च काफी बढ़ गयी है. इसमें सबसे पहले लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया से उत्पादित तत्व प्रिबोटिक और प्रोबिओटिक आते है जो आंतो को स्वस्थ रखने के लिए अत्यंत लाभकारी होते हैं.
दूध के कुछ अन्य प्रोटीन भी टूट कर छोटे संघटक बनाते हैं जिन्हें एंटीमाइक्रोबियल पेप्टाइड कहते हैं. लेक्टोफेरिन इसका एक उदहारण है| इस तत्व में कैंसर से लड़ने की क्षमता भी होती है और इन्फ्लामेशन रोधी भी होता है.
बाईफ़ीडो बैक्टीरियम-
एक नए हुए अध्यन में ये ज्ञात हुआ है बाईफ़ीडो बैक्टीरियम गाय के दूध की अपेक्षा बकरी के दूध में अच्छा पनपता है. इसीलिए बकरी के दूध के pH अधिक तेज़ी से गिरती है और वेह प्रोटीन अधिक होने के कारण बाईफ़ीडो बैक्टीरियम भी अधिक मिलता है. लेक्टिक एसिड बैक्टीरिया बकरी के दूध में अधिक सक्रीय होते हैं. यह बैक्टीरिया शिशुओ की आंतो में बीमारी पैदा करने वाले जीवाणु से लड़ता है और शिशु को पेट की परेशानियों से मुक्त रखता है. यह शिशु स्वास्थ के लिए इतना ज़रूरी होता है की माँ के दूध में इस बैक्टीरिया की उत्पत्ति को बढ़ाने के लिए अलग से एक तत्व होता है जिसे बाई फ़ीडो फैक्टर कहते हैं. यह किसी और प्राणी के दूध में नहीं मिलता, मनुष्य के दूध के अलावा सिर्फ बकरी के दूध में बाईफ़ीडो बैक्टीरियम को पोषण प्रदान करने की क्षमता होती है. यह एक और कारण है जिसकी वजह से बकरी का दूध शिशुओं के लाभकारी और स्वास्थ वर्धक होता है.
बड़े  (व्यस्क ) व्यक्तियों में भी बाईफ़ीडो बैक्टीरियम से बने प्रोबायोटिक्स को Ulcerative Colitis नामक बीमारी में इस्तेमाल किया जाता है. इस बीमारी में आंतो में अलसर (ज़ख्म) हो जाते हैं और असहनीय पीड़ा होती है, ऐसे में बकरी का दूध बहुत लाभकारी सिद्ध होता है.
हाल ही में हुए अध्यनो में ये ज्ञात हुआ है की बकरी के दूध से बने फरमेनटीड उत्पाद (जैसे दहीछाज आदि) हानिकारक ग्राम नेगेटिव बैक्टीरिया जैसे येर्सिनियासलमोनेल्ला और इकोलाई को भी रोकता है.
एक अत्यंत संवेदनशील अध्यन में देखा गया है की मनुष्य में गले और मूत्र तंत्र के संक्रमण करने वाला बैक्टीरियासिरेशिया मार्केसेन्स  फरमेंट हुए बकरी के दूध में कम सक्रीय था बनिज्बत गाय के फरमेंट दूध के. यह तथ्य मजबूती से इस बात की और संकेत करते हैं की पोष्टिकता की द्रिष्टि से बकरी के दूध को कम महत्त्व दिया गया है परन्तु विज्ञानं के प्रसार और निरंतर हो रही रिसर्च अब इस बात से पर्दा उठा रही है कि हमें अब अपने खान पान में कुछ ज़रूरी बदलाव लाने पड़ेंगे. जिससे हम दवाइयों के बजाये स्वस्थ रहने के लिए आहार का सहारा लें.
बकरी का दूध हर तरह से गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल सेहत के लिए उपयुक्त है और यदि आपको बकरी का दूध मिले तो उसे इश्वर की कृपा मानकर कम से कम अपने बच्चो के स्वास्थ को सुद्रिड और बलवान बनाये.
आइये एक और स्वास्थ के लिए हानिकारक अवस्था ओक्सीडेटिव स्ट्रेस के बारे में जाने-
हमारे शरीर में निरंतर रसायनिक क्रियाएं चलती रहतीं हैं. जिनसे उर्जा और विभिन्न पदार्थ बनते हैं. जिससे जीवन का चक्र चलता है. परन्तु इस सब में कुछ ऐसे पदार्थ भी बनते हैं जो शरीर की कोशिकाओं के लिए हानिकारक होते हैं. जिन्हें फ्री रेडीकल्स कहतें हैं. इनमे उर्जा की कमी होती है. इसलिए ये प्राकृत तौर पर हर एक पदार्थ से क्रिया करने को तैयार रहते हैं और इस क्रिया में कोशिकाओं के भीतर जीवनदायी सूक्ष्म पदार्थो को क्षति पहुंचाते हैं जैसे- DNA, कोशिओकाओं की झिल्ली, एनज़ाइम्स आदि और इन्हें तोड़ कर बेकार कर देते हैं. प्रकृति ने इनसे बचने के लिए शरीर में कुछ ऐसे पदार्थ दिए हैं जो इन फ्री रेडीकल्स से क्रिया करके खुद समाप्त हो जाते हैं. परन्तु इन फ्री रेडीकल्स को निष्क्रिय कर देते हैं. इन्हें एन्टीओक्सीडेन्ट्स कहते हैं, जैसे- विटामिन A, E, C सेलेनियम, निआसिन, सुपर ऑक्साइड डिसम्युटेज़, ग्लूटाथिओन परओक्सिडेज़ आदि. परन्तु कई स्ट्रेस वाली स्थितियों में फ्री रेडीकल्स का उत्पादन अत्यधिक बढ़ जाता है और उनकी शरीर को नुकसान पहुँचाने की क्षमता भी अधिक हो जाती है. ऐसे में ये फ्री रेडीकल्स पूरे शरीर की कोशिकाओं को तोड़ने लगते हैं और सबसे ज्यादा असर श्वेत रक्त कोशिकाओं पर होता है जो विभिन्न बीमारियों से लड़ती हैं. इनकी कमी से बिमारियों का प्रभाव बढ़ जाता है. इसी अवस्था को ओक्सीडेटिव स्ट्रेस कहते हैं और इस कारण से निम्न बीमारियों के होने की पुष्टि विभिन्न रिसर्चओ में हो चुकी है- Asperger syndrome, ADHD, Cancer, Parkinson’s disease, Lafora disease, Alzheimer’s disease, Atherosclerosis, Heart failure, Myocardial infarction, Infection, Chronic fatigue syndrome, and Depression.
2003 में एक रिसर्च हुई जिसमे बकरी का फेर्मेंटड दूध और  नियमित सदा बकरी का दूध कुछ लोगो को दिया गया. जिन लोगो ने बकरी का फेर्मेंटड दूध पिया उनमे LDL का ओक्सीडेशन काफी कम मिला और anti-atherogenic गुण देखने को मिले. जब इन लोगो के मूत्र की जाँच की गयी तो यह देखा गाय की उसमे आइसोप्रोसटेन की मात्रा बहुत कम थी जो की जो की कम ओक्सीडेटिव स्ट्रेस का सबूत है.
बकरी का दूध व्यापक रूप से एंटी-ओक्सीडेशन प्रणाली को कार्यरत करता है और बढती उम्र और उससे जुडी बीमारियों जैसे शाइज़ोफर्निया पर रोक लगाता है और पुरुषो में प्रजनन शक्ति को बढाता है. इसके साथ साथ बकरी का दूध शरीर में कोलेस्ट्रोल के मेटाबोलिज़म को नियंत्रित करके खून में कोलेस्ट्रोल को कम करता है. जिससे शरीर का वज़न नहीं बढ़ता और डियाबेटिज़ को रोकता है.
खून में मौजूद होमोसिसटीन की मात्रा पर नियंत्रण रहता है. खून में अधिक होमोसिसटीन रक्त शिराओं में जलन करने लगता है जिससे ज़ख्म हो जाते हैं और खून के थक्के जमने लगते हैं जिससे हार्ट अटैक के चांस काफी बढ़ जाते हैं. बकरी का दूध होमोसिसटीन को लाभकारी मेथियोनिन में बदल देता है. इसलिए बकरी के दूध के सेवन से शरीर की शिराओं में खून के थक्के जमने की आशंका कम हो जाती है. बकरी का दूध जिंक खून मनी जिंक अवशोषित होने की क्षमता को बढ़ता है.
बकरी के दूध का फैट पेट में तेज़ी से पच जाता है. जिससे वो लिपिड पर ओक्सीडेशन के लिए नहीं बचता और फ्री रेडीकल्स नहीं बन पाते हैं. इसका सबूत बकरी का दूध पीने वालो के खून में TBARS की मात्रा बहुत कम होती है. TBARS शरीर में लिपिड पर ओक्सीडेशन का सूचक होता है.
बकरी के दूध का सेवन करने वाले व्यक्तियों में DNA की स्थिरता का आंकलन करके ज्ञात हुआ की यह DNA को स्थिरता प्रदान करने में एक सकारात्मक भूमिका निभाता है. यहाँ तक की आईरन ओवरलोडिंग के दौरान बकरी का दूध मैगनिशियम और जिंक के अवशोषण को कम नहीं होने देता. DNA निरंतर टूटता फूटता रहता है जिससे अनुवांशिक विलय (म्यूटेशन) का खतरा बना रहता है, DNA में इस टूट फूट  की कुछ एनज़ाइम्स लगातार मर्रमत करते रहते हैं.
इन एनज़ाइम्स को सक्रीय करने और काम करने में मैगनिशियम की आवश्यकता होती है नहीं तो एनज़ाइम्स काम नहीं कर पाते. दूसरे बकरी के दूध के फैट की उच्च गुणवत्ता भी DNA की स्थिरता पर अनुकूल प्रभाव डालती है.
बकरी के दूध में मौजूद कार्नीटीन माईटोकोनड्रीया में फैट के प्रवेश को बढ़ा देता है. जिससे फैट का माईटोकोनड्रीया में उर्जा के दहन बढ़ जाता है. जिससे लिपिड पर ओक्सीडेशन के लिए लिपिड बचता ही नहीं और फ्री रेडीकल्स भी कम बनते हैं. यहाँ ये देखने की ज़रूरत है की बकरी का दूध न सिर्फ एंटी ओक्सीडेंट की तरह काम करता है बल्कि वज़न कम करने में भी सहायता करता है.
पेट की समस्याओं में बकरी के दूध के लाभ-
पेट की अत्यंत जटिल और चिंताजनक स्थिति होती है इन्फ्लामेटोरी बोवेल डिजीज (inflammatory bowel disease), यह बीमारी रोग प्रतिरोधक तंत्र बिगड़ने और बार बार होने वाले इन्फेक्शन से होती है. यह दो बीमारियों का जोड़ होता हैं. पहली अल्सरेटिव कोलाईटीस (ulcerative colitis) दूसरी क्रोहन डिजीज (Crohn Disease) इनमे आंतो में बार बार इन्फ्लामेशन होता है और छोटे छोटे कारक भी इसे उत्तेजित कर देते हैं. इससे मरीज़ ठीक से कुछ खा नहीं पाता और अक्सर पेट में दर्द की शिकायत रहती है. बकरी के दूध में मिलने वाले विशेष ओलिगोसेकराईडस मुख्य रूप से इन्फ्लामेशन को कम करते हैं, वज़न गिरना रुक जाता है, आंतो के ज़ख्म भरने लगते हैं, आंतो को एक आराम मिलता है और दस्त और खून आना बंद हो जाता है.
बकरी का दूध और एलर्जी में लाभ-
सबसे आम एंटीजन जो हमारे खाने में मिलते हैं वो प्रोटीन होते हैं. दूध में भी प्रोटीन होते हैं जिसकी वजह से आम गाय का दूध कभी कभी (2 से 6% लोगो में) एलर्जी कर देता है. यह एलर्जी गाय के दूध में बहुत अधिक देखने को मिलती है. परन्तु बकरी के दूध में एलर्जी करने वाले पदार्थ न के बराबर होते हैं. इसलिए गाय के दूध के मुकाबले में बकरी का दूध अधिक समय से पेट के दर्द की शिकायत में, दमे की बीमारी में और एक्जिमा में अच्छा काम करता है. बकरी का दूध गाय के दूध से होने वाली अधिकतर एलर्जी का इलाज कर देता है.
लेक्टोज़ इनटोलरेन्स-
लेक्टोज़ दूध में मिलने वाला एक कार्बोहायड्रेट हैं जिसे पचाने वाला एन्ज़ायिम लेक्टेज़ नहीं होता है. जिसकी वजह से आम गाय या भैंस के दूध का लेक्टोज़ बड़ी आंत में चला जाता हैं. जहाँ मौजूद बैक्टीरिया इसे तोड़ कर कुछ फैटी एसिड और गैसेस जैसे हाइड्रोजन और कार्बन डाई ऑक्साइड बना देते हैं. जिससे पेट में गैस हो जाती है और असहनीय दर्द होता है.
बकरी के दूध से लेक्टोज़ इनटोलरेन्स वाले मरीजों को कोई हानि नहीं होती और सभी आयु के लोग इसे पी सकते हैं. इसका कारण यह है की बकरी के दूध का केसिन प्रोटीन (बीटा केसिन β-casein) गाय के केसिन (αs1) से भिन्न होता है और पेट में जल्दी से पच जाता है. जिस वजह से लेक्टोज़ समेत पचा हुआ दूध बड़ी आंत से शीघ्र निकल जाता है और लेक्टोज़  इनटोलरेन्स के लक्षण नहीं दिखते हैं.
बकरी के दूध का कैंसर में उपयोग-
बकरी के दूध में मौजूद CLA के अन्दर कैंसर रोधी गुण होते हैं और अध्यनो में CLA ने स्तन कैंसर और कोलोन कैंसर के प्रति प्रतिरोधक गतिविधि दिखाई दी. यहाँ यह कहना मुश्किल है की यह किस वजह से हुआ परन्तु इकोसेंओइड सिग्नलिंग तंत्र में गड़बड़ी या एंटी ओक्सीडेटिव गुण CLA की कार्य का समर्थन करते हैं.
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में बकरी के दूध का योगदान-
रोग प्रतिरोधक तंत्र बहुत संवेदनशील और क्लोज़ नेटवर्क के रूप में काम करता है. इसमें विभिन्न कोशिकाएं काम करती हैं जिनमे से कुछ डायरेक्टली माइक्रोब्स को मारती हैं, कुछ इनडायरेक्टली इम्मुनोग्लोब्युलिन नामक प्रोटीन से काम करते हैं  (इन्हें एंटीबॉडी भी कहते हैं). यह कोशिकाएं प्राकृतिक रूप से फ्री रेडिकल्स बनाने के लिए कर्मबध रहती हैं. जिससे ये रोग पैदा करने वाले मिक्रोब्स को मारती हैं. इस कारण से इम्यून सिस्टम अत्यधिक ओक्सीडेटिव स्ट्रेस  में रहता है. बकरी का दूध अपने एंटी इन्फ्लामेंट्री और एंटी ओक्सीडेटिव गुणों से रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है. हाल ही में किये गए शोधो से पता चला है की बकरी का दूध मनुष्य की रक्त कोशिकाओं और इंडोथीलिअल कोशिकाओं में नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) और रोग प्रतिरोधी साइटोकाईन बनाने में सफल रहा है. नाइट्रिक ऑक्साइड रक्त शिराओ को लचीलापन प्रदान करता है और इन्हें ढीला करता है. जिससे ब्लड प्रेशर के मरीजों को बहुत फायदा होता है. बकरी के दूध के ह्रदय रक्षात्मक गुण इसे लोकप्रिय बनाने के लिए काफी हैं.
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तो अब आप समझ गये होंगे कि बकरी का दूध कई तरह के संक्रामक रोगों से दूर रखने में हमारी मदद करता है.
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स्रोत- पशुधन प्रहरी.

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