फेफड़ों के इन्फेक्शन से लड़ने में मदद करती है घर में प्रतिदिन इस्तेमाल होने वाली यह चीज

कल्याण आयुर्वेद- हमारे शरीर में कब कौन सी बीमारी हो जाए यह कहना मुश्किल है. ऐसे ही बीमारियों में एक है फेफड़ों में इन्फेक्शन का होना. दूषित हवा के बीच सांस लेने से जब दूषित कण नाक व मुंह के साथ श्वास नलिका व फेफड़े को संक्रमित करते हैं तो यह लंग्स इन्फेक्शन की स्थिति बनती है. फेफड़े शरीर का अहम अंग है जिसे व्यक्ति साफ व शुद्ध हवा सांस के रूप में लेता है.
फेफड़ों के इन्फेक्शन से लड़ने में मदद करती है घर में प्रतिदिन इस्तेमाल होने वाली यह चीज
फेफड़ों में इंफेक्शन होने के लक्षणों में मुख्य रूप से छाती में दर्द होना और बार बार खांसी होना आदि शामिल है. फेफड़ों में इन्फेक्शन के कारण होने वाली खांसी सामान्य खांसी से अलग प्रकार की होती है. फेफड़ों में इन्फेक्शन होने से स्वसन तंत्र खराब होता है. फेफड़ों संबंधी अन्य गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती है और यहां तक कि हार्ट फेलियोर जैसी गंभीर समस्याएं भी हो सकती है.
फेफड़ों के इन्फेक्शन कई प्रकार के होते हैं जैसे फ्लू होना, निमोनिया होना, टीवी होना, ब्रोंकाइटिस आदि.
हालांकि ऐसी समस्या हो तो आपको डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए. लेकिन इसके अलावा भी घर में कई ऐसी चीजें मौजूद होती है जो इस समस्या को दूर करने में मददगार होती है.
इस समस्या को दूर करने में लहसुन आपकी काफी मदद कर सकता है. यह कई औषधीय गुणों से भरपूर होता है. यह सिर्फ आपके खाने के स्वाद को ही नहीं बढ़ाता है बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होता है.
लहसुन आपके फेफड़ों में होने वाले जानलेवा संक्रमण से आपकी रक्षा करती है.
फेफड़ों के इन्फेक्शन से लड़ने में मदद करती है घर में प्रतिदिन इस्तेमाल होने वाली यह चीज
चलिए जानते हैं इसके फायदे-
* लहसुन के सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में बढ़ोतरी होती है. साथ ही लहसुन में एलिसिन नामक एंटीबायोटिक भी पाया जाता है जो बहुत से रोगों को होने से बचाता है.
* लहसुन एक प्रकार का रसायन होता है जो सिस्टिक फाइब्रोसिस के मरीजों के फेफड़ों में होने वाले संक्रमण के लिए जिम्मेदार जीवाणुओं को नष्ट कर देता है. बता दें कि सिस्टिक फाइब्रोसिस एक अनुवांशिक बीमारी है जो अपना सीधा प्रभाव फेफड़ों पर डालती है.
* लहसुन में एलीसिन नाम का रसायन पाया जाता है जो संक्रामक फैलाने वाले जीवाणुओं के समूह को खत्म करने में प्रभावी भूमिका निभाता है. इन जीवाणुओं पर अधिकांश एंटीबायोटिक का कोई प्रभाव नहीं होता है.
ऐसे में जब रोगाणु विरोधी एजेंट की बेहद जरूरत है रासायनिक एवं सुख जीव विज्ञानी अनुसंधान में यह क्षमता है कि वह पौधे जैसे लहसुन में मौजूद रोगाणु रोधी योगिक उनकी खोज कर सकता है. एलीसिन का निर्माण लहसुन में आमतौर पर होता है जो मिट्टी के जीवाणुओं से उसकी रक्षा करता है.
* लहसुन में शरीर के विषाक्त पदार्थों को साफ करने की शक्ति होती है. साथ ही यह पेट में मौजूद बैक्टीरिया को भी दूर करने में मददगार होता है. लेकिन खासतौर पर जब लहसुन को कच्चा और खाली पेट खाया जाता है.

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