कल 2 जून 2020 को है निर्जला एकादशी- जानें व्रत कथा, व्रत के फायदे और शुभ मुहूर्त

कल 2 जून 2020 को है निर्जला एकादशी- जानें व्रत कथा, व्रत के फायदे और शुभ मुहूर्त
शास्त्र- भीष्म सेन व्यास जी से कहने लगे कि हे पितामह- भ्राता युद्धिष्ठिर, माता कुंती, द्रोपती, अर्जुन, नकुल और सहदेव आदि सब एकादशी का व्रत करने को कहते हैं. लेकिन महाराज मैं उनसे कहता हूं कि भाई मैं भगवान की भक्ति, पूजा आदि तो कर सकता हूं. दान भी दे सकता हूं. लेकिन भोजन के बिना में रह नहीं सकता हूं.
इस पर व्यास जी कहने लगे हे भीमसेन- यदि तुम नर्क को बुरा और स्वर्ग को अच्छा समझते हो तो प्रति महीना की दोनों एकादशिओं को अन्न मत खाया करो. भीम कहने लगे कि हे पितामह मैं तो पहले ही कह चुका हूं कि मैं भूखा नहीं रह सकता. यदि वर्ष भर में कोई एक ही व्रत हो तो मैं रख सकता हूं क्योंकि मेरे पेट में वृक नाम वाली अग्नि है सो मैं भोजन किए बिना नहीं रह सकता. भोजन करने से वह शांति रहती है. इसलिए पूरा उपवास तो क्या एक समय भी बिना भोजन किए हमें रहना कठिन है. इसलिए हमें आप कोई ऐसा व्रत बताइए जो वर्ष में केवल एक बार ही करना पड़े और मुझे स्वर्ग की प्राप्ति हो जाए.
कल 2 जून 2020 को है निर्जला एकादशी- जानें व्रत कथा, व्रत के फायदे और शुभ मुहूर्त
श्री व्यास जी कहने लगे कि हे पुत्र बड़े-बड़े ऋषियों ने बहुत शास्त्र आदि बनाए हैं. जिनसे बिना धन के थोड़े परिश्रम से ही स्वर्ग की प्राप्ति हो सकती है. इसी प्रकार शास्त्र में दोनों पक्षों की एकादशी का व्रत मुक्ति के लिए रखा जाता है.
व्यास जी के वचन सुनकर भीम सेन नरक में जाने के नाम से भयभीत हो गए और कापकर कहने लगे कि अब मैं क्या करूं. मास में दो व्रत तो मैं नहीं कर सकता, हां साल में एक व्रत करने का प्रयत्न अवश्य कर सकता हूं. अतः वर्ष में 1 दिन व्रत करने से यदि मेरी मुक्ति हो जाए तो ऐसा कोई व्रत हमें बताइए.
तब व्यास जी कहने लगे- वृषभ और मिथुन की संक्रांति के बीच जेष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की जो एकादशी आती है उसका नाम निर्जला है. तुम उस एकादशी का व्रत करो इस एकादशी के व्रत में स्नान और आचमन के सिवा जल वर्जित है. आचमन में छह मासे से अधिक जल नहीं होना चाहिए, अन्यथा वह मद्यपान के सदृश हो जाता है. इस दिन भोजन नहीं करना चाहिए. क्योंकि भोजन करने से व्रत नष्ट हो जाता है.
यदि एकादशी को सूर्योदय से लेकर द्वादशी की सूर्योदय तक जल ग्रहण ना करें तो उसे सारी एकादशी के व्रत का फल प्राप्त होता है. द्वादशी को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि करके ब्राह्मणों का दान आदि देना चाहिए. इसके पश्चात भूखे और सत पात्र ब्राह्मण को भोजन करा कर फिर खुद भोजन कर लेना चाहिए. इसका फल पूरे 1 वर्ष की संपूर्ण एकादशिओं के बराबर होता है.
कल 2 जून 2020 को है निर्जला एकादशी- जानें व्रत कथा, व्रत के फायदे और शुभ मुहूर्त
व्यास जी कहने लगे कि हे भीमसेन- यह मुझको स्वयं भगवान ने बताया है. इस एकादशी का पुण्य समस्त तीर्थों और दानों से अधिक है. केवल एक दिन मनुष्य निर्जल रहने से पापों से मुक्त हो जाता है.
जो मनुष्य निर्जला एकादशी का व्रत करते हैं. उनकी मृत्यु के समय यमदूत आकर नहीं घेरते हैं. बल्कि, भगवान के पार्षद उसे पुष्पक विमान में बैठाकर स्वर्ग को ले जाते हैं. अतः संसार में सबसे श्रेष्ठ निर्जला एकादशी का व्रत है. इसलिए यत्न के साथ इस व्रत को करना चाहिए. उस दिन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का उच्चारण करना चाहिए और गौदान करना चाहिए.
कल 2 जून 2020 को है निर्जला एकादशी- जानें व्रत कथा, व्रत के फायदे और शुभ मुहूर्त
इस प्रकार व्यास जी की आज्ञा अनुसार भीमसेन ने इस व्रत को किया. इसलिए इस एकादशी को भीमसेनी या पांडव एकादशी भी कहते हैं. निर्जला व्रत करने से पूर्व भगवान से प्रार्थना करें कि हे भगवान- आज मैं निर्जला व्रत करता हूं, दूसरे दिन भोजन करूंगा, मैं इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करूंगा, अतः आप की कृपा से मेरे सब पाप नष्ट हो जाए. इस दिन जल से भरा हुआ एक घड़ा वस्त्र से ढंक कर स्वर्ण सहित दान करना चाहिए.
जो मनुष्य इस व्रत को करते हैं. उनको करोड़ पल सोने के दान का फल मिलता है और जो इस दिन यज्ञ आदि करते हैं उनका फल तो वर्णन ही नहीं किया जा सकता. इस एकादशी के व्रत से मनुष्य विष्णु लोक को प्राप्त होता है जो मनुष्य इस दिन अन्न खाते हैं वे चांडाल के समान हैं. वह अंत में नर्क में जाते हैं. जिसमें निर्जला एकादशी का व्रत किया है. वह चाहे ब्राम्हण हत्यारा हो, मद्यपान करता हो, चोरी की हो या गुरु के साथ धोखा किया हो, मगर इस व्रत के प्रभाव से स्वर्ग की प्राप्ति होती है.
हे कुंती पुत्र- जो पुरुष या स्त्री श्रद्धापूर्वक इस व्रत को करते हैं उन्हें अग्र लिखित कर्म करने चाहिए-
प्रथम भगवान का पूजन, फिर गोदान, ब्राह्मणों को मिष्ठान भोजन व दक्षिणा देनी चाहिए तथा जल से भरे कलश का दान अवश्य करना चाहिए. निर्जला के दिन अन्न, वस्त्र, उपाहन ( जूते ) आदि का दान भी करना चाहिए. जो मनुष्य भक्ति पूर्वक इस कथा को पढ़ते या सुनते हैं. उन्हें निश्चित ही स्वर्ग की प्राप्ति होती है. वर्ष भर की एकादशिओं का पूर्ण लाभ देने वाली इस श्रेष्ठ निर्जला एकादशी को पांडव एकादशी या भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है.
कल 2 जून 2020 को है निर्जला एकादशी- जानें व्रत कथा, व्रत के फायदे और शुभ मुहूर्त
पूजन, पारण और शुभ मुहूर्त-
एकादशी तिथि प्रारंभ- 1 जून 2020 2:57 पर.
एकादशी तिथि समाप्त- 2 जून 2020 12:04 पर.
पारण मुहूर्त- 3 जून 2020 सुबह 5:30 से 8:08 तक.
यह जानकारी अच्छी लगे तो लाइक, शेयर करें और कमेंट में जय मां लक्ष्मी या ॐ नमो भगवते वासुदेवाय लिखकर भगवान की कृपा प्राप्त करें. धन्यवाद.

Post a Comment

0 Comments