कुंवारी ही मां बन गई थी महाभारत की ये दो रानियां, लेकिन वर्जिनिटी नहीं हुई थी भंग, जानें पूरी कहानी

कुंवारी ही मां बन गई थी महाभारत की ये दो रानियां, लेकिन वर्जिनिटी नहीं हुई थी भंग, जानें पूरी कहानी
महाभारत में दो ऐसे प्रमुख महिला पात्र हैं जो अपनी शादी से पहले ही मां बन गई थी. लेकिन ऐसा करने के बाद भी उनकी वर्जिनिटी भंग नहीं हुई थी. इसमें पहले स्थान पर हैं भीष्म पितामह की सौतेली मां यानी शांतनु की दूसरी पत्नी सत्यवती और दूसरी हैं कुंती. कुंती के बारे में तो ज्यादातर लोग जानते हैं कि उसे वशीकरण मंत्र आता था जिससे कि वह जब चाहे देवता का आह्वान कर उनसे पुत्र मांग सकती है.
अपनी शक्ति के आजमाने के लिए कुंती ने सूरज का आह्वान किया और सूरज देव आ गए और कुंती को उन्होंने कर्ण के रूप में एक पुत्र तो दे दिया, पर कुंती बिना ब्याही थी और इस कारण उन्होंने उसे नदी में बहा दिया जो आगे जेक सूत पुत्र बना.
कुंती की सासु की सासू मां यानी सत्यवती एक ऋषि जिनका नाम पराशर ऋषि था के साथ संभोग के बाद व्यास ऋषि को जन्म दिया था. पराशर ऋषि ने उन्हें यह बात बताई थी कि ऐसा करने पर भी उसका कौमार्य बना रहेगा और उसके शरीर की दुर्गंध भी चली जाएगी.
कुंवारी ही मां बन गई थी महाभारत की ये दो रानियां, लेकिन वर्जिनिटी नहीं हुई थी भंग, जानें पूरी कहानी
अब दुर्गंध के बारे में जानने के लिए पूरी कहानी जाने-
चेद्दी नगर के राजा वसु और उनकी पत्नी वनविहार कर रहे थे. तभी रानी को अचानक गर्भधारण की इच्छा हुई तो उन्होंने अपनी पति से अनुरोध किया. लेकिन श्राद्ध पक्ष होने के कारण राजा वसु ने संभोग को नकार दिया पर उन्होंने रानी की बात रखने के लिए अपने वीर्य को एक पत्ते में डालकर एक पक्षी के द्वारा रानी के पास भेजा.
रास्ते में एक और पक्षी उस पक्षी से लड़ने लगा और वीर्य नदी में गिर गया. उस नदी में एक मछली ने उसे निगल लिया और गर्भ धारण कर लिया. यह मछली एक अन्दिरा नाम की अप्सरा थी. एक दिन सूर्योदय से पहले एक ऋषि नदी में ध्यान मग्न थे तो अन्दिरा ने पानी में घुसकर उनके पैर छू लिए. जिस पर ऋषि ने उसे इस नदी में मछली बनकर रहने का श्राप दे दिया था. याचना पर उसे यही काम करके मुक्ति मिलने का मार्ग भी ऋषि ने बताया था.
10 महीने बाद मछली ऋषभराज के जाल में फंसी और जब उसको चीरा गया तो उसमें से एक सुंदर लड़का और एक लड़की मिली. ऋषभराज उन्हें राजा के पास ले गए और राजा ने लड़के को अपना निया और लड़की को जिसमें से मछली की दुर्गंध आ रही थी मछुआरे को ही दे दिया. वह लड़की जब जवान हुई तो बड़ी सुंदर हुई वह नदी के एक किनारे से दूसरे किनारे नाव चलाने का काम करती थी.
कुंवारी ही मां बन गई थी महाभारत की ये दो रानियां, लेकिन वर्जिनिटी नहीं हुई थी भंग, जानें पूरी कहानी
एक दिन ऋषि पराशर उसी नाव में बैठे और उस पर मोहित हो गए. उन्होंने मत्स्यगंधा से मिलने का आग्रह किया साथ ही यह भी आश्वासन दिया कि इससे उसके शरीर की दुर्गंध चली जाएगी और उसका शरीर खुशबू में बदल जाएगा. इतना ही नहीं तुम्हें गर्भ भी होगा और संतान होने के बाद भी तुम्हारा कौमार्य बना रहेगा. वही मत्स्यगंधा सत्यवती बनी जिस पर शांतनु ( कुरुवंशी राजा भीष्म के पिता ) का दिल आया और उनसे विवाह कर वो कुरु वंश की राजरानी बनी.

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