डिप्रेशन के शिकार होने के कारण, लक्षण और बचाव के उपाय

कल्याण आयुर्वेद- प्रत्येक व्यक्ति समय-समय पर सीमित अवधि के लिए उदासी का अनुभव करता है. लेकिन जब लंबे समय तक लगातार नकारात्मक सोच ही मनोदशा या पसंदीदा गतिविधियों में भी दिलचस्पी न लेने जैसे लक्षण सामने आने लगे तो यह डिप्रेशन हो सकता है.
डिप्रेशन के शिकार होने के कारण, लक्षण और बचाव के उपाय
डिप्रेशन के कारण-
अनुवांशिक-
परिवार में माता-पिता या अन्य कोई सदस्य डिप्रेशन से पीड़ित होता है तो बच्चों में डिप्रेशन होने का खतरा अधिक हो जाता है.
कमजोर व्यक्ति-
बचपन में मां- बाप के प्यार का अभाव, कठोर अनुशासन, तिरस्कार, सामर्थ्य से अधिक अपेक्षा या ऐसा कई बार मस्तिष्क को ठेस पहुंचाती है जो बड़े होने पर विपरीत परिस्थितियों में व्यक्ति के लिए डिप्रेशन का कारण बन सकती है.
मानसिक आघात-
बार-बार असफलता, नुकसान या किसी प्रियजन की मृत्यु आदि से भी डिप्रेशन हो सकता है.
शारीरिक रोग-
एड्स, कैंसर, निशक्तता या कोई अन्य बीमारी जिसमें रोगी लंबे समय तक बिस्तर पर पड़ा रहता है. वह इस परेशानी से ग्रसित हो सकता है.
अन्य कारण-
पारिवारिक झगड़े, अशांति, संबंध विच्छेद व आर्थिक परेशानी आदि कारणों से भी डिप्रेशन की समस्या हो सकती है.
डिप्रेशन के शिकार होने के कारण, लक्षण और बचाव के उपाय
डिप्रेशन के लक्षण-
मानसिक-
2 सप्ताह से ज्यादा लगातार उदासी, असंगत महसूस करना, मिजाज में उतार-चढ़ाव होना, भूलना, एकाग्रता ना हो पाना, गतिविधियों में रुचि ना लेना, चिंता, घबराहट, अकेलापन, शारीरिक देखभाल में अरुचि, नशे की इच्छा होना.
विचार व अनुभूति-
असफलता संबंधी विचार स्वयं को कोसना, शीघ्र निराश होना, असहयोग, निकम्मेपन के विचार, दुर्भाग्यपूर्ण कार्य के लिए स्वयं को जिम्मेदार ठहराना, भविष्य के लिए नकारात्मक व निराशावादी दृष्टिकोण आत्महत्या के विचार आदि.
शारीरिक-
सामान्य नींद की प्रक्रिया में बाधा होना, नींद ना आना, सुबह जल्दी उठ जाना, किसी काम को धीरे- धीरे करना, भूख में कमी होना, लगातार वजन कम होना, थकान महसूस होना, कब्ज, मुंह सूखना, अतिसार, मासिक धर्म की अनियमितता, सिर, पेट, सीने, पैरों व जोड़ों में दर्द, भारीपन, पैरों में पसीना आना, सांस लेने में परेशानी होना आदि.
कई तरह की डिप्रेशन-
इसके दो मुख्य प्रकार हैं पहला एंडोजीनस- जो आंतरिक कारणों से होता है. दूसरा न्यूरोटिक- आमतौर पर यह बाहरी कारणों से होता है. इसके अलावा डिसथीमिया, मौसम प्रभावित डिप्रेशन, मनोविकृति, छिपा ( मस्कड ) प्रसन्न मुख ( स्माइलिंग ) डिप्रेशन इसके अन्य प्रकार हैं.
डिप्रेशन के शिकार होने के कारण, लक्षण और बचाव के उपाय
डिप्रेशन से बचाव के उपाय-
परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं-
अत्यधिक तनाव के समय किसी से मिलने- जुलने या बातें करने का तो बिल्कुल भी मन नहीं करता है. लेकिन यकीन मानिए यह तरीका आपको डिप्रेशन में जाने से बचा सकता है. जब भी आपको लगे कि आप मानसिक तनाव या डिप्रेशन के शिकार हैं तो आप अपने परिवार के लोगों, खास दोस्तों के साथ समय बिताएं और बातें करें.
सामाजिक सक्रियता-
सामाजिक रूप से सक्रिय रहना आपको व्यस्त यह बनाए रखेगा और तनाव की ओर से आपका ध्यान भी बटेगा. इससे आप नकारात्मकता के शिकार न होकर अपनी उर्जा का सही उपयोग कर पाएंगे. कुछ समय में आप सकारात्मकता का अनुभव करेंगे.
नकारात्मकता से रहे दूर-
खुद को सकारात्मक बनाए और प्रोत्साहित करें. अपनी खूबियों और अब तक की उपलब्धियों की लिस्ट बनाएं या कुछ अच्छा और उपयोग कार्य करने के लिए योजना बनाएं, खुद से प्रेम करें और हर चीज को सकारात्मक नजरिए से देखें.
नींद भरपूर ले-
तनाव होने पर अपनी नींद का पूरा ध्यान रखें. कम से कम 8 घंटे की नींद जरूरी है. नींद पूरी होगी तो दिमाग को राहत मिलेगा और बगैर तनाव के बेहतर तरीके से कार्य करेगा, छोटे-मोटे तनाव के लिए नींद एक बेहतरीन इलाज है.
करें धूप का सेवन-
सुबह के समय आपकी जब भी आप सहज हों हल्की धूप जरूर लें. इससे आपका मन और मस्तिष्क को राहत मिलेगा और तनाव भी दूर होगा. प्राकृतिक स्थानों पर जाएं या फिर घर के आंगन, बरामदे आप बालकनी में शांत बैठे.
कराएं इलाज-
यदि आपको लगता है कि आप डिप्रेशन के शिकार हैं तो डॉक्टर की सलाह लें. डॉक्टर मरीज की काउंसिलिंग करके रोग की वजह समझने का प्रयास करते हैं. इसके बाद जरूरत के अनुसार 6 से 8 माह तक एंटीडिप्रेसेंट दवाएं देते हैं. दवाओं के साथ-साथ मनोचिकित्सा व व्यवहारिक चिकित्सा द्वारा रोगी की निराशाजनक सोच को बदलने का प्रयास किया जाता है. इस दौरान मरीज को पारिवारिक सहयोग जरूरी होता है.
करें ये काम-
प्रतिदिन एक्सरसाइज करें, शराब और सिगरेट से दूरी बनाए. सकारात्मक सोच को अपनाएं, प्रतिदिन भरपूर में परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताकर आप डिप्रेशन की समस्या से लड़ सकते हैं.
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