बार- बार पेशाब आना हो सकता है इन गंभीर बीमारियों का संकेत, महिला हों या पुरुष न करें नजरअंदाज

कल्याण आयुर्वेद- बार-बार पेशाब आना एक ऐसी समस्या है जो अक्सर लोग इसे नजरअंदाज कर देते हैं. ज्यादातर लोग सोचते हैं कि यह बहुत ही मामूली समस्या है. खासकर बुजुर्ग लोग यह सोचते हैं कि बार-बार पेशाब आना बढ़ती उम्र का एक स्वाभाविक कारण है. लेकिन यह सही नहीं है.
बार- बार पेशाब आना हो सकता है इन गंभीर बीमारियों का संकेत, महिला हों या पुरुष न करें नजरअंदाज
बार-बार पेशाब अधिक मात्रा में पानी पीने या तरल पदार्थों के सेवन से आ सकती है. लेकिन जब इन सभी कारणों की गैरमौजूदगी में भी बार-बार पेशाब होता है तब यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत हो सकती है.
आमतौर पर इंसान दिन में लगभग 4 से 7 बार पेशाब करता है और कुल मिलाकर केवल 2 से 3 लीटर पेशाब शरीर से बाहर निकलता है. लेकिन अगर कोई दिन में 6 से अधिक बार पेशाब करने लगे और हर बार सामान्य से ज्यादा पेशाब आए तो उस स्थिति में हम कह सकते हैं कि वह बार-बार पेशाब आने की परेशानी से जूझ रहा है. इस स्थिति में अक्सर रात के समय बार-बार पेशाब आता है.
बार-बार पेशाब आना एक ऐसी समस्या है जिस पर वैसे तो हम गौर नहीं करते हैं. लेकिन यह हमारे रोजमर्रा के जीवन को अस्त-व्यस्त करने की क्षमता रखता है. बार-बार पेशाब आने के कारण न तो आप सुकून से कहीं जा सकते हैं और न ही रात को चैन की नींद ले सकते हैं. इसलिए जरूरी है कि ऐसे समय में आप शर्मिंदगी से डरने की बजाय किसी अच्छे डॉक्टर की मदद लें.
बार-बार पेशाब आने की क्या है कारण?
बार- बार पेशाब आना किसी भी वजह से उत्पन्न हो सकता है. यह या तो ज्यादा चाय, कॉफी या शराब का सेवन जैसी मामूली वजह या फिर किसी गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्या के कारण हो सकती है.
चलिए जानते हैं उन समस्याओं के बारे में-
1 .प्रोस्टेट का बढ़ना-
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पुरुषों में बार- बार पेशाब आना प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने का संकेत हो सकता है. बीपीएच 50 से ज्यादा के उम्र के पुरुषों में होने वाली एक आम समस्या है.
पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि एक ऐसी ग्रंथि है जो ब्लैडर के निचले हिस्से में मूत्र मार्ग के आसपास स्थित होता है. यह ग्रंथि जीवन भर बढ़ती रहती है. लेकिन जब वह जरुरत से ज्यादा बड़ी होने लगती है तब वह मूत्र मार्ग पर दबाव डालती है और पेशाब की धारा को रोक देती है.
बार-बार पेशाब आने के अलावा इसके और कई लक्षण हैं जैसे कि अचानक से पेशाब की तीव्र इच्छा होना, रात को दो से अधिक बार पेशाब करना, पेशाब की धारा का पतला हो जाना, पेशाब करते समय अचानक से रुक जाना, पेशाब निकालने के लिए जोर लगाना.
अगर इस बीमारी को जल्दी पकड़ लिया जाए तो इसको दवाइयों के द्वारा ठीक किया जा सकता है. लेकिन समय के साथ-साथ जब प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ता चला जाता है तब उसको सर्जरी से छोटा करना पड़ सकता है.
2 .किडनी में स्टोन होना-
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बार-बार पेशाब आने का एक आम कारण किडनी स्टोन होना भी हो सकता है.
शरीर में किडनी स्टोन बनने का मुख्य कारण कम मात्रा में पानी पीना होता है. कम पानी पीने के कारण पेशाब गाढ़ा हो जाता है. जिससे यूरिक एसिड और कैल्शियम ऑक्सलेट क्रिस्टल बनने लगते हैं. यह क्रिस्टल आपस में चिपक जाते हैं और स्टोन ( पथरी ) बनाते हैं.
अगर समय पर किडनी स्टोन का इलाज न कराया जाए तो यह स्टोंस बड़े होने लगते हैं. ज्यादा देर तक शरीर में रहने पर यह मूत्र वाहिनी या यूरेटर में जाकर फंस जाते हैं. यह एक आपातकालीन समस्या होती है क्योंकि फिर यह स्टोंस पेशाब की धारा को रोक देती है. जिससे पेशाब बाहर नहीं निकल पाती है. जहां तक किडनी स्टोन के इलाज का सवाल है वह उसके माप पर निर्भर करता है. अगर पथरी छोटे माप की है तो ज्यादा पानी पीकर भी उस स्टोन को आराम से पेशाब के द्वारा शरीर से बाहर निकाला जा सकता है. लेकिन वह बड़े माप है तो सर्जरी की ही जरूरत हो सकती है.
3 .मूत्र मार्ग में संक्रमण-
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मूत्र मार्ग में संक्रमण महिलाओं में अधिक देखा जाता है. लेकिन यह संक्रमण पुरुषों में भी हो सकता है. इस संक्रमण का एक आम लक्षण है बार बार पेशाब आना और पेशाब में जलन का होना.
कैसे होता है मूत्र मार्ग में संक्रमण?
जब मूत्रमार्ग के किसी हिस्से में बैक्टीरिया जमा हो जाता है तब उस हिस्से में सूजन और जलन होने लगती है. इससे संक्रमण उत्पन्न होने लगता है. जब यह बैक्टीरिया मूत्र नली में सूजन पैदा करते हैं. तब उसको यूरेथ्राइटिस कहते हैं और जब यह ब्लैडर तक पहुंच जाते हैं तो उस बीमारी को सिस्टाइटिस कहते हैं. यह संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया प्रोस्टेट तक पहुंच सकते हैं जिसके बाद वहां पर सूजन उत्पन्न करते हैं इसको प्रोस्टाइटिस कहते हैं.
लेकिन इस बीमारी से घबराने की कोई बात नहीं है यूटीआई एंटीबायोटिक दवाओं के सेवन से ठीक हो जाती है. बस आगे चलकर मूत्र मार्ग में संक्रमण को रोकने के लिए जरूरी है कि आप एक स्वस्थ हाइजीन का पालन करें.
4 .डायबिटीज ( मधुमेह )
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बार- बार पेशाब आना और हर बार अधिक मात्रा में पेशाब आना डायबिटीज का मुख्य लक्षण है.
चलिए जानते हैं डायबिटीज के बारे में विस्तार से-
डायबिटीज एक जटिल बीमारी है जो कभी भी और किसी को भी हो सकती है. डायबिटीज में पैंक्रियाज जो हमारे शरीर का अंग है उचित मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता है जिसके वजह से रक्त में शुगर यानी ग्लूकोज की मात्रा अधिक हो जाती है. यह शरीर को गंभीर रूप से हानि पहुंचाता है.
डायबिटीज से पीड़ित लोगों को रात में 3-4 बार पेशाब आने लगता है और जहां तक बात बच्चों की है तो पेशाब होने के लक्षण न होने की वजह से भी अक्सर बिस्तर गीला कर देते हैं.
इंसुलिन नामक हार्मोन का हमारे शरीर में क्या कार्य है?
जब हम खाना खाते हैं तब हमारा शरीर इस खाने को ग्लूकोस यानी शुगर में तोड़ता है. जिसको फिर शरीर की कोशिकाएं सोख लेती है इससे उन्हें ऊर्जा प्राप्त होती है. इस क्रिया को सही चालन के लिए जरूरी होता है कि पैंक्रियास समय-समय पर इंसुलिन हार्मोन बनाए जो ग्लूकोज को कोशिकाओं के अंदर पहुंचने में मदद करता है. ताकि वह ऊर्जा बना सकें. जब पैंक्रियास उचित मात्रा में इंसुलिन नहीं बना पाता है तब खून में ग्लूकोज की मात्रा असामान्य रूप से बढ़ जाता है.
अब आपको बताते हैं कि डायबिटीज के कारण कैसे बार-बार पेशाब आ सकता है?
इसके लिए हमें यह समझना जरूरी है कि हमारी किडनीज कैसे काम करती है.
हमारी किडनी पेशाब बनाते समय रक्त में मौजूद अतिरिक्त शुगर वापस से सोखकर रक्त प्रवाह में डाल देते हैं क्योंकि डायबिटीज में रक्त में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है. इससे किडनी पर भारी दबाव पड़ता है और यह पूरी तरह से अतिरिक्त शुगर को सोख नहीं पाते हैं. इसके कारण अतिरिक्त शुगर पेशाब द्वारा निकल आता है. लेकिन इस दौरान या शरीर से काफी सारा पानी भी सोख लेता है जिससे अधिक मात्रा में पेशाब निकलने लगता है. इस स्थिति में आपको प्यास भी अधिक लगने लगती है जिससे पानी का सेवन बढ़ जाता है. यह भी बार-बार पेशाब आने को मजबूर कर देता है.
इसलिए आवश्यक है कि डायबिटीज से जूझ रहा हर इंसान नियमित रूप से अपने ब्लड शुगर की मात्रा को कंट्रोल में रखें. क्योंकि लंबे समय तक अगर इसको नियंत्रित नहीं किया जाए तो यह किडनी फेलियर का कारण बन सकती है.
5 .गर्भावस्था-
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गर्भधारण करने के पश्चात एक महिला के शरीर में कई अनोखे बदलाव होते हैं और इन बदलावों के कारण उन्हें बार- बार पेशाब आना जैसे समस्याओं का सामना करना पड़ता है. महिलाओं को बार- बार पेशाब आना गर्भावस्था के समय एक आम समस्या हो जाती है.
लेकिन क्या है इसका कारण?
गर्भावस्था में बार- बार पेशाब आना कई कारणों से हो सकता है. सबसे पहले तो यह है कि इस समय शरीर में प्रेगनेंसी हार्मोन्स जैसे कि एचसीजी और प्रोजेस्टेरोन बनने लगते हैं. यह हार्मोन्स ज्यादा पेशाब बनने के कारण होते हैं.
दूसरा कारण यह है कि जैसे- जैसे बच्चे के लिए जगह बनाने के लिए गर्भ फैलने लगता है वैसे- वैसे ब्लैडर को नीचे धकेलने लगता है और उस पर दबाव पड़ने लगता है. ऐसे में ब्लैडर छोटा हो जाता है और ज्यादा पेशाब जमा नहीं कर पाता है. जिसकी वजह से महिलाओं को जल्दी- जल्दी पेशाब करने की जरूरत पड़ती है.
एक कारण यह भी हो सकता है कि गर्भधारण करने के बाद शरीर में रक्त की मात्रा लगभग 50% से बढ़ जाती है. ज्यादा रक्त होने की वजह से किडनी अतिरिक्त फ्लूड संसाधित करने लगते हैं. जिससे ज्यादा पेशाब बनता है और बार बार पेशाब जाना पड़ता है.
इसके अलावे गर्भावस्था के दौरान यूरिन संक्रमण की संभावना अधिक हो जाती है. ऐसे में कई बार डॉक्टर यूरिन संक्रमण की जांच कराते हैं ताकि पता चल सके कि बार- बार यूरिन आना कहीं उसका लक्षण तो नहीं है.
क्या गर्भावस्था में इस परेशानी को कम की जा सकती है?
जी हां बिल्कल, सिर्फ आपको कुछ उपाय अपनाने पड़ते हैं जैसे कि चाय, कॉफी, शराब जैसे तरल पदार्थों का कम सेवन करना, पेशाब आने पर इसे नहीं रोकना, बल्कि तुरंत कर देना और हर बार ब्लैडर को पूरी तरह से आगे झुककर खाली कर देना, ताकि जल्दी पेशाब करने की जरूरत न पड़े.
6 .अति सक्रियता ब्लैडर-
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एक ब्लैडर को अति सक्रिय ब्लैडर तब कहा जाता है जब आप इनमें से किसी भी लक्षण को देखते हैं.
बार-बार पेशाब आना, अचानक से पेशाब करने की तीव्र इच्छा होना, पेशाब आने पर उसको रोक नहीं पाना और उसका बाहर निकल आना.
अतिरिक्त ब्लैडर एक ऐसी बीमारी है जो सही इलाज न कराने पर एक इंसान के जीवन को अस्त-व्यस्त कर सकती है. यह उसके यौन संबंध और रात की नींद पर बुरा प्रभाव डाल सकती है और यह सोचना बिल्कुल सही नहीं है कि ब्लैडर का अति सक्रिय होना बुढ़ापे का एक आम समस्या है. यह एक बीमारी है जिसकी जांच और इलाज कराना जरूरी हो जाता है.
जब ब्लैडर की मांसपेशियां उसके पूरी तरह न बढ़ने के बावजूद अपने आप अचानक से ही सिकुड़ने लगती है तब इंसान को अचानक से पेशाब करने की इच्छा होने लगती है और उसे बार- बार पेशाब करना पड़ता है.
यह कई कारणों से हो सकता है जैसे कि श्रोणि की मांसपशियों का कमजोर हो जाना, जिसके कारण ब्लैडर अपनी जगह से नीचे उतरने लगता है.
लेकिन इस समस्या को जीवन शैली में कुछ आसान से बदलाव करके मैनेज किया जा सकता है जैसे कि-
* उन खाद पदार्थ और पीने की चीजें से दूर रहना, जिससे पेशाब अधिक बनता हो जैसे कि चाय, कॉफी और शराब.
* ताजी फल- सब्जियां और स्वस्थ अनाज का सेवन करना.
* श्रोणि मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए विशेष प्रकार के एक्सरसाइज करना जैसे कि केगेल एक्सरसाइज.
* इसके अलावा दवाइयों द्वारा भी ब्लैडर की अति सक्रियता को कम करने में मदद मिलती है. जिससे बार-बार पेशाब आना अचानक से पेशाब की इच्छा होना और पेशाब को रोक पाने में सक्षम न होना जैसे समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है.
बार-बार पेशाब आने के साथ ही निम्नलिखित लक्षण सामने आ रहे हैं तो आपको तुरंत ही डॉक्टर की सहायता लेनी चाहिए.
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* पेशाब में खून का आना.
* पेशाब करते समय जलन या दर्द महसूस होना.
* पीठ के निचले हिस्से और बगल में दर्द होना.
* पूरी तरह से ब्लैडर खाली करने में सक्षम नहीं होना.
* अचानक से पेशाब करने की तीव्र इच्छा होना.
* पेशाब को बिल्कुल भी न रोक पाना, पेशाब की इच्छा होते हैं पेशाब आ जाना.
नोट- इस बात को हमेशा याद रखें कि यदि बार-बार पेशाब आने की समस्या है तो इसे नजरअंदाज न करें और डॉक्टर से बताने में ना शर्मायें. इसको छुपाए नहीं. क्योंकि सही समय पर डॉक्टर से मदद लेने पर आप बार-बार पेशाब आने की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं और अपने सामान्य जीवन में आराम से वापस जा सकते हैं.
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