ऐसे कर्म करने वाले दोबारा अपने ही घर में लेते हैं जन्म, आप भी जानें पूरा रहस्य

दोस्तों, कई लोगों का मानना है कि हमारा पूर्ण जन्म होता है. दोस्तों शास्त्रों के हिसाब से आपके कौन से कर्म आपको दोबारा अपने ही घर में जन्म लेने का आशीर्वाद प्रदान करते हैं. आज हम इस रहस्य के बारे में जाने वाले हैं.
ऐसे कर्म करने वाले दोबारा अपने ही घर में लेते हैं जन्म, आप भी जानें पूरा रहस्य 
आइए जानते हैं विस्तार से -

दोस्तों, यदि जातक की जन्मपत्रिका में बृहस्पति लग्न में स्थित हो, तो इसका मतलब यह है कि उस व्यक्ति का जन्म किसी के श्राप या फिर आशीर्वाद के कारण हुआ है और उसके उन्हें आशीर्वाद या श्राप के अनुसार उसे सुख या दुख दुख मिलता है. ऐसा शास्त्रों के हिसाब से माना जाता है.
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यदि कुंडली में बृहस्पति ग्रह द्वितीय या अष्टम भाग में स्थित हो तो जातक पिछले जन्म में संत महात्मा रहा होता है. इतना ही नहीं अगले जन्म में भी उसका पिछले जन्म का प्रभाव पड़ता है. ऐसे लोग काफी धार्मिक होते हैं.
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यदि गुरु तृतीय भाव में उपस्थित हो तो इसका मतलब है, कि जातक का जन्म किसी महिला के श्राप या आशीर्वाद के वजह से हुआ है. आपको बता दें कि वह महिला उस जातक के परिवार से ही होती है.
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