महिलाओं के लिए खास- गर्भावस्था में उल्टी और मॉर्निंग सिकनेस से जुड़ी सवालों के जवाब

कल्याण आयुर्वेद- गर्भावस्था हर महिला के लिए सबसे खुशी का पल होता है. लेकिन इस दौरान महिलाओं को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है. गर्भावस्था में मॉर्निंग सिकनेस और उल्टी होना आम समस्या होता है जो ज्यादातर महिलाओं को होती है.
 महिलाओं के लिए खास- गर्भावस्था में उल्टी और मॉर्निंग सिकनेस से जुड़ी सवालों के जवाब
क्या है सुबह की मिचली?
सुबह की मिचली यानी मॉर्निंग सिकनेस का मतलब उबकाई आने से है, जिसमें कभी-कभी उल्टी भी हो जाती है. गर्भावस्था के दौरान बहुत से महिलाओं को सुबह की मिचली महसूस होता है. आमतौर पर पहली तिमाही में
गर्भावस्था में मिचली होना काफी आम समस्या है और यदि यही स्थिति गंभीर न हो तो इससे आपको और आपके गर्भस्थ शिशु को कोई खतरा नहीं होता है. कुछ महिलाओं को केवल मिचली ही होती है वही कुछ महिलाओं को मिचली और उल्टी दोनों ही होती है.
यह मिचली आमतौर पर गर्भावस्था के 5वें या 36वें सप्ताह में शुरू होती है और इसके बाद वाले महीने तक स्थिति और अधिक हो सकती है. यह माहवारी रुकने के बाद गर्भावस्था की पुष्टि करने वाली शुरुआती संकेतों में से एक है. पहली तिमाही अंत तक अधिकांश महिलाओं में मिचली का एहसास होना खत्म हो जाता है. कुछ भाग्यशाली महिलाओं को गर्भावस्था में मिचली या उल्टी का एहसास बिल्कुल भी नहीं होता है. वही कुछ को पूरी गर्भावस्था इस समस्या से जूझना पड़ता है.
हल्की- फुल्की मिचली रहने पर भी आपको कमजोरी महसूस हो सकती है और यदि यह मिचली और उल्टी लगातार बनी रहे तो हो सकता है आप एकदम थकी मंदी और दयनीय सी महसूस करें. आपको काम करने, बच्चों का ख्याल रखने या रोजमर्रा के कामकाज करने में भी समस्याएं हो सकती है.
मिचली से आपके अपने पति, परिवार और दोस्तों के साथ रिश्तो पर भी असर पड़ सकता है और यहां तक कि आपको अवसाद यानी डिप्रेशन की समस्या भी हो सकती है.
स्थिति बिगड़ने से पहले ही आप दूसरों की मदद में ऐसा ना सोचे कि आप इसे और सहन नहीं कर सकती हैं. हमेशा अपनी डॉक्टर को बताएं कि आप क्या महसूस कर रही हैं वह आपकी मदद करेंगे.
मिचली से पीड़ित अन्य महिलाओं से बातचीत करने से भी लाभ हो सकता है क्योंकि सुबह की मिचली इतनी ज्यादा आम है कि आपको हमारी कम्युनिटी में गर्भावस्था ग्रुप में या फिर अपने वक्त क्लब में अवश्य ही ऐसी कई महिलाएं मिलेगी जो सामान स्थिति से गुजर रही है.
जब मिचली दिन और रात बनी रहती है तो भी इसे मॉर्निंग सिकनेस क्यों कहा जाता है?
सुबह की निचली यानी मॉर्निंग सिकनेस एक मानक शब्द है कुछ गर्भवती महिलाओं में मिचली सुबह के समय ज्यादा होती है और दिन में थोड़ी राहत रहती है लेकिन वैसे यह भी हो सकती है और बहुत-सी महिलाओं में यह पूरा दिन बनी रहती है कुछ महिलाओं को मॉर्निंग सिकनेस रात को महसूस होती है.
मिचली का असर क्या गर्भस्थ शिशु पर भी पड़ेगा?
जब तक कि आप खा पी रहे हैं और भोजन पेट में अच्छी तरह से पच रहा है तो मिचली का असर आपके शिशु पर नहीं पड़ेगा. गंभीर मामलों में यदि उपचार किया जाए तो इससे गर्भस्थ शिशु प्रभावित नहीं होता है. गर्भावस्था में उबकाई या मिचली महसूस होना वास्तव में एक अच्छा संकेत है. यह बताता है कि अपरा प्लेसेंटा सही से विकसित हो गई है और आपके गर्भावस्था हार्मोन प्रेगनेंसी को बनाए रखने के लिए काम कर रहे हैं.
लेकिन इसका मतलब कतई नहीं है कि जिन महिलाओं को मिचली महसूस नहीं होती है उनकी गर्भावस्था में कुछ गड़बड़ है. आप उन भाग्यशाली महिलाओं में से एक हैं जिन्हें गर्भावस्था में मिचली की समस्या नहीं होती है.
यदि आपकी मिचली और उल्टी की स्थिति इतनी गंभीर है कि आप पानी समेत कुछ भी पेट में नहीं रख पा रही हैं तो आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, हो सकता है आपको हाईपरमेसिस ग्रेविडरम हो. इस स्थिति में उपचार और चिकित्सकीय देखभाल की आवश्यकता होती है क्योंकि आप बहुत जल्दी निर्जलित यानी डिहाइड्रेट हो सकती हैं.
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आपके पेशाब के रंग से पता चलता है कि आप पर्याप्त तरल पदार्थ का सेवन कर रही है या नहीं? आपका पेशाब साफ या हल्के पीले रंग का होना चाहिए. यदि यह गहरे पीले रंग का है तो यह संकेत है कि आपको और तरल पदार्थ सेवन करने की आवश्यकता है.
मिचली कितने समय तक रहती है?
सुबह की मिचली आम तौर पर पहली तिमाही के अंत में कम होने लगती है और 16 में से 20 सप्ताह की गर्भावस्था तक बहुत-सी महिलाओं में यह पूरी तरह खत्म हो जाती है. दुर्भाग्यवश कुछ महिलाओं में उबकाई की समस्या पूरी गर्भावस्था बनी रहती है.
यदि आपको 10 सप्ताह की गर्भावस्था के बाद पहली बार दर्द, बुखार, सिरदर्द, मिचली या उल्टी हो तो अपनी डॉक्टर को बताएं, हो सकता है यह लक्षण सामान्य मिचली की बजाय किसी और स्थिति के संकेत हो सकते हैं.
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गर्भावस्था में मिचली और उल्टी किस कारण से होती है?
गर्भावस्था के दौरान मिचली किस कारण से होती है यह कोई नहीं जानता. गर्भावस्था के दौरान शरीर में बहुत से बदलाव हो रहे होते हैं. इनमें से कुछ बदलाव एक साथ मिलकर मिचली के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं.
* इसे गर्भावस्था के हार्मोन ह्यूमेन कोरियोनिक गोनाड़ो ट्रॉफीन ( एचसीजी ) और एस्ट्रोजन से जोड़कर भी देखा जाता है.
* एचसीजी का उचित स्तर यह सुनिश्चित करता है कि जब तक अपरा गर्भावस्था को संभालने के लिए तैयार नहीं हो जाती है. तब तक आपकी प्रेगनेंसी जारी रहे और विकसित होती रहे 16 से 20 सप्ताह की गर्भावस्था के आसपास एसीजी का स्तर कम होने लगता है और आमतौर पर मिचली भी इसी समय खत्म हो जाती है.
* यह भी संभव है कि सुनने की बढ़ती हुई अनुभूति और मिचली गर्भावस्था में आपको सुरक्षा प्रदान करते हैं. इनकी वजह से आपके कुछ हानिकारक चीज खाने या विषैले पदार्थ के संपर्क में आने की संभावना कम रहती है.
* मिचली का एक अन्य कारण यह भी हो सकता है कि गर्भावस्था हार्मोन प्रोजेस्टेरोन आपके पाचन तंत्र की मांसपेशियों को शिथिल बना देता है. इस कारण से भोजन को पचने में ज्यादा समय लगता है. इस कारण आपको मिचली और उबकाई और अधिक महसूस हो सकती है.
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क्या कुछ गर्भवती महिलाएं दूसरों की तुलना में अधिक मिचली महसूस करती हैं?
आपको गर्भावस्था के दौरान जी मचलाने या उल्टी होने की संभावना निम्नलिखित स्थितियों में अधिक रहती है.
* आप की पहली गर्भावस्था के दौरान.
* यदि आपके गर्भ में बेटी पल रही है.
* आपके गर्भ में जुड़वा या तीन शिशु पल रहे हैं क्योंकि ऐसे में गर्भावस्था हार्मोन का स्तर भी अधिक होगा.
* आपकी बहन या मां को उनकी गर्भावस्था में अत्यधिक मिचली व उल्टी हो रही थी.
* आपको पिछली गर्भावस्था में एचसीजी की समस्या आ रही थी.
* एस्ट्रोजन आधारित हार्मोनल गर्भनिरोधक लेने पर आपको मिचली होने का इतिहास रहा है.
* आपको आम तौर पर सफर में मिचली होती है या फिर माइग्रेन की समस्या रहती है.
* गर्भवती होने के समय आपका वजन सामान्य से अधिक था.
मोलर गर्भावस्था की वजह से गंभीर मिचली और उल्टी हो सकता है मगर यह स्थिति दुर्लभ है.
यदि आपको मिचली रहती है तो थकान, भूख या तनाव इसके और बढ़ा सकता है.
क्या ऐसे कुछ नुस्खे हैं जिनसे मिचली और उल्टी को रोकने में मदद मिल सके?
निसंदेह आप ऐसे भोजनों और गंधों से पहले से बच रही होंगी, जिनसे आपको उल्टी या मिचली होती हो. आप निम्नलिखित तरीके भी आजमाकर देख सकती हैं, हो सकता है मिचली की रोकथाम या फिर उसे कम करने में कुछ मदद मिल सके.
* बिस्तर से आराम से और धीमे से उठे अपनी पीठ को सहारा देते हुए धीरे-धीरे बैठे और 1 मिनट इंतजार करने के बाद उठे. यदि आप बिस्तर से तेजी से उठती है या अचानक उठती है तो ऐसे में मिचली काफी अधिक बढ़ सकती है.
* बिस्तर से उठने से पहले कुछ खा लें, कुछ साधारण हल्के-फुल्के स्नेक्स जैसे सादे बिस्किट या रस्क अपने बिस्तर के पास मेज पर रखें क्योंकि भूख मिचली को और बढ़ा सकती है. इसलिए महिलाएं अक्सर सुबह के समय मिचली महसूस करती हैं. कुछ भी काम करने से पहले थोड़ा बहुत खा लेने से शायद मिचली की समस्या से राहत मिल सकती है.
* यदि खाना पकाने की गंध से आपका जी मिचलाता हो तो आप परिवार की सदस्यों या रसोइए से खाना बनाने में मदद ले सकती हैं. आप कुछ समय के लिए कहीं से घर का खाना डिलीवरी करवाने का भी विकल्प चुन सकती हैं.
* समय-समय पर थोड़ा-थोड़ा भोजन खाती रहे, खाली पेट रहने से मिचली बढ़ सकती है. वैसे पेट बहुत ज्यादा भर जाने पर भी मिचली की समस्या हो सकती है. इसके लिए एक भोजन से दूसरे भोजन के बीच छोटे आहार व सेहतमंद स्नेक्स लेती रहें.
* जल नियोजित रहे- अधिकांश एक भोजन से दूसरे भोजन के बीच की अवधि में तरल पदार्थ पिएं, लेकिन एक बार में इतना पानी भी ना पिए कि आपका पेट भर जाए, इससे आपको मिचली हो सकती है और खाने की भूख भी कम हो सकती है. दिनभर थोड़ा-थोड़ा तरल पदार्थ पीते रहना, जल नियोजित रहने का अच्छा तरीका है. इससे आपका पेट भी भरा- भरा नहीं रहता है.
* ठंडक में रहे- गर्मी या आर्द्रता के मौसम में आपकी स्थिति और ज्यादा बिगड़ सकती है. आरामदायक सूती कपड़े पहने और अधिक गर्मी व कड़ी धूप में बाहर न निकले.
* नींबू या पुदीना सुन्घिए- कटे हुए नींबू या पिपरमिंट आयल की महक मिचली को कम करने में आपकी सहायता कर सकता है.
* कच्ची अदरक से भी आपको लाभ हो सकता है. अदरक आपके पेट को राहत दे सकती है. लेकिन इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करें, अदरक के जूस की कुछ बूंदे अपनी चाय या दाल में डालकर इस्तेमाल कर सकती हैं.
* आराम के लिए समय निकालें. योग, प्राणायाम आजमाएं या फिर परिवार के किसी सदस्य से आरामदायक मालिश करवाएं.
* प्रतिदिन कुछ ऐसा करें जो आपको शांति दे और तनाव को कम करें. इससे आप शरीर में हो रहे बदलावों का सामना बेहतर तरीके से कर सकेंगे और मिचली कम करने में भी यह सहायक हो सकता है.
* एक्यूप्रेशर बैंड का इस्तेमाल करके देखें, इस बैंड को कलाई पर इस तरह पहनना होता है कि यह एक एक्यूप्रेशर बिंदु पर दबाव डाले. माना जाता है कि इससे मिचली से राहत मिलता है, हो सकता है यह बैंड दवा की दुकान पर आसानी से उपलब्ध ना हो आप इन्हें ऑनलाइन भी खरीद सकती हैं.
* कुछ खट्टा खाएं जैसे कि आचार, इमली या आंवला. कुछ माएं इसे मिचली का आसान उपाय मानती है. मगर जरूरी नहीं है कि इससे सभी को मिचली से राहत मिले.
* मिचली के रेडीमेड हर्बल उपचारों में कभी-कभार कुछ ऐसी सामग्रियां हो सकती है जो गर्भवती महिला के लिए नुकसानदायक हो सकती है. कोई भी हर्बल या डॉक्टरी पर्ची के बिना मिलने वाली दवाइयों के सेवन से पहले आप अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
मिचली होने पर क्या खाना चाहिए?
हो सके तो संतुलित आहार का सेवन करें, लेकिन यदि आपको बहुत ज्यादा मिचली महसूस हो रही है तो जो आप खा पी रहे हैं वह है इसका मतलब यह है कि शायद कुछ समय के लिए आप सीमित भोजन ही खा रही होंगी. हो सकता है 1 महीने तक आप केवल बिस्किट, ब्रेड या आलू ही खाएं. चिंता न करें मिचली ठीक होने पर आपके पास पर्याप्त समय होगा कि आप स्वस्थ आहार का सेवन कर सकते हैं.
इस बीच आप चाहे अच्छे से ना खा पा रही हो तो भी गर्भस्थ शिशु को आपके शरीर में जमा संग्रह से जरूरी पोषण प्राप्त होता रहेगा. जब आप फिर से उचित ढंग से खाने- पीने लगे तो हमारी तिमाही दर, तिमाही आहार योजना आपको गर्भावस्था के लिए जरूरी पोषण देने में मदद कर सकती है.
पहली तिमाही में एक जरूरी पोषक तत्व है फोलिक एसिड. डॉक्टर आपको फोलिक एसिड अनुपूरक लेने के लिए सलाह देंगी, जिसे आपको पहली तिमाही में हर सुबह खाली पेट सेवन करना होगा. इससे आपके शिशु की रीढ़ की हड्डी और तंत्रिका तंत्र के विकास में मदद मिलती है.
कुछ भोजन आपकी मिचली को कम करने में सहायता कर सकते हैं.
उच्च प्रोटीन वाले भोजन-
प्रोटीन की अधिकता वाले भोजन जैसे कि मेवे और बीज. कम वसा वाला मांस, अच्छे से पके अंडे, सोया, पनीर और दही आपके पेट को सही रखने में सहायता कर सकते हैं. इसलिए तीन चीजों को अपने आहार में शामिल करें.
जटिल कार्बोहाइड्रेट्स-
इसके कुछ उदाहरण शकरकंदी, मखाने, साबुत अनाज का आटा और सब्जियां.
विटामिन बी सिक्स युक्त भोजन-
मेवे, केले, हरी मिर्च, गाजर, फुल गोभी, आलू, कम वसा वाला मांस और मछली विटामिन बी6 के अच्छे स्रोत हैं और इन्हें मिचली से राहत पाने में कारगर माना जाता है.
 कम मसालेदार भोजन-
अधिक मसालेदार व्यंजनों की तुलना में हल्के स्वाद और कम मसाले वाले भोजन खाना आसान रहता है. इससे मिचली की समस्या से राहत मिलती है.
ठंडे भोजन-
खाना पकाने की गंध से आपको मिचली शुरू हो सकती है, इसलिए जब तक जी मिचलाना कम ना हो जाए, आप ठंडे भोजन खाने का प्रयास करें. जैसे कि घर पर बनी चार्ट, दही, चावल, आमरस, सेंडविच, सलाद या ठंडा सूप इत्यादि.
मिचली के दौरान किस तरह के आहार के सेवन नहीं करने चाहिए?
कुछ भोजन मिचली को शुरू कर सकते हैं. कोशिश करें कि आप इनका सेवन करने से बचें. ताकि अचानक से आपका जी न मिचलाने लगे.
तली हुई वसायुक्त अम्लीय और मसालेदार भोजन-
मसालेदार अम्लीय और तले हुए भोजन आपके पाचन तंत्र में जलन उत्पन्न कर सकते हैं, तेल और घी से चूर भोजन को पचाने में ज्यादा समय लगता है. इसलिए ऐसे भोजन से दूर रहें.
तेज गंध वाले भोजन-
कुछ खास पदार्थों की टेज गंध के कारण मिचली शुरू हो सकती है, इसलिए तेज गंध वाले भोजन जैसे की मछली, मूली, पत्ता गोभी, फूल गोभी आदि का सेवन करने से बचें. आप पाएंगे कि साबुत अनाज या छिलके वाली दाल की महक अन्य दालों की तुलना में कम होती है.
मीठे आहार-
मीठे खाद पदार्थ और स्नैक्स जैसे बिस्किट, आइसक्रीम और टाफ़ी आपके लक्षणों को और बिगाड़ सकते हैं.
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सफर के दौरान मिचली का सामना कैसे करें?
दफ्तर जाने के लिए या कुछ और काम के लिए सफर के दौरान मिचली से निपटने के लिए यहां कुछ सुझाव दिए जा रहे हैं.
* नींबू या पुदीना की महक वाला कारपेट इस्तेमाल करें, आप लेमनग्रास या पिपरमिंट आयल की कुछ बूंदे एक रुमाल पर डाल लें और जब भी जरूरत लगे इसे सूंघें. इससे मिचली की समस्या से राहत मिलेगी.
* प्लास्टिक की थैलियों और गीले वाइफस कार में हमेशा रखिए, अचानक से उल्टी आने पर ये आपके काम आएंगे.
* अगर आप खुद कार ड्राइव कर कहीं जा रही हो तो आप कार चलाने के लिए किसी दूसरे को कहें या कैब टैक्सी का सहारा लें.
* यदि आप सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करती हैं तो कोशिश करें कि आप भीड़भाड़ वाले समय पर सफर ना करें. भीड़ में आपको गंध और हड़बड़ी की वजह से मिचली ज्यादा हो सकती है.
* हमेशा अपने साथ कुछ सूखे स्नेक्स और पानी रखें ताकि ट्रैफिक में फंसने के दौरान कुछ न कुछ खा सकें और पानी पी सके. इससे मिचली की समस्या को कम की जा सकती है.
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