जानिए- सांस फूलने और अस्थमा की समस्या से निपटने के पारंपरिक घरेलू नुस्खे

कल्याण आयुर्वेद- दमा, अस्थमा अपने पैर काफी तेजी से पाँव पसार रहा है. अस्थमा की समस्या किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है, चाहे वह बुढ़ा हो, बच्चा हो या फिर जवान. आमतौर पर दमा का इलाज स्वास नलिका के सूजन की रोकथाम और मांस पेशियों को आराम देने पर ही केंद्रित रहता है.
जानिए- सांस फूलने और अस्थमा की समस्या से निपटने के पारंपरिक घरेलू नुस्खे
दम्मा होने के कई कारण हो सकते हैं. कई लोगों में यह धुल और पराग कण आदि की एलर्जी, मौसम में आए बदलाव, कई तरह के खाद्य पदार्थ, दवाइयों, इत्र, परफ्यूम जैसी खुशबू और कई अन्य वजहों से हो सकता है.
सांस फूलने और अस्थमा से निपटने के लिए आज हम पारंपरिक नुस्खों के बारे में बताने की कोशिश करेंगे.
अस्थमा और सांस से जुड़े विकारों के होने पर कई जानकार वैध पारंपरिक नुस्खों को सुझाते हैं तो वही बड़े बुजुर्ग भी इन नुस्खों के बारे में बताते हैं.
जानिए- सांस फूलने और अस्थमा की समस्या से निपटने के पारंपरिक घरेलू नुस्खे
जानकारों की माने तो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता जिनकी कम होती है उन्हें सांस से जुड़ी समस्याएं ज्यादा होता है.
ठंड के मौसम या फिर जो लोग प्रदूषित वातावरण में काम करते हैं उन्हें स्वास से जुड़ी समस्याएं ज्यादा होती है.
सांस फूलने और अस्थमा से निपटने की पारंपरिक नुस्खे-
1 .लहसुन-
हमारी रसोई में मौजूद लहसुन का इस्तेमाल भोजन के स्वाद को बढ़ाने के लिए मसाले के रूप में किया जाता है. लेकिन लहसुन कई औषधीय गुणों का खजाना है. लहसुन में एंटीबैक्टीरियल गुणों को आधुनिक विज्ञान भी मानता है. लहसुन का सेवन बैक्टीरिया जनित रोगों दस्त, घाव, सर्दी- खांसी और बुखार आदि में काफी लाभदायक होता है. लहसुन की दो कच्ची कलियां सुबह खाली पेट खाने के बाद आधा घंटे बाद मुलेठी नामक जड़ी- बूटी का आधा चम्मच सेवन 2 महीने तक लगातार करने से ठंड के दौरान आक्रामक होने वाली दमा जैसी घातक बीमारी से काफी राहत मिलती है. इसके नियमित सेवन से सदैव दम्मा की समस्या से छुट्टी भी मिल सकती है.
2 .अजवाइन और लौंग-
अस्थमा के मरीज यदि अजवाइन के बीज और लौंग की बराबर मात्रा का 5 ग्राम चूर्ण प्रतिदिन सेवन करते हैं तो इससे काफी लाभ होता है. यदि बीजों को भूनकर एक सूती कपड़े में लपेट लिया जाए और रात को तकिए के नजदीक रखकर सोया जाए तो दम्मा, सर्दी- खांसी के रोगियों को काफी राहत मिलती है और नींद भी अच्छी आती है.
3 .अडूसा के पतिया-
अडूसा की पत्तियों के रस को शहद में मिलाकर रोगी को दिया जाता है. जिससे अस्थमा में तुरंत आराम मिलता है. पातालकोट के आदिवासी टीवी के मरीजों को अडूसा की पत्तियों का काढ़ा बनाकर 100 मिलीलीटर प्रतिदिन पीने की सलाह देते हैं क्योंकि अडूसा शरीर में जाकर फेफड़ों में जमे कफ और गंदगी को बाहर निकालता है.
4 .बड़ी इलायची-
बड़ी इलायची खाने से खांसी, दमा, हिचकी आदि रोगों से छुटकारा मिलता है. बड़ी इलायची खजूर और अंगूर की बराबर मात्रा लेकर कुचलकर शहद के साथ चाटने से खांसी, दमा और शारीरिक कमजोरी दूर होती है.
5 .बहेड़ा-
पुरानी खांसी में 100 ग्राम बहेड़ा के फलों के छिलके ले और उन्हें धीमी आंच में तवे पर भून लीजिए और इसके बाद पीसकर चूर्ण बना लें. इस चूर्ण का एक चम्मच शहद के साथ दिन में तीन- चार बार सेवन करने से खांसी से राहत मिलती है.
6 .तुलसी-
गर्म पानी में तुलसी के 5-10 पत्ते मिलाएं और सेवन करें. यह सांस लेने की तकलीफ से राहत देता है, इसी प्रकार तुलसी का रस, अदरक का रस और शहद का रस बराबर मात्रा में मिलाकर प्रतिदिन एक चम्मच सेवन करना अस्थमा मरीजों के लिए काफी लाभदायक होता है.
जानिए- सांस फूलने और अस्थमा की समस्या से निपटने के पारंपरिक घरेलू नुस्खे
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