डायबिटीज के मरीजों पर तनाव का क्या असर होता है? जानें बचाव के तरीके

कल्याण आयुर्वेद- आज के बदलते लाइफ स्टाइल में डायबिटीज एक आम बीमारी बनती जा रही है. जिससे बहुत से लोग ग्रसित हैं. यह बीमारी महिला व पुरुषों में सामान्य रूप से होने वाली बीमारी है. आज हम डायबिटीज के मरीजों पर तनाव का क्या असर होता है, के बारे में बताने की कोशिश करेंगे.
डायबिटीज के मरीजों पर तनाव का क्या असर होता है? जानें बचाव के तरीके
चलिए जानते हैं विस्तार से-
ब्लड शुगर अपने आप में कोई समस्या नहीं है बल्कि देखा जाए तो हमारे शरीर के सभी अंगों को काम करते रहने के लिए खून में 82 से 110mg/dl ग्लूकोज का होना आवश्यक होता है.
ग्लूकोज के रूप में इस शुगर का रिसाव तब होता है जब पैंक्रियाज से ग्लूकागॉन नाम के हार्मोन का खून में शराब होता है ग्लूकागॉन हार्मोन हमारे शरीर में इकट्ठा हुए ग्लाइकोजन को ग्लूकोज में बदलने के लिए लीवर और मसल्स को संकेत देते हैं. जिसकी वजह से ब्लड स्ट्रीम में ग्लूकोज रिलीज होता है और शरीर के अहम अंगों को काम करने के लिए ऊर्जा प्राप्त होती है. शरीर को काम करने के लिए सामान्य मात्रा में ग्लूकोज को मिलते रहना और खून में शुगर की मात्रा को नियंत्रण में रखना जरूरी है.
रक्त में ग्लूकोज की ज्यादा मात्रा नर्व और आर्टरी को बर्बाद कर सकती है. ऐसे में ग्लूकोज की मात्रा को संतुलित बनाए रखने के लिए पैंक्रियाज इंसुलिन उत्पन्न करते हैं. यह एक ऐसा हार्मोन है जो शुगर को ब्लड स्ट्रीम में ज्यादा समय तक ठहरने से बचाता है.
डायबिटीज में तनाव लेने पर क्या होता है?
तनाव को हम व्यापक रूप में शरीर के लिए चुनौती के तौर पर समय सकते हैं. यह भावनात्मक या फिजियोलॉजिकल यानी शारीरिक रूप में भी हो सकता है. एक सर्वे से यह बात सामने आई है कि ज्यादातर लोग काम के वजह तनाव के शिकार होते हैं. भावनात्मक तनाव को हम गुस्सा, घबराहट, डर, उत्साह और फिक्र के रूप में भी महसूस करते हैं. वही शारीरिक तनाव में बीमारी, दर्द या घाव वगैरह शामिल है.
तनाव से निपटने के लिए शरीर को ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है. इसलिए जब भी तनाव होता है तो एड्रिनल ग्रंथि खून में ग्लूकोज लेबल को बढ़ाती है. जिससे तनाव के समय ऊर्जा की जरूरत पूरी हो सके. जहां, बिना डायबिटीज वाले लोगों के शरीर में शुगर इंसुलिन हार्मोन के जरिए रेगुलेट होता है. वही डायबिटिक लोगों को अपने शुगर लेवल को सामान्य स्तर पर रखने के लिए काफी कोशिशें करनी पड़ती है.
खून में उच्च शुगर लेवल के लगातार बनी रहने से शारीरिक क्रियाओं में बाधाएं आती है और ब्लड वेसल्स यानी रक्त धमनियां खराब हो जाती है क्योंकि तनाव से ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है. इसलिए यह किसी भी हाल में सही नहीं है. खासकर उनके लिए जो डायबिटीज के मरीज हैं.
तनाव से बचाव के तरीके-
अपने तनाव से वाकिफ रहे-
प्रतिदिन की लाइफ स्टाइल में हो सकता है कि तनाव होने का निशान न मिले, हम अनजान रह जाएं, इसलिए हमेशा अपनी शारीरिक और मानसिक की विधियों पर नजर बनाए रखें. आप रोजमर्रा की स्थितियों पर क्या प्रतिक्रिया दे रहे हैं. उस पर ध्यान दें जिसमें आपको लगे कि आप तनाव से ग्रस्त हैं तो अपने ब्लड शुगर लेवल की जांच करें. बढ़े हुए ब्लड शुगर लेवल के प्रति सावधानियां बरतें और अगर तनाव लेबल में बढ़त के आसार नजर आए तो गहरी सांस लेने और शरीर को शांत रहने के लिए तैयार करें, हो सकता है तब भी तनाव शरीर को प्रभावित करें, ब्लड शुगर लेवल के बड़े होने की वजह से आपकी मौजूदा दिमागी हालत स्थिर नहीं रहती है. साथ ही अगर आपको इंसुलिन लेने का निर्देश मिला है तो ऐसे हालात में अपने साथ इंसुलिन का रोज तैयार रखें.
ध्यान लगाएं-
जब हमारा शरीर अलग-अलग हालातों और स्थितियों से जूझता है. तब हमारे अंदर तनाव उत्पन्न होता है. साथ ही जब हमारी भावनाएं किसी वजह से नहीं संभालती है. तब भी हमारे तनाव का स्तर अधिक होता है. ऐसा तभी होता है जब हमें कुछ स्थितियों से कैसे निपटा जाए. इसका पता नहीं होता है. यह उन हालातों में भी होता है जब हमारा दिमाग नकारात्मक सोच में डूबा हो. ध्यान लगाने से आपको स्थितियों को लेकर वाकिफ रहने और दिमाग को इन नकारात्मक चीजों से उबरने में मदद मिलती है. यह साबित हो चुका है कि ध्यान लगाने से घबराहट कम करने में मदद मिलती है. जिससे आप आसानी से हालातों पर नियंत्रण पा लेते हैं.
कुछ चीजों को नियंत्रित करें-
हो सकता है कि बीमारी या चोट लगने जैसे शारीरिक तनाव पर आपका नियंत्रण ना हो, जिन पर मामलों में तनाव पैदा होने के बारे में आपको पहले ही अंदाजा हो उसे आगे बढ़ कर खुद को काबू में करने की कोशिश करें. तनावपूर्ण स्थितियों से निपटने के लिए आप क्या कुछ कर सकते हैं. उसके लिए पहले से तैयार रहें, तनाव को कैसे नियंत्रित किया जाए और उसे कैसे बचा जाए. इससे जुड़े लेख भी पढ़ने की कोशिश करें. एक साधारण और भरोसे मंद ट्रिक के तहत आप पहले से कुछ बातों की योजना बना लें. इससे आपको आगे आने वाले तनाव से छुटकारा मिल सकता है.
डायबिटीज के मरीजों पर तनाव का क्या असर होता है? जानें बचाव के तरीके
बातें खूब करें-
तनाव से निपटने का सबसे अच्छा तरीका है कि जो बात आपको परेशान कर रही हो, उसके बारे में बात करें या मदद ली जाए. ऐसे लोगों से बात करें जो आपको उस तनाव से छुटकारा पाने में मदद कर सके. आपकी परेशानी सुलझाने के अलावा यह आपके तनाव को भी कम करने में आपकी मदद करेगा. अगर उस तनावपूर्ण हालात में कोई आपके साथ मौजूद न हो तो खुद से बातचीत करें. हाल ही में कई की गई स्टडी के अनुसार खुद से बातें करना भी तनाव को कम करने में मददगार होता है.
एक्सरसाइज करें-
पसीना बहाने से वजन और शरीर का आकार सही बना रहता है, इतना ही नहीं एक्सरसाइज से तनाव पर भी सीधा असर पड़ता है. असल में एक्सरसाइज करने से एंडोर्फिन नाम का फीलगुड हार्मोन बनता है जो तनाव को खत्म और हमें खुश रखने में मदद करता है, इसलिए अगर आप मानसिक तनाव महसूस करें तो हल्का- फुल्का एक्सरसाइज करने की कोशिश कीजिए, बाहर घूमने जाएं अपने घर के काम करें इससे एंडोर्फिन रिलीज होता है, जो फौरन आपके शरीर से तनाव के स्तर को कम करता है.
नियमित एक्सरसाइज के जरिए आप अपने शरीर को अच्छा महसूस करने की आदत में ढाल सकते हैं. आगे चलकर यह तनाव के हमले को कम करता है और आपके शरीर को उसी स्थिति से भी निपटने में मददगार होता है. जब आप तनाव में होते हैं.
एक्सरसाइज का सीधा प्रभाव आप अपने ब्लड प्रेशर शुगर लेवल पर देख सकते हैं जो कि तनावपूर्ण हालातों में भी नहीं बढ़ता है, इसलिए तनाव से निपटने का सबसे अच्छा तरीका नियमित एक्सरसाइज करना है, खासकर तब जब आप डायबिटीज से ग्रस्त हैं. लेकिन हां एक बात की सावधानी भी बरतने की जरूरत है किसी भी तरह की शारीरिक गतिविधि शुरू करने के पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें. क्योंकि इससे आपके शरीर पर असर पड़ सकता है और आपके ब्लड शुगर लेवल के बैलेंस को बिगाड़ सकता है.
डायबिटीज के मरीजों पर तनाव का क्या असर होता है? जानें बचाव के तरीके
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स्रोत- वेल्थी मैगजीन.

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