शास्त्रों के अनुसार किस लकड़ी से बना पलंग पर सोना होता है अशुभ

शास्त्रों के अनुसार हर काम का जिस प्रकार समय बताया गया है. उसी तरह किसी भी चीज के प्रयोग के बारे में बताया गया है. आज हम शास्त्रों में बताए गए किस लकड़ी से बने पलंग पर सोना अशुभ होता है के बारे में बताएंगे.
शास्त्रों के अनुसार किस लकड़ी से बना पलंग पर सोना होता है अशुभ
चलिए जानते हैं विस्तार से -

चरक संहिता और कूर्म पुराण में बताया गया है, कि पलंग लोहे का और किसी अशुद्ध तू का बना नहीं होना चाहिए. इसके साथ ही यह भी बताया गया है, कि पलंग में कौन सी लकड़ी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. वही स्कंध विष्णु वामन और ब्रह्मपुराण में पलंग कीजिएगा और सोने की दिशा के बारे में भी बताया गया है. धर्म ग्रंथों में बताई गई यह बातें शारीरिक परेशानियों से तो बचाती ही है. इसके अनुसार अपने बेडरूम में सोने का तरीका के बारे में भी बताया गया है. सही दिशा में सोने से उर्जा आती है और उम्र भी बढ़ती है.

लघु व्यास संगीता के अनुसार पलंग के सामने शीशा नहीं होना चाहिए. शीशे में बेड दिखाई देता है, तो उस बेड पर सोने वालों की स्वास्थ्य और रिलेशनशिप दोनों पर नेगेटिव प्रभाव पड़ता है. इस ग्रंथ के दूसरे अध्याय में सैयां और दर्पण की इस स्थिति को अशोक बताया गया है.

ब्रह्मपुराण और स्कंद पुराण में बताया गया है, कि कैसी जगह नहीं सोना चाहिए. इन ग्रंथों में बताया गया है कि पलंग के बराबर में खिड़की का होना शुभ होता है. उठते ही आकाश का दर्शन हो सके. इसलिए सुबह देर तक खिड़की खुली रखनी चाहिए. इससे आलस्य और थकान दूर हो जाती है और सांस संबंधी बीमारियां भी दूर रहती है.

विष्णु और वामन पुराण के मुताबिक आपके पलंग का सिरहाना पूर्व और दक्षिण दिशा की तरफ होना चाहिए. तीन दिशाओं में सिर रखकर सोने से धन और आयु दोनों बढ़ती है.

कूर्म पुराण के मुताबिक बस या प्लस की लकड़ी का पलंग नहीं होना चाहिए. इसके अलावा लोहा और अन्य अशुद्धधातु का पलंग भी बीमारियों को देने वाला होता है. इसके अलावा सागवान का पलंग उपयोग किया जा सकता है.

चरक संहिता के अनुसार पलंग समतल जगह पर होना बेहतर होता है, पलंग का कोई भी हिस्सा टूटा नहीं होना चाहिए और आवाज करने वाला बेड भी अशुभ माना जाता है.

आपका सैया स्थान यानी पलंग दो दरवाजे के बीच भी नहीं रखा होना चाहिए. ऐसा होने से इस पर सोने वाले की तबीयत बार-बार खराब होती है और उसे मानसिक अशांति का भी सामना करना पड़ सकता है.

शयन कक्ष और स्नान गिरी की स्थिति के बारे में ग्रंथों में बताया गया है कि असना नगरीऔर शयन कक्ष को जोड़ने वाली दीवार से पलंग दूर होना चाहिए. ऐसा होने से मानसिक तनाव और डर बना रहता है. इससे बचने के लिए उस दीवार और पलंग के बीच लकड़ी लगाएं.

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