क्या है टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज, जानें क्या होते हैं लक्षण?

कल्याण आयुर्वेद- आज के गलत लाइफ स्टाइल में डायबिटीज एक आम बीमारी बनती जा रही है. जिससे काफी संख्या में लोग प्रभावित हो रहे हैं.
क्या है टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज, जानें क्या होते हैं लक्षण?
डायबिटीज में इंसुलिन का बनना कम हो जाता है या फिर बिल्कुल ही इंसुलिन नहीं बन पाता है, जबकि टाइप 2 डायबिटीज से प्रभावित लोगों का ब्लड शुगर स्तर बहुत अधिक हो जाता है. जिसको नियंत्रण करना बहुत मुश्किल हो जाता है. टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज एक जैसा नहीं होता है. इन दोनों में बहुत फर्क होता है.
चलिए जानते हैं विस्तार से-
टाइप 1 डायबिटीज-
इस प्रकार के डायबिटीज में पैंक्रियाज की बीटा कोशिकाएं पूरी तरह से नष्ट हो जाती है और इस तरह इंसुलिन का बनना संभव नहीं होता है. यह जेनेटिक ऑटोइम्यून एवं कुछ वायरल संक्रमण की वजह से होता है. इसके कारण बचपन में ही बीटा कोशिकाएं पूरी तरह से नष्ट हो जाती है. यह बीमारी आमतौर पर 12 से 25 साल से कम उम्र में देखने को मिलती है.
टाइप 2 डायबिटीज-
टाइप 2  डायबिटीज से ग्रस्त लोगों का ब्लड शुगर स्तर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, इसे नियंत्रित करना काफी मुश्किल होता है. इस स्थिति में व्यक्ति को अधिक प्यास लगती है, बार-बार पेशाब और भूख भी अधिक लगने लगती है. यह किसी को भी हो सकता है लेकिन इसे बच्चों में ज्यादा देखा जाता है. टाइप 2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता है.
Type- 2 डायबिटीज किसे होती है?
आजकल एक्सरसाइज की कमी और फास्ट फूड का ज्यादा सेवन के वजह से बच्चों में टाइप 2 डायबिटीज होने लगी है. 15 साल के नीचे के लोग खासकर 12 या 13 साल के बच्चों में दिखाई दे रही है. पुरुषों के मुकाबले यह महिलाओं में अधिक हो रही है. यह बीमारी उन लोगों को ज्यादा होती है जिनका वजन अधिक होता है. आमतौर पर 32 से ज्यादा बीएमआई के लोगों में या अधिक होती है. जेनेटिक कारणों से भी यह बीमारी हो सकती है.
टाइप 1 डायबिटीज शुगर की मात्रा ज्यादा होने से व्यक्ति को बार बर पेशाब आता है. शरीर से अधिक तरल पदार्थ निकलने के कारण प्यास अधिक लगने लगती है. इसके कारण शरीर में पानी की कमी भी हो जाती है. रोगी कमजोरी महसूस करने लगता है. इसके अलावा दिल की धड़कन भी बहुत अधिक हो जाती है.
टाइप 2  डायबिटीज के लक्षण-
इसके कारण शरीर ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने से थकान, कम दिखना और सिरदर्द जैसी समस्याएं होती है. शरीर से तरल पदार्थ अधिक मात्रा में निकलता है. जिसके कारण रोगी को प्यास अधिक लगती है. कोई चोट या घाव लगने पर वह जल्दी ठीक नहीं होता है. डायबिटीज के लगातार अधिक बने रहने का प्रभाव आंखों की रोशनी पर पड़ता है. इसके कारण डायबिटीज रेटिनोपैथी नाम की बीमारी हो जाती है. जिससे आंखों की रोशनी में कमी आ जाती है.
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