शास्त्रों के अनुसार नाभि से जुड़ी 10 रोचक तथ्य जानकर उड़ जाएंगे होश

कल्याण आयुर्वेद- जन्म के बाद जब मां की नाल से जुड़ी बच्चे की गर्भनाल को दाई या डॉक्टर द्वारा बांधकर अलग किया जाता है तो बच्चे के पेट पर एक निशान बन जाता है जिसे नाभि कहा जाता है. नाभि का आकार और संरचना सभी में अलग- अलग होती है. महिलाओं की तुलना में पुरुषों की नाभि के आसपास अधिक रोवें होते हैं. नाभि सिर्फ स्तनधारी जीवो में ही पाई जाती है अंडे देने वाले जीव में नहीं.

शास्त्रों के अनुसार नाभि से जुड़ी 10 रोचक तथ्य जानकर उड़ जाएंगे होश

तो चलिए जानते हैं नाभि से जुड़ी रोचक तथ्यों के बारे में-

1 .हिंदू शास्त्र के मुताबिक नाभि को हमारी जीवन ऊर्जा का केंद्र है कहा जाता है क्योंकि मृत्यु के बाद भी प्राण नाभि में छः मिनट तक रहते हैं. शरीर में दिमाग से ही महत्वपूर्ण स्थान है नाभि का. नाभि शरीर का प्रथम दिमाग होता है जो प्राणवायु से संचालित होता है.

2 .हमारा सूक्ष्म शरीर नाभि ऊर्जा के केंद्र से जुड़ा रहता है यदि कोई संत पुरुष शरीर से बाहर निकलकर सूक्ष्म शरीर से कहीं भ्रमण करता रहता है तो उसके सूक्ष्म शारीर की नाभि से स्थूल शरीर की नाभि के बीच एक रश्मि जुड़ी रहती है. यदि यह टूट जाती है तो व्यक्ति का अपने स्थूल शरीर से संबंध भी टूट जाता है.

3 .हिंदू शास्त्रों में उल्लेख किया गया है कि भगवान ब्रह्मा का जन्म विष्णु की नाभि से हुआ था. दरअसल इस संसार में प्रत्येक मनुष्य का जन्म नाभि से ही होता है. नाभि को पाताल लोक भी कहा गया है. विष्णु पाताल लोक में ही रहते हैं. इस धरती और संपूर्ण ब्रह्मांड का भी नाभि केंद्र है. नाभि केंद्र से ही संपूर्ण जीवन संचालित होता है.

4 .योग शास्त्र में नाभि का चक्र को मणिपुर चक्र कहा जाता है. नाभि के मूल में रक्त वर्ण का यह चक्र शरीर के अंतर्गत मणिपुर नामक तीसरा चक्र है जो 10 दल कमल पंखुड़ियों से युक्त है. जिस व्यक्ति की चेतना उर्जा यहां एकत्रित है उसे काम करने की धुन सी रहती है ऐसे लोगों को कर्मयोगी कहते हैं. यह लोग दुनिया का हर कार्य करने के लिए तैयार रहते हैं. इसके सक्रिय होने से तृष्णा, ईर्ष्या, चुगली, लज्जा, भय, घृणा, मोह आदि कसाय- कल्मष दूर हो जाते हैं यह चक्र मूल रूप से आत्म शक्ति प्रदान करता है.

5 .आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में रोग पहचानने के कई तरीकों के बारे में बताया गया है. उनमें से एक नाभि स्पंदन से रोग की पहचान भी शामिल है. नाभि स्पंदन से यह पता लगाया जा सकता है कि शरीर का कौन सा अंग खराब हो रहा है या रोगग्रस्त हो रहा है. नाभि के संचालन और इसकी चिकित्सा के माध्यम से सभी प्रकार के रोग ठीक किए जा सकते हैं.

6 .नाभि स्पंदन पद्धति के अनुसार यदि नाभि ठीक मध्यमा स्तर के बीच में चलती है तब महिलाएं गर्भधारण योग्य होती हैं. लेकिन यदि यही मध्यमा स्तर से खिसक कर नीचे रीढ़ की तरफ चली जाए तो ऐसी महिलाएं गर्भधारण नहीं कर सकती है, ऐसा भी कहा जाता है कि जिन महिलाओं की नाभि एकदम बीचों- बीच में होती है वह बिल्कुल स्वस्थ बच्चे को जन्म देती हैं.

7 .नाभि के खिसकने से मानसिक एवं आध्यात्मिक क्षमताएं कम हो जाती है. यदि गलत जगह पर खिसककर वह स्थाई हो जाए तो परिणाम अत्यधिक खराब हो सकते हैं. नाभि को यथा स्थान लाना एक कठिन कार्य है. थोड़ी सी गड़बड़ी किसी नई बीमारियों को जन्म दे सकती है. नाभि की नाड़ियों का संबंध शरीर के आंतरिक अंगों की सूचना प्रणाली से होता है इसलिए नाभि नाडी को यथा स्थल बैठाने के लिए इस के योग्य व जानकार चिकित्सकों का ही सहारा लिया जाना चाहिए. नाभि को यथा स्थान लाने के लिए रोगी को रात्रि में कुछ खाने को न दें. सुबह खाली पेट उपचार के लिए जाना चाहिए क्योंकि खाली पेट लाया जा सकता है.

8 .नाभि में 1458 प्रकार के बैक्टीरिया पाए जाते हैं जो बाहरी बैक्टीरिया से हमारे शरीर की रक्षा करते हैं, नाभि में कई बार फंगल इंफेक्शन हो जाता है ऐसे में नाभि को साफ- सुथरा रखना बहुत आवश्यक है लेकिन इसकी इतनी ही सफाई नहीं करनी चाहिए कि इससे बैक्टीरिया खत्म हो जाए.

9 .समुद्र शास्त्र में भी नाभि के आकार प्रकार के अनुसार महिला- पुरुष के व्यक्तित्व के बारे में बतलाया गया है. जिन महिलाओं की नाभि समतल होती है उन्हें जल्द गुस्सा आता है लेकिन पुरुष की नाभि समतल है तो बुद्धिमान और स्पष्ट वादी होता है. जिनकी नाभि गहरी होती है वे प्रेमी, रोमांटिक व मिलनसार होते हैं और इन्हें जीवन साथी सुन्दर मिलता है. जिन महिलाओं की लंबी होती है वे आत्मविश्वास से भरी हुई और आत्म निर्भर होती है. जिनकी नाभि गोल होती है वे आशावादी, बुद्धिमान और दयालु होती हैं ऐसी महिलाओं का वैवाहिक जीवन सुखमय गुजरता है. पतली नाभि वाले लोग कमजोर और नकारात्मक होते हैं. ऐसे लोग अक्सर काम को अधूरा छोड़ देते हैं और वे स्वभाव से चिड़चिड़ी होते हैं.

जिन लोगों की नाभि ऊपर की ओर बड़ी और गहरी है तो ऐसे लोग हंसमुख और मिलनसार स्वभाव के होते हैं. उभरी और बढ़ी हुई नाभि है तो ऐसे लोग जिद्दी होते हैं. अंडाकार नाभि वाले लोग सोचने में अपना समय गवाकर हाथ आया मौका भी छोड़ देते हैं. चौड़ी नाभि वाले लोग शक करने वाले और अंतर्मुखी होते हैं. जिन लोगों की नाभि ऊपर से नीचे आती हुई दो भागों में बढ़ती हुई दिखाई दे तो ऐसे लोग आर्थिक, पारिवारिक और सेहत की दृष्टि से मजबूत होते हैं.

10 .नाभि पर सरसों का तेल लगाने से कई स्वास्थ्य और सौन्दर्य लाभ भी होते हैं. इससे होठ मुलायम होते हैं.नाभि पर घी लगाने से पेट कि अग्नि शांत होती है और कई प्रकार के रोगों को दूर करने में मदद मिलती है.इससे आँखों और बालों को भो लाभ होता है.शारीर में कम्पन, घुटने और जोड़ों के दर्द में भी राहत मिलती है. नाभि में सरसों के तेल लगाने से चेहरे कि सुन्दरता बढती है.

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स्रोत- वेबदुनिया.

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