गर्भावस्था में जॉन्डिस होने के कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक एवं घरेलू उपाय

कल्याण आयुर्वेद- इस रोग में महिला का समस्त शरीर पीला हो जाता है. गर्भवती महिला की आंखें, शरीर एवं मूत्र पीला हो जाता है. मुंह का स्वाद कड़वा, नाड़ी क्षीण, आलस्य, सारे शरीर में खुजली, मंदाग्नि, जीभ पर मल का जमना आदि लक्षण दिखाई देते हैं.
गर्भावस्था में जॉन्डिस होने के कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक एवं घरेलू उपाय
जॉन्डिस होने के कारण-
विषाणु संक्रमण, जनित यकृत शोथ, संक्रमित व्यक्तियों द्वारा भोजन के दूषित होने के कारण एवं समजात सिरम, कामला, सूचीवेध सिरिंज के संदूषण, दूषित प्लाविका अथवा रक्ताधान के कारण होता है.
कामला यानी जॉन्डिस गर्भावस्था में यकृत विकार तथा परिवर्तन क्रिया से पैदा होने वाला रोग है. इसमें यकृत वाहिनी संकीर्ण हो जाती है अथवा उस में पथरी रुक जाती है, जिससे स्रावित पीत अतडियों में ना पहुंचकर सीधे रक्त में ही मिलने लगता है.
जॉन्डिस के लक्षण-
इस रोग में अरुचि, उत्कलेस, वमन, ज्वर, कन्डू, कामला आदि लक्षण मिलते हैं. कुछ रोगियों को यकृत जनित सन्यास हो जाता है. यह रोग गर्भकाल में कभी-कभी भयानक रूप धारण कर लेता है. विशेषकर शाकाहारी एवं हिनपोषित गर्भवती महिलाओं में. गर्भिणी के अतिवमन एवं गर्भपात में क्लॉस्ट्रीडियम बेलशियाई संक्रमण के कारण भी इस रोग की उत्पत्ति होती है.
गर्भवती महिलाओं में जॉन्डिस के आयुर्वेदिक एवं घरेलू उपाय-
1 .महिला को पूर्ण रूप से विश्राम करना चाहिए.
2 .भोजन में कार्बोहाइड्रेट की पर्याप्त मात्रा में लेनी चाहिए. साथ ही प्रोटीन की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ानी चाहिए. जॉन्डिस की रोगिणी को वसायुक्त भोजन नहीं देना चाहिए.
3 .गंभीर प्राकगर्भाक्षेपक तथा ज्यादा उल्टी की रोगियों को जोंडिस उत्पन्न होने पर प्रसव प्रेरण अथवा गर्भपात करा देना चाहिए.
4 .जॉन्डिस में पीपली, अंगोठमूल, भैंस का दूध एवं दही सब मिलाकर सेवन कराने से लाभ होता है.
5 .औषधि चिकित्सा में नवायस लौह 60 से 120 मिलीग्राम शहद के साथ मिलाकर चटाना चाहिए, साथ ही द्राक्षासव 2- 4 ड्राम भोजन के बाद दुगना ताजा पानी मिलाकर दिन में दो बार पिलाना फायदेमंद होता है.
6 .बसंत मालती रस 30 से 60 मिलीग्राम मधु से सेवन कराएं. साथ ही लोहासव 24 ड्राम भोजन उपरांत संभाग जल मिलाकर सेवन करें.
7 .मंडूर भस्म 120 से 240 मिलीग्राम तथा शिलाजीत 120 से 240 मिलीग्राम दोनों को मिलाकर शहद के साथ सेवन करना चाहिए, इससे पर्याप्त लाभ होता है.
8 .यदि जॉन्डिस के साथ शरीर में शोथ भी हो तो दार्व्यादि लौह सेवन करावें. इस अवस्था में नवायस चूर्ण भी बहुत फायदेमंद होता है.
9 .यदि जॉन्डिस के साथ बुखार, अतिसार एवं सूजन के लक्षण अधिक हो तो पंचामृत पर्पटी अथवा स्वर्ण पर्पटी सेवन करावें.
नोट- यह पोस्ट शैक्षणिक उद्देश्य से लिखा गया है. किसी भी प्रयोग से पहले योग्य वैद्य की सलाह जरूर लें, ताकि स्थिति के अनुसार इन दवाओं का सेवन किया जा सके और इस समस्या से छुटकारा पाने में मदद मिले.
यह जानकारी अच्छी लगे तो लाइक, शेयर करें. धन्यवाद.
स्रोत- स्त्री रोग चिकित्सा.

Post a Comment

0 Comments