किडनी में सूजन होने पर दिखते हैं ये लक्षण, न करें नजरअंदाज

कल्याण आयुर्वेद- किडनी या गुर्दे में सूजन आना एक मेडिकल स्थिति है. इस रोग को अंग्रेजी में नेफ्राइटिस कहा जाता है. शरीर में दो किडनी होती है जो राजमा की आकृति जैसी होती है और पीठ के निचले भाग में स्थित होती है. किडनी में नेफ्रॉन नामक फंक्शन द्वारा पानी आयन और सूक्ष्म अणु को खून से अलग किया जाता है. विषाक्त व व्यर्थ पदार्थों को शरीर से अलग किया जाता है और आवश्यक आयनों को खून में शामिल किया जाता है.

किडनी में सूजन होने पर दिखते हैं ये लक्षण, न करें नजरअंदाज

जब किडनी के नेफ्रॉन और आसपास के उत्तकों में सूजन व लालिमा विकसित हो जाती है तो उसे नेफ्राइटिस कहा जाता है. यह स्थिति गुर्दे खराब कर देती है. जब किडनी ठीक से काम कर रही होती है तो शरीर के सभी अंगों को लगातार पर्याप्त मात्रा में स्वस्थ खून व ऑक्सीजन प्राप्त होता रहता है. लेकिन जब किडनी में सूजन आ जाती है तो वे पूरी तरह से खून को फिल्टर नहीं कर पाती है. किडनी में सूजन आने पर कई लक्षण पैदा हो जाते हैं. जैसे- पेशाब का अधिक आना, पेशाब में खून आना, बुखार, मतली और उल्टी इत्यादि.

किडनी में सूजन से बचाव रखने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं. जैसे- खूब पानी पीना, नियमित रूप से एक्सरसाइज करना, धूम्रपान बंद करना और मीठे पदार्थों की खपत कम करना.

डॉक्टर लक्षणों की जांच करके आपका शरीर परीक्षण करके और आपकी पिछली मेडिकल स्थिति के बारे में जानकर इस रोग का पता लगा लेते हैं. रोग का पता लगाने के लिए डॉक्टर एमआरआई स्कैन, यूरिन टेस्ट. किडनी फंक्शन टेस्ट और किडनी बायोप्सी आदि जैसे टेस्ट भी कर सकते हैं.

किडनी में सूजन आने के कई प्रकार हो सकते हैं इसलिए इनका इलाज भी किडनी में सूजन के प्रकार के अनुसार ही किया जाता है. किडनी की सूजन को कंट्रोल करने के लिए एंटीबायोटिक और कोर्टीकोस्टेरोइड दवाएं दी जाती है व मरीज को किडनी डायलिसिस पर रखा जाता है. इसके अलावा स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए कई सहायक उपचार किए जाते हैं.

अगर किडनी का सूजन का इलाज न किया जाए तो किडनी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो जाती है और काम करना बंद कर देती है. इस स्थिति को किडनी फेलियर या गुर्दे खराब होना कहा जाता है. किडनी फेलियर एक गंभीर स्थिति है. जिसमें किडनी में व्यर्थ जमा पदार्थ जमा होने लगते हैं और इस कारण से अन्य अंगों में विषाक्तता आ जाती है.

किडनी में सूजन होने पर यह लक्षण दिखते हैं-

किडनी में सूजन आमतौर पर शुरुआती चरणों में अधिक गंभीर स्थिति पैदा नहीं करती है. हालांकि किडनी में कोई स्थाई क्षति होने से बचाव करने के लिए डॉक्टर को दिखाना आवश्यक होता है. किडनी में सूजन आने से यह लक्षण या संकेत पैदा होने लगते हैं.

* पेल्विस और गुर्दे के आसपास दर्द या पेट में दर्द.

* अचानक से शरीर का वजन बढ़ जाना ( ऐसा शरीर में अधिक द्रव जमा होने के कारण होता है )

* पेशाब का अधिक आना.

* पेशाब में मवाद आना.

* पेशाब के रंग में बदलाव होना.

* ठंड लगना और कांपना.

* त्वचा का ठंडा होना.

* ब्लड प्रेशर बढ़ जाना.

* झागदार पेशाब आना.

* शरीर के किसी भी हिस्से में सूजन आना जैसे- हाथ, पैर, टखने और चेहरा आदि.

* पेशाब आने के समय और आदतों में बदलाव.

* पेशाब करते समय दर्द व जलन.

* पेशाब में खून आना या गहरे रंग का पेशाब आना.

* मतली और उल्टी.

* बुखार और त्वचा पर चकत्ते होना.

* मानसिक स्थिति में बदलाव जैसे उनींदापन, उलझन महसूस होना.

डॉक्टर को कब दिखाना हो जाता है जरूरी?

यदि पेशाब में खून आ रहा हो या पेशाब ब्राउन रंग का दिखाई दे रहा हो तो यह एक गंभीर स्थिति का संकेत हो सकता है. इसलिए जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए. इसके अलावा यदि आपको अन्य कुछ बड़े लक्षण महसूस हो रहे हैं तो भी जल्द ही डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए जैसे-

* झागदार पेशाब आना.

* बार- बार पेशाब होना.

* पेशाब बहुत कम मात्रा में आना.

* चेहरे पर सूजन.

* टखने के आसपास सूजन.

नोट- यदि आपको किडनी संबंधी किसी भी प्रकार की समस्या है तो वह किडनी को स्थाई रूप से क्षतिग्रस्त कर सकती है, इसलिए जितना जल्दी हो सके डॉक्टर को दिखा लेने से किडनी को बचाया जा सकता है. यह पोस्ट शैक्षणिक उद्देश्य से लिखा गया है उपर्युक्त लक्षण मिलने पर आप डॉक्टर से जरूर सलाह लें.

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