जानिए- मासिक धर्म के दौरान हैवीब्लीडिंग रोकने के घरेलू नुस्खे

कल्याण आयुर्वेद- महिलाओं में मासिक धर्म का होना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो 12- 14 साल की उम्र से शुरू होकर 45- 50 वर्ष की उम्र तक हर महीने होती है. इस दौरान कई महिलाओं को तो कोई खास परेशानी नहीं होती है. लेकिन कई महिलाओं को कमर दर्द, पेट के निचले हिस्से में दर्द, कमजोरी, थकान, चिड़चिड़ापन जैसी समस्याओं से गुजरना पड़ता है. लेकिन उनकी परेशानी तब अधिक हो जाती है. जब हैवी ब्लीडिंग की समस्या हो जाती है. हेवी ब्लीडिंग होने के कारण कई बार शरीर में खून की कमी होने की वजह से एनीमिया जैसी समस्या से गुजरना पड़ता है.
जानिए- मासिक धर्म के दौरान हैवीब्लीडिंग रोकने के घरेलू नुस्खे
चलिए जानते हैं विस्तार से-
क्यों होती है हेवी ब्लीडिंग की समस्या?
शादी से पहले और युवावस्था के प्रारंभ में जो लड़कियां शारीरिक संबंधों में संलग्न होने लगती है. उन्हें रक्त प्रदर यानी मासिक धर्म के दौरान हेवी ब्लीडिंग की बीमारी होने की संभावना अधिक रहती है. लड़कियों में हस्तमैथुन व अप्राकृतिक मैथुन के कारण रक्त प्रदर यानी हेवी ब्लीडिंग हो सकता है. भोजन में अधिक मिर्च, मसाले, खट्टे, वसायुक्त, उष्ण और मांस, मछली आदि खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन करना मासिक धर्म की बीमारी के साथ-साथ मासिक धर्म के दौरान हेवी ब्लीडिंग की समस्या उत्पन्न करती है.
रक्त प्रदर रोग में मासिक धर्म के समय अधिक रक्तस्राव होना अधिक खून आने की समस्या मासिक धर्म के अलावा किसी भी समय हो सकती है. ज्यादा ब्लडिंग आने की समस्या कई- कई दिन तक रह सकता है. गर्भपात कराने से रक्त प्रदर हो सकती है. अधिक चिंता, क्रोध, ईर्ष्या और शारीरिक क्षमता से अधिक परिश्रम भी मासिक धर्म के समय हैवी ब्लीडिंग की समस्या उत्पन्न कर सकती है.
जानिए- मासिक धर्म के दौरान हैवीब्लीडिंग रोकने के घरेलू नुस्खे
हैवी ब्लीडिंग के समय लड़कियों को होती है ये परेशानियां?
रक्त प्रदर से पीड़ित लड़कियों व महिलाओं को कमर में दर्द, खून की कमी, शारीरिक कमजोरी, सिर में चक्कर आना, नेत्रों के आगे अंधेरा छाना, प्यास अधिक लगना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं. जांघ, पिंडलियों और नाभि के आसपास दर्द होता है. रक्त विकार की बीमारी पीत के कुपित होने से होती है. इसलिए इस रोग से बचने के लिए पीत बढ़ाने वाले पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए. साथ ही शारीरिक संबंध बनाने से भी दूर रहना चाहिए.
मासिक धर्म के दौरान हैवी ब्लीडिंग रोकने के घरेलू नुस्खे-
जानिए- मासिक धर्म के दौरान हैवीब्लीडिंग रोकने के घरेलू नुस्खे
1 .शुद्ध गेरू डेढ़ माशा, फिटकरी एक तोला दोनों को पीसकर एक मासा की मात्रा में सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से रक्त प्रदर की बीमारी नष्ट होती है.
2 .माजूफल 25 ग्राम लेकर 200 ग्राम जल में डालकर उबालें. जब एक चौथाई हिस्सा पानी रह जाए तो उसमें 3 ग्राम रसौत और 3 ग्राम शुद्ध फिटकिरी मिलाकर योनि को धोनी से रक्त प्रदर में लाभ होता है.
3 .10 ग्राम आंवले के रस में स्वादानुसार मिश्री मिलाकर सुबह-शाम पीने से रक्त प्रदर दूर होती है और जलन एवं दाह से छुटकारा मिलता है.
4 .केले की कोमल जड़ का रस 10 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह खाली पेट सेवन करने से रक्त प्रदर में बहुत लाभ होता है.
5 .गाजर का रस 100 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम प्रतिदिन पीने से रक्त प्रदर की बीमारी नष्ट होती है.
6 .कुकरौंधा की 6 ग्राम जड़ को पीसकर 150 ग्राम दूध में मिलाकर पीने से रक्त प्रदर की बीमारी नष्ट हो जाती है.
7 .गूलर की ताजी छाल 20 ग्राम को 100 ग्राम जल में उबालकर 50 ग्राम शेष रहने पर उसमें 25 ग्राम मिश्री और 2 ग्राम सफेद जीरा का चूर्ण मिलाकर पीने से निश्चित ही रक्त प्रदर से छुटकारा मिलती है.
8 .बेर के पत्ते 10 ग्राम, कालीमिर्च 5 दाने और मिश्री 20 ग्राम को पीसकर 100 ग्राम जल में मिलाकर पीने से रक्त प्रदर में लाभ होता है.
9 .अनार के फूल, गोखरू और शीतल चीनी 10-10 ग्राम की मात्रा में कूट पीसकर चूर्ण बना लें. अब इसमें से 3 ग्राम चूर्ण प्रतिदिन पानी के साथ सेवन करने से रक्त प्रदर में बहुत लाभ होता है.
10 .मासिक धर्म के दौरान हैवी ब्लीडिंग रोकने के लिए लाल फिटकरी काफी फायदेमंद होता है. यदि रक्त का बहाव तेज है तो लाल फिटकरी को तवे पर भून कर पाउडर बना लें. अब इस पाउडर में से आधा से 1 ग्राम की मात्रा में ठंडे पानी के साथ सेवन करें. इससे थोड़ी देर में ही ब्लडिंग कम हो जाती है. शरीर के अन्य हिस्से से आने वाले खून को भी रोकने का कारगर उपाय है.
नोट- यह पोस्ट शैक्षणिक उद्देश्य से लिखा गया है किसी भी प्रयोग से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें.

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