हृदय रोग, लकवा, सफेद दाग, दम्मा, हकलाहट, मर्दाना कमजोरी जैसे बीमारियों का रामबाण इलाज है यह पौधा, जानें इस्तेमाल करने की विधि

कल्याण आयुर्वेद- आयुर्वेद में जड़ी- बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है जो जटिल से जटिल बीमारियों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. कई ऐसे पेड़- पौधे हमारे आसपास हैं जो औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं लेकिन इसके विषय में जानकारी नहीं होने के कारण इसे हम खरपतवार समझ लेते हैं. उन्हीं पौधों में से एक पौधा है अकरकरा जो ह्रदय रोग, लकवा, सफेद दाग, दम्मा, हकलाहट, मर्दाना कमजोरी सहित कई जटिल बीमारियों को दूर करने में मददगार होता है.

हृदय रोग, लकवा, सफेद दाग, दम्मा, हकलाहट, मर्दाना कमजोरी जैसे बीमारियों का रामबाण इलाज है यह पौधा, जानें इस्तेमाल करने की विधि

क्या है अकरकरा?

अकरकरा एक पूरे साल पाई जाने वाली जड़ी- बूटी है. इसका पौधा धारीदार होता है. इसका तना रोयेदार और ग्रंथि युक्त तथा छाल कड़वी और मटियाली रंग की होती है. इसके फूल पीले गंध युक्त और शंकु के आकार के होते हैं. यह मसाले के रूप में भी प्रयोग किया जाता है. इसका प्रयोग दांतों और मसूड़ों की समस्याओं के इलाज में सदियों से ही होता आया है. इसी कारण इसे टूथ एक ट्री भी कहा जाता है.

अकरकरा प्रकृति में गर्म तथा कफ और वात नाशक है. इसका उपयोग दंत मंजन और पेस्ट में होता है. यह पाचक, अरुचि वर्धक होता है. इसमें खून साफ करने, मुंह की बदबू को दूर करने, सूजन को कम करने, दिल की कमजोरी, दंत रोग, हकलाहट, बच्चों के दांत निकलने के समय के रोग, तुतलाहट, रक्त संचार को बढ़ाने के गुण होते हैं.

अकरकरा चयापचय को ठीक रखने के साथ-साथ विषैले पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने में भी मदद करता है. यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत कर रोजमर्रा में होने वाले संक्रमण का मुकाबला करने की शक्ति प्रदान करता है यानी आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है. यह नपुंसकता और दिमाग को तेज करने में भी बहुत लाभकारी होता है.

तो चलिए जानते हैं अकरकरा के फायदे-

लकवा-

अकरकरा की सूखी डंडी को महुआ के तेल में मिलाकर लगाने से लकवा दूर हो जाता है. अकरकरा की जड़ को महुआ के तेल में मिलाकर लगाने से लकवा खत्म हो जाता है. अकरकरा की जड़ का चूर्ण 5 ग्राम शहद में मिलाकर चाटने से लकवा ने काफी लाभ होता है.

सफेद दाग-

अकरकरा के पत्तों का रस निकालकर सफेद दागों पर लगाने से कुछ ही समय में सफेद दाग जड़ से खत्म हो जाते हैं.

सिर दर्द-

अगर सर्दी- जुकाम के कारण सिर में दर्द हो तो अकरकरा को कुछ देर मुंह में दबाए रखने से ही सर दर्द गायब हो जाता है. बादाम के हलवे में आधा ग्राम अकरकरा का चूर्ण मिलाकर खाने से लगातार रहने वाला सर दर्द जड़ से खत्म हो जाता है.

दांत दर्द-

अकरकरा को सिरके में घिसकर दुखते दांत पर लगाने से दंत दर्द जड़ से खत्म हो जाता है. अकरकरा और कपूर को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें और इसे लगातार मंजन करने से दांतों की सभी प्रकार की समस्याएं दूर हो जाती है.

मर्दाना कमजोरी-

अकरकरा का चूर्ण बारीक पीसकर उसे शहद में मिलाकर इसे गुप्त अंग पर लेप करें और ऊपर से पान के पत्ते लपेट लें. इससे सभी प्रकार की नपुंसकता जड़ से खत्म हो जाती है. अकरकरा के सेवन कामेच्छा को उत्तेजित करता है और जननांगों की ओर खून के बहाव को बढ़ाता है. अकरकरा में काम उत्तेजक, कामेच्छा उत्तेजक और स्पर्मेंटोजेनिक क्रियाएं होती है. यह एंड्रोजन के स्राव को प्रभावित करता है और उसके बनने को बढ़ाता है. अकरकरा प्रजनन क्षमता को बढ़ाता है. स्पर्म की संख्या बढ़ाता है और पुरुषों में कामेच्छा में सुधार करता है.

हकलाहट-

अकरकरा और काली मिर्च को बराबर मात्रा में पीसकर शहद में मिलाकर 1 ग्राम जीभ पर रखने से 4 सप्ताह में ही हकलाहट की समस्या जड़ से खत्म हो जाती है. 

पेट के रोग- 

छोटी पीपर और अकरकरा की जड़ का चूर्ण बराबर मात्रा में लेकर पीसकर आधा चम्मच सुबह-शाम शहद के साथ सेवन करने से पेट की सभी समस्याएं दूर हो जाती है.

दम्मा-

अकरकरा को पीसकर उसे कपड़े से छान लें और इस चूर्ण को नाक से सूंघने से दमा की समस्या दूर हो जाती है. 20 ग्राम अकरकरा को 200 मिलीलीटर पानी में तब तक उबालें जब तक 50 मिलीलीटर पानी ना रह जाए. अब इसका सेवन करें. इससे अस्थमा या दम्मा कुछ दिनों तक सेवन करने से ठीक हो जाते हैं.

हृदय रोग-

अर्जुन की छाल और अकरकरा का चूर्ण बराबर मात्रा में पीसकर आधा चम्मच सुबह-शाम सेवन करने से घबराहट, कपकपाहट सहित समस्त ह्रदय रोग दूर हो जाते हैं.

मिर्गी-

अकरकरा को सिरके में पीसकर जिस दिन मिर्गी न आए उस दिन से रोगी को चटाने से मिर्गी रोग जल्द ही खत्म हो जाता है.

नोट- यह पोस्ट शैक्षणिक उद्देश्य से लिखा गया है. किसी भी प्रयोग से पहले योग्य वैध की सलाह अवश्य लें. ताकि उम्र और स्थिति के अनुसार इसका सही सेवन कर लाभ उठाया जा सके.

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