जानें- गुर्दे ( किडनी ) में पथरी होने के कारण, लक्षण और रामबाण आयुर्वेदिक उपाय

कल्याण आयुर्वेद- आजकल के बदलते लाइफ़स्टाइल में अनियमित खानपान, खानपान में फास्ट फूड का अधिक सेवन करना, एक्सरसाइज की कमी आदि के कारण लोगों में कई तरह की बीमारियां हो रही है. जिसमें गुर्दे की पथरी भी शामिल है.

जानें- गुर्दे ( किडनी ) में पथरी होने के कारण, लक्षण और रामबाण आयुर्वेदिक उपाय

गुर्दे की पथरी यानी किडनी स्टोन मिनरल्स और नमक से बनी एक ठोस जमावट होती है. उनका माप रेत के दाने जितना छोटा से लेकर गोल्फ की गेंद जितना बड़ा हो सकता है. स्टोन आपके गुर्दे में रह सकती है या मूत्र पथ के माध्यम से आपके शरीर से बाहर निकल सकती है. मूत्र पथ में गुर्दे मूत्रवाहिनी, मूत्राशय और मूत्र मार्ग होते हैं. किडनी स्टोन को सबसे दर्दनाक चिकित्सक अवस्था में से एक माना जाता है.

ऐसा माना जाता है कि भारत की कुल आबादी में से 12% आबादी को मूत्राशय की पथरी होने की संभावना है. जिनमें से 50% आबादी को गुर्दे की क्षति हो सकती है. इसके अलावा उत्तर भारत की लगभग 15% जनसंख्या गुर्दे की पथरी की समस्या से ग्रस्त है. लेकिन दक्षिण भारत में इसके मामले कम है. आपको बता दें कि महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के हिस्सों में गुर्दे की पथरी की समस्या काफी प्रचलित है. इस क्षेत्र के अधिकांश सदस्य अपने जीवन काल के किसी समय में इस से पीड़ित जरूर होते हैं. भारत में पथरी की समस्याओं का प्रसार 11% है और महिलाओं के मुकाबले पुरुषों में यह समस्या 3 गुना अधिक देखी जाती है.

किडनी स्टोन चार प्रकार की होती हैं-

1 .कैल्शियम स्टोन- कैलशियम स्टोन किडनी स्टोन का सबसे आम प्रकार है. वह कैलशियम ऑक्सलेट, फास्फेट या मेलीएट से बने हो सकते हैं. कम ऑक्सलेट युक्त खाद पदार्थ खाने से इस प्रकार के स्टोन के विकास के जोखिम को कम किया जा सकता है. आलू के चिप्स, मूंगफली, चॉकलेट, पालक और चुकंदर में ऑक्सलेट की मात्रा ज्यादा होती है.

2 .यूरिक एसिड स्टोन- इस प्रकार की किडनी की पथरी महिलाओं की तुलना में पुरुषों में ज्यादा आम है. यह गाउट की समस्या से पीड़ित लोग या कीमो थेरेपी से गुजर रहे लोगों को होने की संभावना अधिक रहती है. इस प्रकार की पथरी तब होती है जब मूत्र में एसिड की मात्रा बहुत ज्यादा होती है. यूरिन से समृद्ध आहार के स्तर को बढ़ा सकते हैं. एक बेरंग पदार्थ होता है जो पशु प्रोटीन में मौजूद होता है. जैसे- मछली, सेल्फिश और मांस. 

3 .स्टूवाइट स्टोन- इस प्रकार की पथरी ज्यादातर मूत्र पथ के संक्रमण से ग्रस्त महिलाओं में देखी जाती है. यह स्टोन बड़े हो सकते हैं और मूत्र में बाधा पैदा कर सकते हैं. यह दोनों गुर्दे के संक्रमण के कारण होते हैं. बुनियादी संक्रमण का इलाज स्टूवाइट स्टोन के विकास को रोक सकते हैं.

4 .सिस्टीन स्टोन- इस स्टोन के मामले बहुत कम होते हैं. यह उन पुरुषों और महिलाओं में होते हैं जिनमें अनुवांशिक विकार सिस्टिनूरिया यानि एक अनुवांशिक विकार जिसमें अमीनो एसिड सिस्टम द्वारा बनने वाले सिस्टीन स्टोन गुर्दे, मूत्र वाहिनी, मूत्राशय में बनते हैं. इस प्रकार की पथरी में सिस्टीन एक एसीड जो शरीर में स्वाभाविक रूप से होता है. का रिसाव किडनी से मूत्र में होता है.

किडनी में पथरी होने के कारण-

अनुवांशिकता- कुछ लोगों को अनुवांशिकता के कारण गुर्दे की पथरी होने की संभावना अधिक होती है. गुर्दे की पथरी कैल्शियम की अधिक स्तर के कारण हो सकती है. मूत्र में कैल्शियम का उच्च स्तर पीढ़ी दर पीढ़ी पारित हो सकता है. कुछ दुर्लभ अनुवांशिक बीमारियां भी गुर्दे की पथरी का कारण बन सकती है जैसे- ट्यूमर एसिडोसिस या शरीर के कुछ रसायनों को पचाने में समस्याएं जैसे सिस्टीन ओक्सलेट और यूरिक एसिड व अन्य रसायन.

आहार- यदि कोई व्यक्ति पथरी के गठन के प्रति असंवेदनशील होता है उसे तो पशु प्रोटीन और नमक से उच्च जोखिम हो सकता है, हालांकि अगर कोई व्यक्ति पथरी के गठन के लिए अति संवेदनशील नहीं है तो संभवत आहार उन्हें कोई जोखिम नहीं होता है.

भौगोलिक स्थान- आपके रहने की जगह भी आपके गुर्दे में पथरी होने के जिम्मेदार हो सकती है. भारत में महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के हिस्सों में गुर्दे की पथरी काफी प्रचलित है. गर्म जलवायु के क्षेत्र में रहना और अपर्याप्त द्रव सेवन करना पथरी होने का कारण हो सकती है.

दवाएं- ड्यूरेटिक्स और ज्यादा कैल्शियम वाले एंटासिड लेने वाले लोगों के मूत्र में कैल्शियम का स्तर अधिक हो सकता है. जिससे पथरी का बनना हो सकता है. विटामिन ए और विटामिन डी से भी कैल्शियम का स्तर बढ़ सकता है. एचआईवी के उपचार के लिए इंडिनवीर दवा से इंडिन पथरी का गठन हो सकता है. इसके अलावा कुछ दवाएं पथरी के गठन का कारण बन सकती है.

अंतर्निहित बीमारियां- पुरानी बीमारियां गुर्दे की पथरी के निर्माण से संबंधित होती है. जैसे सिस्टिक फाइब्रोसिस, रिनल ट्यूबलर, एसिडोसिस और इन्फ्लेमेटरी बाउल रोग.

जानें- गुर्दे ( किडनी ) में पथरी होने के कारण, लक्षण और रामबाण आयुर्वेदिक उपाय

किडनी स्टोन के लक्षण-

गुर्दे की पथरी से हमेशा लक्षण नहीं होते हैं. छोटी पथरिया बिना दर्द के अपने आप पेशाब के साथ निकल सकती है. हालांकि बड़ी पथरियां पेशाब के प्रवाह को अवरूद्ध कर सकती है. जिससे कई दर्दनाक लक्षण हो सकते हैं जो गंभीर भी हो सकते हैं.

आपकी पथरी का स्थान और आपके मूत्र पथ में इसकी प्रगति के अनुसार आप के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं. बहुत से लोगों को उनकी पीठ से एक तरफ या पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द होता है, दर्द अक्सर अचानक शुरू होता है और फिर समय के अनुसार अधिक तीव्र होता जाता है. प्रभावित क्षेत्र में जांघ के बीच का भाग और पेट का निचला हिस्सा भी शामिल हो सकता है. आपको लगातार दर्द हो सकता है या दर्द कुछ मिनट तक होने के बाद गायब भी हो सकता है और फिर वापिस आ सकता है. कुछ मामलों में दर्द की तीव्रता में उतार-चढ़ाव भी हो सकता है. तीव्रता का स्तर आप की पथरी का मूत्र पथ में एक अलग स्थान पर जाने पर निर्भर करता है. गुर्दा की पथरी का दर्द आमतौर पर रात में या सुबह- सुबह शुरू होता है इसका कारण यह है कि आमतौर पर रात में या सुबह कम पेशाब करते हैं और सुबह मूत्र वाहिनी आमतौर पर संकुचित होती है. दर्द के अलावा गुर्दे की पथरी के कई अन्य लक्षण भी हो सकते हैं जैसे-

पेशाब करते समय दर्द होना, पेशाब में खून आना, पेशाब में धुंधलापन होना, पेशाब से असामान्य गंध आना, सामान्य से अधिक बार पेशाब करने की इच्छा, एक बार में थोड़ा सा ही पेशाब होना, गुर्दे की पथरी के कारण पेशाब का रंग भूरा, गुलाबी या लाल हो सकता है.

इसके अलावा गुर्दे में पथरी होने के कारण मतली या उल्टी होना, ठंड लगना, बुखार होना, इतना गंभीर दर्द होना कि आप आराम से बैठ, खड़े या लेट ना पाए. मूत्र में खून आना पेशाब में कठिनाई होना इत्यादि लक्षण हो सकते हैं.

किडनी स्टोन से बचाव उपाय-

भरपूर पानी पिए- पानी में मौजूद उन पदार्थों को गलाता है जो पथरी पैदा करते हैं. प्रतिदिन इतना पानी पिए जिससे आपको दो लीटर पेशाब आए. नींबू पानी और संतरे का जूस पीने से भी आपको मदद मिल सकती है. इन पदार्थों में मौजूद साइट्रेट पथरी के गठन को रोकने में मददगार होता है.

कैल्शियम लें- कम कैल्शियम ऑक्सलेट के स्तर में बढ़ोतरी हो सकती है. जिससे गुर्दे की पथरी हो सकती है. इसे रोकने के लिए अपनी उम्र के अनुसार से जरूरी कैल्शियम की मात्रा में खाद पदार्थों से कैल्शियम प्राप्त करने की कोशिश करें. क्योंकि कुछ अध्ययनों के मुताबिक कैलशियम सप्लीमेंट्स लेने से भी पथरी हो सकती है.

सोडियम कम लें- सोडियम आहार गुर्दे की पथरी कर सकता है क्योंकि यह आपके मूत्र में कैल्शियम की मात्रा बढ़ाता है. इसलिए गुर्दे की पथरी से बचने के लिए अपने आहार में सोडियम की मात्रा कम करें. वर्तमान दिशा निर्देशों के अनुसार दैनिक सोडियम सेवन 2300 मिलीग्राम तक सीमित होना चाहिए. यदि आपको पहले भी सोडियम से गुर्दे की पथरी हुई है तो सोडियम का दैनिक सेवन 1500 मिलीग्राम तक कम करने का प्रयास करें. यह आपके रक्तचाप और दिल के लिए भी लाभदायक होगा.

पशु प्रोटीन सेवन करें- रेड मीट, मुर्गी, अंडे और समुद्री भोजन जैसे खाद्य पदार्थ खाने में यूरिक एसिड का स्तर बढ़ जाता है. जिससे गुर्दे की पथरी होने की संभावना अधिक हो जाती है. उस प्रोटीन आहार से साइट्रेट यानी मूत्र में मौजूद एक रसायन स्टोन के गठन को रोकता है. स्तर भी कम होता है.

ना लें पथरी बनाने वाले खाद्य पदार्थ- चुकंदर, चॉकलेट, पालक, रेवतचीनी (एक प्रकार का फल) और अधिकांश में ऑक्सलेट होता है और कोला में फोस्फेट होता है जो दोनों ही पथरी का गठन करते हैं. यदि आप पथरी की समस्या से पीड़ित हैं तो आपका डॉक्टर आपको इन खाद्य पदार्थों से बचने, इन्हें कम करने की सलाह दे सकते हैं.

कुछ अध्ययनों से पता चला है कि जो पुरुष सप्लीमेंट के रूप में विटामिन सी की खुराक लेते हैं उन्हें गुर्दे की पथरी होने का जोखिम अधिक होता है. ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि शरीर विटामिन सी को ऑक्सलेट में बदल देता है.

जानें- गुर्दे ( किडनी ) में पथरी होने के कारण, लक्षण और रामबाण आयुर्वेदिक उपाय

किडनी स्टोन से छुटकारा पाने के घरेलू एवं आयुर्वेदिक उपाय-

1 .सोत, वरुण छाल, गोखरू, पाषाणभेद तथा ब्रम्ही इनके क्वाथ में गुड़ तथा यवक्षार मिलाकर पीने से कठिन तम पथरी दूर हो जाती है.

2 .वरुण छाल, गोखरू, पाषाणभेद तथा ब्राम्ही इनके साथ में गुड़, शिलाजीत तथा ककड़ी या खीरे की बीज का कल्क मिलाकर पीने से अभेध पथरी नष्ट हो जाती है.

3 .गोखरू, अरंड के बीच, सोठ तथा वरुण छाल का क्वाथ पथरी नाशक है.

4 .वरुण की छाल का क्षार 4 तोला, यवक्षार 2 तोला और गुड़ 1 तोला मिलाकर सुबह खाली पेट प्रतिदिन एक- एक तोला की मात्रा में सेवन करने से पथरी तथा मूत्रकृच्छ नष्ट हो जाता है.

5 .वरुण की छाल का क्वाथ बनाकर उसमें कुंलथी, सेंधा नमक, चावल का चूर्ण, भाभीरंग, खान पदमाख, यवक्षार, पेठे के बीज की मिगी, गोखरू इनका कल्क बना क्वाथ में घी मिलाकर अग्नि पर सिद्ध कर लें. इसके सेवन से कष्ट साध्य पथरी, मूत्रकृच्छ, मुत्राघात तथा मुत्रा वरोध निश्चित ही दूर हो जाता है.

6 .वरुण की छाल को जलाकर भस्म कर पानी में डालें और घोल दें. इसके बाद उस पानी को वस्त्र में छानें. छानें हुए उस पानी में जवाखार मिलाकर तब तक पकाएं जब तक कि सब जलकर खुश्क ( राख ) ना हो जाए. फिर इस खुश्क चूर्ण को निकालकर गुड़ में मिलाकर सेवन करें.

इसके सेवन से भयंकर पथरी, प्लीहा, गुल्म, पेट की पीड़ा, आम का संचय, भयंकर मूत्रकृच्छ, अग्नि मंदता दूर होकर पत्थर के समान कठोर पथरी नष्ट हो जाती है. ऐसा भाव प्रकाश में लिखा है.

नोट- यह पोस्ट शैक्षणिक उद्देश्य से लिखा गया है. किसी भी प्रयोग से पहले आप योग्य वैध की सलाह जरूर लें. यह जानकारी अच्छी लगे तो लाइक, शेयर जरूर करें. धन्यवाद.

स्रोत आयुर्वेद गाइड.

Post a Comment

0 Comments