कई गंभीर बीमारियों का रामबाण इलाज है अमृतधारा, जानें बनाने और इस्तेमाल करने की विधि

कल्याण आयुर्वेद- आज हम आपको अमृतधारा बनाने की विधि और इस्तेमाल करने के तरीकों के बारे में बताने की कोशिश करेंगे. इसे संजीवनी बिंदु के नाम से भी जाना जाता है.

कई गंभीर बीमारियों का रामबाण इलाज है अमृतधारा, जानें बनाने और इस्तेमाल करने की विधि

अमृतधारा बनाने और इस्तेमाल करने की विधि-

कपूर 4 ग्राम.

ज्वाइन सत्व 2 ग्राम.

पिपरमिंट 1 ग्राम.

इन तीनों चीजों को लेकर आप किसी कांच के शीशे में ढक्कन बंद करके धूप में रख दे. यह पानी की तरह तरल बन जाएगा. आपका अमृतधारा तैयार है.

उपयोग- इसे लगाने से हर तरह के सिर दर्द, चर्म रोग, दाद, दिनाय, फोड़े- फुंसी चोट जख्म आदि में आराम होते हैं. इसे आप 20 ग्राम वैसलीन में 10 बूंद अमृतधारा मिलाकर प्रयोग करें.

चोट में प्रयोग करने के लिए 10 ग्राम सरसों तेल में 10 बूंद अमृतधारा डालकर मालिश करें. दर्द से तुरंत राहत मिलेगी.

यदि कान में दर्द हो तो 2 तोला सरसों तेल में एक लहसुन जलाएं. ठंडा होने पर चार बूंद अमृतधारा मिलाकर कान में डालें.

पेट दर्द, अफारा, कब्ज, खांसी आदि में बतासे में पांच बूंद डालकर खाएं. दिन में ऐसा दो-तीन बार करने से काफी राहत मिलता है. पेट दर्द, अफारा, कब्ज हैजा में तो तुरंत ही राहत देता है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कई आयुर्वेदिक कंपनियां अमृतधारा बनाती है. आप चाहें तो इसे बनी बनाई भी खरीदकर इस्तेमाल कर सकते हैं.

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आयुर्वेद चिकित्सक- डॉ. पी.के. शर्मा.

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