फैटी लीवर होने के कारण, लक्षण और घरेलू उपाय

कल्याण आयुर्वेद- आज के समय में व्यस्त दिनचर्या और अनियमित जीवनशैली के चलते शरीर में कई तरह की बीमारियां हो रही है इन्हीं बीमारियों में से एक बीमारी है लीवर में चर्बी का जमा होना, जिसे फैटी लिवर कहा जाता है. फैटी लीवर की समस्या खासकर उन लोगों को जल्दी घेरती है जो चर्बी युक्त भोजन और शराब का सेवन अधिक करते हैं. लीवर की कोशिकाओं में सामान्य से अधिक फैट जमा होने से कई तरह की समस्याएं हो सकती है. भविष्य में इससे कई तरह के नुकसान भी हो सकते हैं. ऐसी स्थिति होने पर जरूरी है कि अपने खान-पान में सुधार किया जाए और नियमित जीवन शैली अपनाई जाए.

फैटी लीवर होने के कारण, लक्षण और घरेलू उपाय

हालांकि फैटी लीवर को दूर करने के लिए कुछ घरेलू और आसान नुस्खों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. लेकिन इन नुस्खों को इस्तेमाल करने से पहले योग्य डॉक्टर की सलाह अवश्य लें.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि शरीर में लीवर की भूमिका फ्री फायर की होती है जो शरीर की गंदगी को साफ कर शरीर को स्वस्थ बनाने में मदद करता है.

फैटी लिवर के लक्षण-

आमतौर पर फैटी लिवर पर कोई संबंधित लक्षण नहीं होता है. आप थकान या सष्ट पेट की बेचैनी का अनुभव कर सकते हैं. आपका यकृत थोड़ा बड़ा हो सकता है जो आपको डॉक्टर शारीरिक परीक्षा के दौरान पता लगा सकते हैं.

हालांकि यकृत में अतिरिक्त वसा सूजन होने का कारण बन सकता है. यदि लीवर में सूजन हो जाती है तो ये लक्षण हो सकते हैं जैसे भूख की कमी, पेट में दर्द, शारीरिक कमजोरी, थकान, वजन घटना, उलझन, अकबकाहट, फुला हुआ तरल पदार्थ भरा, पीलिया और आंखों का पीलापन, उल्टी, जी मिचलाना इत्यादि.

फैटी लिवर रोग से कैसे बचे-

अपनी यकृत की रक्षा करना फैटी लीवर और इसकी जटिलताओं को रोकने की सर्वोत्तम तरीकों में से एक है. इसमें कम मात्रा में मादक पदार्थ पीना या नहीं पीना.

फैटी लीवर दूर करने के घरेलू उपाय-

मिल्क थिस्ल-

मिल्क थिस्ल एक तरह का पौधा होता है. जिसमें बैगनी रंग के फूल लगे होते हैं. इसका प्रयोग औषधियां बनाने में होता है. मैरीलैंड मेडिकल सेंटर यूनिवर्सिटी के अनुसार मिल्क थिस्ल से लीवर और पिताशय के इलाज का पुराना इतिहास रहा है. कुछ सामान्य परिस्थितियों में मिल्क थिस्ल से लीवर के साथ-साथ हेपेटाइटिस, पथरी और सिरोसिस का भी इलाज किया जा सकता है. फैटी लीवर के इलाज में यह विशेष रूप से उपयोगी है. मिल्क थिस्ल में फ्लेवोनॉयड्स कंपलेक्स होता है. जिसे सिलेमारिन कहते हैं जो खतरनाक टॉक्सिन से लीवर का बचाव करता है. साथ ही डैमेज लीवर से उसका उत्थान करता है जो कि फैटी लिवर को स्वस्थ बनाने में मददगार होता है.

हल्दी-

वैसे तो हल्दी कई गुणों से भरपूर है जो कई रोगों को दूर करने और रोकने में मददगार होता है. चीनी और आयुर्वेदिक दवाओं में भी हल्दी का इस्तेमाल किया जाता है. हल्दी लीवर, त्वचा और पाचन तंत्र को ठीक करने में मददगार होती है. ह्रदय रोग और गठिया में भी हल्दी का इस्तेमाल किया जाता है. हल्दी में एंटी इन्फ्लेमेटरी के साथ-साथ एंटीऑक्सीडेंट के गुण भी मौजूद होते हैं जो लिवर सेल्स को डैमेज होने से बचाता है. आप हल्दी का इस्तेमाल खाने में मसाले के तौर पर या किसी अन्य तरीके से भी कर सकते हैं.

एक्सरसाइज-

एक्सरसाइज कई रोगों को दूर करने के लिए मददगार होता है. आप एक्सरसाइज के माध्यम से भी लिवर फैट को कम कर सकते हैं. इसके लिए आपको अपनी दिनचर्या के साथ-साथ जीवन शैली में भी कुछ परिवर्तन करने होंगे. साथ ही ख्याल रखें कि अचानक से अधिक एक्सरसाइज ना करें. पहले कम प्रभाव वाले एक्सरसाइज की शुरुआत करें और धीरे-धीरे एक्सरसाइज की गति बढ़ाएं. आप लिवर फैटी को कम करने के लिए पैदल चलकर भी मदद ले सकते हैं. पैदल चलना पूरे शरीर को एक्सरसाइज करता है.

लहसुन-

लहसुन लगभग हर किसी के खाने का हिस्सा होता है. यदि आप नहीं खाते हैं और लीवर को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो आप लहसुन का उपयोग शुरू कर सकते हैं. यह लिवर को स्वस्थ रखने में मदद करता है क्योंकि लहसुन में हैपेटॉप्रोटेक्टिव का गुण पाया जाता है जो कि लीवर की कार्य क्षमता को बढ़ाता है. साथ ही लहसुन में पाए जाने वाले विशेष तत्व कुछ लीवर के डिटॉक्स करने की प्रक्रिया को बढ़ाता है. इसके लिए आप लहसुन का उपयोग प्रतिदिन खाने पीने चीजों में जोड़कर कर सकते हैं या लहसुन के एक- दो टुकड़े सुबह खाली पेट खा सकते हैं.

नोट- यह पोस्ट शैक्षणिक उद्देश्य से लिखा गया है. किसी भी प्रयोग से पहले आप डॉक्टरी सलाह जरूर लें.

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