जानें- श्वेत कुष्ठ ( ल्यूकोडरमा ) के लक्षण, कारण और शर्तिया घरेलू उपाय

कल्याण आयुर्वेद- श्वेत कुष्ठ के मुख्य लक्षण- शरीर के चमड़े के स्थान- स्थान पर सादा व उस स्थान के रोम तक सफेद हो जाते हैं. कभी-कभी एक तरफ का पूरा अंग सफेद हो जाता है. इस रोग में चमड़ी के ऊपरी भाग का सूक्ष्म पतला पर्दा केवल आक्रांत होता है. अतः रोगी कुछ भी कष्ट अनुभव नहीं करता है. केवल चेहरा या शरीर के जिस हिस्से श्वेत कुष्ठ होता है. वह बुरा दिख पड़ता है. श्वेत कुष्ठ स्पर्शाक्रामक रोग नहीं है. यानी एक ग्रसित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में जाने वाला नहीं है. इसलिए किसी दूसरे को इससे भय नहीं रहता है.

जानें- श्वेत कुष्ठ ( ल्यूकोडरमा ) के लक्षण, कारण और शर्तिया घरेलू उपाय

श्वेत कुष्ठ ( ल्यूकोडरमा ) होने के कारण-

इस रोग की उत्पत्ति का वास्तविक कारण आज तक पता नहीं चल पाया है. किसी का कहना है स्नायवीय किसी कारणवश यह होता है. किसी का कहना है शरीर में उपदंश या पारा विष इत्यादि रहने पर होता है जो हो. यह सब अनुमान पर ही निर्भर है. यह कभी-कभी जन्म से ही प्रकट होता है.

श्वेत कुष्ठ ( ल्यूकोडरमा ) के शर्तिया घरेलू उपाय-

पमार के बीज एक चम्मच, तुख्मी पिंडार एक चम्मच, बकुची एक चम्मच और अंजीर 1 पीस, इन चारों को रात को एक कप पानी में भिगोकर रख दें. सुबह इसे मसलकर पानी को छानकर पी लें और बचे हुए चीजों को पीस कर पेस्ट की तरह बना कर श्वेत कुष्ठ ( ल्यूकोडरमा ) पर लगाने से आशातीत लाभ होता है. इसके प्रयोग से 1 सप्ताह के अंदर ही त्वचा का रंग बदलने लगता है और नियमित कुछ दिनों तक प्रयोग करने से श्वेत कुष्ठ से छुटकारा मिल जाता है. यह आजमाया हुआ नुस्खा है. ( सभी चीजें पंसारी की दूकान में मिल जाती है.)

Note- यह पोस्ट शैक्षणिक उद्देश्य से लिखा गया है प्रयोग से पहले आप किसी आयुर्वेद डॉक्टर की सलाह जरूर लें.

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