जहरीला समझे जाने वाले अकवन के चमत्कारी फायदे जानकर चौंक जाएंगे

कल्याण आयुर्वेद- अकवन को आक, मदार, आंकड़ा इत्यादि नामों से जाना जाता है. यह जंगल में बहुत अधिक मात्रा में मिलता है हालांकि यह सभी क्षेत्रों में पाया जाने वाला पौधा है. आपको बता दें कि होम्योपैथ में कैलोटरोपिस जाईगैंटिया नाम से औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है.

जहरीला समझे जाने वाले अकवन के चमत्कारी फायदे जानकर चौंक जाएंगे

आक का रस कटु ( कड़वा ) तीखा, उष्ण, गर्म प्रकृति बात और कफ को दूर करने वाला होता है. कान दर्द, कृमि, बवासीर, खासी, कब्ज, पेट के रोग, त्वचा रोग, वातरोग, सूजन नाशक होता है. इसका प्रयोग घरेलू नुस्खों के रूप में बहुतायत किया जाता है. आज हम आपको आक के फायदों के बारे में बताने की कोशिश करेंगे.

तो चलिए जानते हैं आक के फायदे-

मलेरिया- अकवन के फूल की दो टोपी बिना खिले हुए फूल जरा सा गुड़ में लपेट कर मलेरिया बुखार आने से पहले खाने से मलेरिया बुखार नहीं चढ़ता है.

बाला- तिल के तेल गर्म करके बाला निकलने के स्थान पर लगाएं. अकवन का पत्ता गर्म करके उस पर यही तेल लगाकर बांध दें. अकवन के फूल की डोडी के अंदर का छोटा टुकड़ा गुड़ में लपेटकर खाने से बाला नष्ट हो जाता है.

जुकाम- जुकाम हो जाए, नाक बंद हो तो अकवन के दो चम्मच दूध में दो चम्मच चावल भिगो दें और छाया में पड़ा रहने दें. जब सुख जाए तो पीसकर कपड़े से छान लें. इसे जरा सा सुंगघें नाक से छींके आकर नाक खुल जाएगी. जुकाम ठीक हो जाएगा, रुका हुआ पानी टपकने लगेगा, इसे सूंघने से छींक अधिक आए तो देसी गरम घी करके सूंघें.

एड़ियों का दर्द- एक मुट्ठी अकवन के फूल दो गिलास पानी में रात को उबालें और इसकी भाप से एड़ियों को सेंकें. इसके बाद गरम-गरम फूलों को एडियो पर बांधें. 1 सप्ताह नित्य इस प्रकार करते रहने से एड़ियों का दर्द दूर हो जाता है. इतना ही नहीं इस प्रयोग से शरीर के किसी भी अंग में दर्द हो रहा हो तो उस हिस्से को सेक करने से लाभ होता है.

पथरी- अकवन के 2-3 फूल पीसकर एक गिलास दूध में घोलकर सुबह रोजाना 40 दिन तक पीने से पथरी नष्ट हो जाता है.

बवासीर- सूर्योदय से पहले आप अकवन के तीन बूंद दूध बताशे में डालकर खाने से बवासीर में काफी लाभ होता है.

आधे सिर का दर्द- यदि दर्द सूर्योदय के साथ बढ़ता घटता हो तो सुबह सूरज उगने से पहले एक बतासे पर दो बूंद अकवन के दूध को टपका कर खाएं काफी लाभ होगा.

पेट दर्द- अकवन के जड़ की छाल, नौसादर, गेरू, काली मिर्च सभी बराब मात्रा में एक-एक चम्मच लेकर पीसकर चूर्ण बना लें. इसमें आधा चम्मच कपूर पीसकर मिला लें. अब गर्म पानी के साथ आधा चम्मच चूर्ण लेने से पेट दर्द, कब्ज, दस्त, तिल्ली, यकृत आदि पेट के सभी रोग, सर्दी, खांसी, बुखार में लाभ होता है.

बिच्छू का विष- यदि किसी को बिच्छू काट ले तो विष उतारने के लिए आक की जड़ को पानी में पीसकर लेप लगाया जाता है. इससे बिच्छू का विष उतर जाता है.

दांत दर्द- दांत में किसी प्रकार के दर्द में अकवन के दूध में हल्का सा सेंधा नमक मिलाकर दर्द वाले हिस्से पर लगा देने से लाभ मिलता है.

कनपटी में गांठ- कान और कनपटी में गांठ निकलने एवं सूजन होने पर अकवन के पत्ते पर चिकनाई लगा कर हल्का गर्म करके बांधते हैं. कान में दर्द हो तो आक के दूध पत्ते पर घी लगाकर आग पर सेक कर उसका रस निकाल कर ठंडा कर कान में एक-एक बूंद डालने से लाभ होता है.

अकवन के नुकसान-

अकवन के पौधे से निकलने वाले दूध में जहरीले गुण होते हैं. जिसका उपयोग पशुओं को बेहोश करने के लिए किया जाता है. आक का उपयोग करते समय ध्यान रखना चाहिए कि इसका थोड़ा सा भी दूध आंखों में ना जाने पाए यदि इसका दूध आंखों में चला जाए तो यह की दृष्टि को हानि पहुंचा सकता है.

यदि इसका उपयोग से दुष्परिणाम सामने आने पर पलाश के पत्तों को उबालकर उसका पानी पीने से इसकी विषाक्तता दूर हो जाती है. अकवन का दूध लगाने से घाव हो जाए तो इस पानी से घाव को धोने चाहिए.

नोट- यह पोस्ट शैक्षणिक उद्देश्य से लिखा गया है किसी भी प्रयोग से पहले योग्य वैध की सलाह जरूर लें.

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