100 से भी अधिक रोगों का एक दवा है यह जड़ी- बूटी, जानें इस्तेमाल करने के तरीके

कल्याण आयुर्वेद- हमारे आसपास कई ऐसे पेड़- पौधे, घास- फूस होते हैं जो औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. लेकिन इसकी सही जानकारी नहीं होने के कारण हम इसका उपयोग नहीं कर पाते हैं. उन्हीं जड़ी- बूटियों में से एक है शतावरी जो काफी गुणकारी है.

100 से भी अधिक रोगों का एक दवा है यह जड़ी- बूटी, जानें इस्तेमाल करने के तरीके

शतावरी के इस्तेमाल से आप कुछ रोगों में तुरंत ही फायदा ले सकते हैं. शीतवीर्य, ग्रहणी, मेधा, वृक्ष, अर्ष, बवासीर, अतिसार, रक्त, वात, प्रदर, गठिया, नपुंसकता, सूखी खांसी, मूत्र विकार, पथरी इन सभी रोगों पर महर्षि चरक और सुश्रुत ने शतावरी को आयु देने वाली जड़ी-बूटी बताया है.

शतावरी का स्वाद शीतल, कड़वी, स्वादिष्ट, मधुर, बुद्धिवर्धक, अग्नि वर्धक, स्निग्ध और पौष्टिक है.

* 10 ग्राम शतावरी का चूर्ण काली मिर्च के साथ ठंडे पानी में सुबह शाम पीने से  जुकाम ठीक हो जाता है.

* 15 ग्राम शतावरी, 10 ग्राम अडूसा के पत्ते और 150 मिलीलीटर पानी को एक साथ उबालें. अब इसमें स्वादानुसार मिश्री डालकर उबालें और पानी को ठंडा होने के बाद दिन में तीन बार पीने से खांसी दूर होती है.

* 15 से 20 ग्राम शतावरी का चूर्ण 150 मिलीलीटर दूध और 150 मिलीलीटर पानी के साथ मिलाकर इसे अच्छी तरह से उबाल लें और उसमें थोड़ी मिश्री मिलाकर सुबह-शाम पीने से प्रदर रोग ठीक होगा. साथ ही शतावरी का चूर्ण शहद के साथ खाने से श्वेत प्रदर ठीक हो जाता है.

* अनिद्रा यानी नींद ना आने की बीमारी से परेशान व्यक्ति चावल की खीर में शतावरी का एक चम्मच चूर्ण और एक चम्मच घी मिलाकर सेवन करें तो नींद नहीं आने की समस्या दूर हो जाती है.

* वात रोग से परेशान व्यक्ति 20 ग्राम शतावरी का रस, पीपल के पत्तों का रस बराबर मात्रा में लेकर गाय के एक कप दूध में मिलाकर सुबह-शाम सेवन करें तो वात रोग नष्ट हो जाता है.

* यदि मूत्र विकार की समस्या हो तो 5 ग्राम शतावरी का चूर्ण और 5 ग्राम गोखरू का चूर्ण एक गिलास पानी के साथ सेवन करें तो यह समस्या दूर हो जाती है.

* पथरी से परेशान लोगों के लिए 25 से 30 ग्राम शतावरी के रस में एक कप गाय का दूध मिलाकर पीना लाभदायक होता है. इससे पथरी, किडनी, पेशाब के रोग ठीक हो जाते हैं.

नोट- यह पोस्ट शैक्षिक उद्देश्य से लिखा गया है किसी भी प्रयोग से पहले योग्य डॉक्टर की सलाह जरूर लें. धन्यवाद.

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