महिला व पुरुषों के गुप्त रोगों का रामबाण इलाज है पीपल का पेड़, जानें इस्तेमाल करने के तरीके

कल्याण आयुर्वेद- हिंदू शास्त्रों के अनुसार पीपल को पूजनीय पेड़ माना गया है. शास्त्रों में बताया गया है कि इसमें सभी देवी- देवताओं का वास होता है. इसलिए इसकी पूजा की जाती है. लेकिन आयुर्वेद की मानें तो पीपल औषधीय गुणों से भरपूर होता है जो महिला व पुरुषों के कई गुप्त रोगों को जड़ से खत्म करने की शक्ति रखता है.

महिला व पुरुषों के गुप्त रोगों का रामबाण इलाज है पीपल का पेड़, जानें इस्तेमाल करने के तरीके

आयुर्वेद के अनुसार पीपल कसैला, शीतल, मधुर, शरीर का वर्ण निखारने वाला, कफ एवं रक्त दोष नष्ट करने वाला एवं पौष्टिक गुण युक्त होता है. यह सभी प्रकार की दुर्बलता, रक्त विकार एवं चर्म रोगों, दंत एवं मसूड़ों के दर्द निवारनार्थ, यकृत- प्लीहा की बीमारियों में भी अत्यंत फायदेमंद होता है पुरुषों के रोगों जैसे वीर्य की कमी, वीर्य पतलापन, नपुंसकता, बहुमुत्रता और स्त्री रोगों में प्रदर, बांझपन, गर्म शोधन इत्यादि के लिए काफी फायदेमंद होता है.

पुरुष रोगों में-

पीपल पर लगने वाला फल को छाया में सुखाकर पीसकर मैदा छानने वाली चलनी से छान लें. अब चौथाई चम्मच ढाई सौ ग्राम दूध में मिलाकर पिएं. इसके सेवन करने से वीर्य बढ़ता है, नपुंसकता दूर होती है, बहुमूत्र की समस्या दूर होगी एवं कब्ज भी दूर हो जाएगा.

पीपल की अन्तर्छाल स्तंभक एवं वीर्य वर्धन का गुण रखती है. इसके लिए अन्तर्छाल का काढ़ा बनाकर पीना चाहिए.

महिलाओं के लिए-

पीपल के फल को छाया में सुखाकर मैदे की तरह एक पाव दूध के साथ सेवन करे तो बंध्यत्व दूर होकर संतान उत्पन्न करती है. योनि रोग, मासिक धर्म के विकार दूर हो जाते हैं, प्रदर, प्रमेह, सफेद पानी आना की समस्या दूर हो जाती है.

बाँझपन और गर्भ शोधन के लिए-

बाँझपन या गर्भ शोधन के लिए महिला को रजोनिवृत्ति के बाद लगातार 5 दिन तक प्रतिदिन पीपल के 1 ताजे पत्ते को गाय के दूध में उबालकर पीना चाहिए. इससे गर्भाशय शुद्ध होता है और गर्भ स्थापना होने पर उत्तम संतान जन्म लेता है. जब तक गर्भ स्थापना ना हो यह प्रयोग हर महीने करना चाहिए. इसके लिए हर बार नया ताजा पत्ते का इस्तेमाल करना चाहिए.

नोट- यह पोस्ट शैक्षिक उद्देश्य से लिखा गया है. किसी भी प्रयोग से पहले आप योग्य डॉक्टर की सलाह जरूर लें.

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