किशोरावस्था के बच्चों में दिखे ये लक्षण तो माता-पिता न नजरअंदाज, पड़ सकता है भारी

कल्याण आयुर्वेद- आजकल के बदलते लाइफस्टाइल में खुद को दूसरों से अच्छा साबित करने की होड़ युवाओं में तनाव ( डिप्रेशन ) की सबसे बड़ी वजह है. यह कंपटीशन स्कूल, कॉलेज, कोचिंग, प्लेग्राउंड, दोस्त यहां तक कि परिवार में अपने भाई- बहन के साथ भी जारी रहता है. बच्चों पर मां- बाप की उम्मीदों पर खरा उतरने और पढ़ाई खेलकूद में हमेशा अच्छा करने का दबाव होता है और कब यह तनाव में बदल जाता है पता ही नहीं चलता है जो कई बार घातक साबित होता है.

किशोरावस्था के बच्चों में दिखे ये लक्षण तो माता-पिता न नजरअंदाज, पड़ सकता है भारी

डिप्रेशन या तनाव के लक्षण-

ज्यादातर समय बच्चे का उदास या चिड़चिड़ा रहना.

दुखी या क्रोधित महसूस करना.

उन चीजों से खुशी ना मिलना जिससे पहले भी खुश हो जाते थे.

वजन या खाने में बदलाव आना यानी बहुत ज्यादा या बहुत कम खाना.

रात को बहुत कम सोना या दिन में बहुत ज्यादा सोना.

परिवार या दोस्तों से अलग-थलग रहना.

ऊर्जा की कमी हमेशा बने रहना.

आसान से काम को भी करने में असमर्थ महसूस करना.

आत्म सम्मान में गिरावट आना.

ध्यान केंद्रित करने में परेशानी.

मौत या आत्महत्या की लगातार विचार आना.

अगर यह लक्षण 2 सप्ताह तक बने रहते हैं तो खतरे की घंटी हो सकते हैं. इसलिए अवसाद के निदान और उपचार के लिए डॉक्टर से जल्द से जल्द संपर्क करना चाहिए.

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