मंदाग्नि ( खाना नही पचना ) के लक्षण एवं घरेलू उपाय

 कल्याण आयुर्वेद- उदर संबंधी विकारों में मंदाग्नि भी मुख्य विकार है. आजकल ज्यादातर लोग मंदाग्नि की समस्या से परेशान रहते हैं. क्योंकि लोगों ने प्राकृतिक सरल जीवन व्यतीत करना छोड़ दिया है. शारीरिक श्रम को त्याग कर आराम का काम करना ज्यादा पसंद करते हैं. हर खाने की वस्तु शुद्ध खाद्य पदार्थ के स्थान पर मिलावटी खाद्य पदार्थ मिलने लगे हैं. जिसकी वजह से मंदाग्नि रोग में बढ़ोतरी होती जा रही है.


मंदाग्नि ( खाना नही पचना )  के लक्षण एवं घरेलू उपाय


मंदाग्नि का अर्थ है भोजन पचाने वाली परिपाक शक्ति का कमजोर होना. भोजन से ही शरीर की वृद्धि होती है. भोजन में रस, रक्त, मांस, मेदा,अस्थि, मजा एवं शुक्र धातु का निर्माण होता है. भोजन को पचाने वाली अग्नि जब कमजोर हो जाती है तो भोजन का ठीक ढंग से पाचन नहीं हो पाता है. शरीर को धारण करने वाली धातुएं ही तैयार नहीं हो पाती है तो शरीर कैसे कायम रह सकता है. ऐसी स्थिति में शरीर का कमजोर होना निश्चित है. भोजन प्रतिदिन की हुई शारीरिक कमजोरी की पूर्ति करता है. किंतु मंदाग्नि के कारण भोजन का पाचन नहीं होने से शरीर धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है. अतः मंदाग्नि बेहद ही खराब रोग है.

मंदाग्नि ( खाना नही पचना )  के लक्षण एवं घरेलू उपाय


वर्तमान में मंदाग्नि रोग अधिक हो गया है. इसका कारण है हमारा अनियमित आहार-विहार. हमारे आयुर्वेद शास्त्रों में भी रोगों की उत्पत्ति का कारण अनियमित आहार-विहार ही दर्शाया गया है. आज के युग में लोगों ने प्राकृतिक सरल जीवन बिताना छोड़ दिया है. शारीरिक श्रम के स्थान पर लोग आराम पसंद अधिक करने लगे हैं. खाद्य वस्तुएं मिलावटी मिलने लगी है. इसके कारण मंदाग्नि रोग में बढ़ोतरी हो गई है.

मंदाग्नि रोग के लक्षण-

भूख कम लगना, पेट फूलना, पेट में वायु का संचय होना, कभी कब्ज एवं कभी पतले दस्त का होना, पेट में दर्द होना, छाती में जलन होना, जी मिचलाना, डकारे आना, नींद नहीं आना, सिर में दर्द होना, शरीर में धीरे-धीरे कमजोरी आती है एवं रक्ताल्पता जैसी समस्या होने लगती है.

मन्दाग्नि सहायक उपाय-

1 .मंदाग्नि की चिकित्सा के स्थान पर यदि नियमों का पालन किया जाए तो यथोचित होगा. मंदाग्नि का मुख्य कारण हमारे खान-पान में गड़बड़ी का होना है. अतः खानपान में सुधार आवश्यक है. बहुत से व्यक्तियों की यह आदत होती है कि वह दिन में चार-पांच बार भोजन करते हैं जो उचित नहीं है. आवश्यकता से अधिक भोजन पेट में जाता रहा तो कुछ समय बाद निश्चित रूप से मंदाग्नि की बीमारी हो सकती है.

2 .भोजन में चटपटा, अधिक मिर्च- मसाला वाला करते हैं तो भोजन के चुनाव में उसके स्वादिष्ट होने की अपेक्षा इस बात का भी ध्यान जरूरी है कि भोजन हल्का सुपाच्य एवं पौष्टिक तत्वों से भरपूर हो संतुलित भोजन करना उचित है ना कि भारी गरिष्ठ एवं स्वादिष्ट भोजन करना.

3 . मंदाग्नि का बहुत बड़ा कारण है. शारीरिक परिश्रम का ना करना. जिन व्यक्तियों का काम इस तरह का है कि उन्हें शारीरिक श्रम की अपेक्षा मानसिक श्रम अधिक करना पड़ता है तो उनके भोजन को ठीक से पालन हेतु उचित यही रहेगा कि वह नियमित रूप से व्यायाम करें.

4 .यदि कब्ज रहता है तो जुलाब लेने के स्थान पर अग्नि बल बढ़ाने वाले उपाय करना अच्छा है. अग्नि के बलवान होने पर भोजन का परिपाक ठीक तरह से होगा. भोजन का पाचन ठीक होगा तो रस धातुएं भी ठीक निर्मित होगी एवं दस्त भी साफ आता रहेगा. ऐसी स्थिति में जुलाब लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

जब जठराग्नि सम हो तब नियम पूर्वक नित्य आहार-विहार से उसकी रक्षा करो. क्योंकि अग्नि के संग होने की स्थिति में कोई भी रोग आप पर हमला नहीं कर सकता है. जब अग्नि विषम हो तब वायु को तीक्ष्ण हो तब पीत को एवं मंद हो तब कफ को शांत करें. अगर आप ऐसा करेंगे तो बवासीर, अतिसार, संग्रहणी, राज्यक्षमा आदि कोई भी रोग आपको कष्ट नहीं पहुंचा सकता है.

5 . मन्दाग्नि में मलावरोध यानी आंतों में मल का उचित समय से अधिक समय तक पड़ा रहना या सड़ना है. मल सड़ने या पड़े रहने से आसानी से नहीं निकलता है एवं अनेक रोगों की उत्पत्ति का कारण बन जाता है.
इस प्रकार मंदाग्नि की चिकित्सा की अपेक्षा नियमित आहार-विहार का पालन कर रोग से बचाव करना उपयुक्त है. इसका अभिप्राय नहीं है कि मंदाग्नि रोग होने पर चिकित्सा ना की जाए नियमों का पालन करते हुए उचित औषधियों का सेवन करने पर कोई भी रोग में शीघ्र लाभ होता है. अतः इस और समुचित ध्यान देना चाहिए.

मंदाग्नि की शिकायत होने पर घरेलू उपाय-

1 .अजवायन 40 ग्राम एवं सेंधा नमक 10 ग्राम लेकर दोनों को कूट पीसकर चूर्ण बना लें. अब इसमें से आधा चम्मच की मात्रा में सुबह गर्म पानी से सेवन करें मंदाकिनी में लाभ होगा.

मंदाग्नि ( खाना नही पचना )  के लक्षण एवं घरेलू उपाय


2 .पक्की मीठी इमली के पन्ने में सेंधा नमक काली मिर्च एवं मिलाकर पीने से मंदाग्नि में लाभ होता है.

मंदाग्नि ( खाना नही पचना )  के लक्षण एवं घरेलू उपाय 


3 .हरड़ के चूर्ण को सोंठ और गुड़ के साथ अथवा सेंधा नमक के साथ सेवन करने से मंदाग्नि में अच्छा लाभ होता है.

4 .काली मिर्च, सोठ, पीपल, जीरा एवं सेंधा नमक सभी को बराबर मात्रा में लेकर कूट पीसकर चूर्ण बना लें. अब इस चूर्ण में से आधा चम्मच की मात्रा में खाना खाने के बाद पानी के साथ सेवन करने से पाचन शक्ति बढ़ती है.

5 .जायफल का चूर्ण शहद के साथ खाने से मंदाग्नि में लाभ होता है.

मंदाग्नि ( खाना नही पचना )  के लक्षण एवं घरेलू उपाय


6 .अदरक को छीलकर उसमें सेंधा नमक लगाकर खाने से अग्नि प्रदीप्त होती है और पाचन शक्ति बढ़ती है. जिससे भूख लगती है.

मंदाग्नि ( खाना नही पचना )  के लक्षण एवं घरेलू उपाय


7 .छोटी पीपल और अजमोद 40- 40 ग्राम, हरे 150 ग्राम, 34 ग्राम सेंधा नमक और काला नमक 5-5 ग्राम सभी को कूट पीसकर चूर्ण बना लें. इस चूर्ण में से 5 से 10 ग्राम की मात्रा में गर्म पानी के साथ सेवन करने से कब्ज दूर होता है एवं पेट दर्द आदि में लाभ होता है.

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