ताउम्र स्वस्थ रहने के लिए हर उम्र के लोग अपनाएं ये टिप्स

कल्याण आयुर्वेद- हर उम्र वर्ग की स्वास्थ्य समस्याएं आमतौर पर अलग-अलग होती है. जैसे 30 से 39 साल की उम्र वाले लोगों की स्वास्थ्य समस्याएं 50 से 59 साल की उम्र वालों से अलग होती है. लेकिन स्वस्थ जीवन शैली खानपान व एक्सरसाइज पर अमल कर विभिन्न आयु वर्ग के व्यक्ति स्वस्थ रह सकते हैं.

ताउम्र स्वस्थ रहने के लिए हर उम्र के लोग अपनाएं ये टिप्स

चलिए जानते हैं विस्तार से-

सफर करते हुए अधिकतर लोग झपकी लेते नजर आ जाते हैं या फिर कभी गौर करें तो बेवजह ही आपकी सांस तेज चलने लगती है. दिन भर में कई बार आपकी हृदय गति बेवजह तेज या कम हो जाती है. लेकिन स्थिर नहीं रह पाती है. सुबह उठने के साथ ही तरोताजा महसूस करने की बजाय थकान महसूस होती है. 30 40 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते सीढ़ियों से एक मंजिल भी चढ़ने पर हफ्नें लगते हैं. यह लक्षण इस बात के सूचक है कि हम स्वस्थ दिनचर्या का पालन नहीं कर रहे हैं.

अगर संक्रामक और जन्मजात होने वाली बीमारियों को छोड़ दिया जाए तो ज्यादातर जितनी भी रोग होते हैं. उनकी वजह हमारा खान-पान, रहने का ढंग, उठने और सोने का समय और यहां तक कि हम कैसा सोचते हैं. इन बातों पर आधारित होती है. इसका ध्यान रखने से तमाम बीमारियों से बचा जा सकता है और खुद के साथ-साथ परिवार के सदस्यों को भी स्वस्थ रखा जा सकता है.

लगभग 80 फ़ीसदी लोग बीमार होने की सभी वजहों को जानने के बाद भी सही आदतों को नहीं अपना पाते हैं. इसका नतीजा यह होता है कि 40 की उम्र होने पर उन्हें तीन से चार दवाएं अनचाहे लेनी पड़ जाती है. कुछ लोग केवल यह सोच कर निश्चिंत रहते हैं कि जब बीमार पड़ेंगे तो देखा जाएगा. पहले से इतनी चिंता क्यों की जाए. लेकिन दवाओं के बढ़ते इस्तेमाल और इसकी कम होते असर को देखते हुए अब बचाव ही एकमात्र विकल्प है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने बहुत पहले ही इस बात के लिए चेताया था कि अगली पीढ़ी की एंटीबायोटिक दवाएं अभी बाजार में उपलब्ध नहीं है और वर्तमान एंटीबायोटिक दवाएं तेजी से असरहीन हो रही है. विशेषज्ञों की मानें तो एलोपैथी दवाओं पर निर्भरता कम करना ही आने वाले समय में आपको बीमार होने से बचा सकेगा. इसके लिए पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर भी विश्वास करना बेहद जरूरी है.

बीमार होने का इंतजार न करें बल्कि कुछ आदतों को अपनी दिनचर्या में शामिल करें. एलोपैथी, आयुर्वेद, होम्योपैथी और यहां तक कि योग साधना भी स्वस्थ जीवन के लिए दिनचर्या को सुधारने की बात करती है. कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि बेहद छोटी पर अहम बातों को ध्यान में रखकर अपने स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल की जा सकती है और बीमारियों से खुद को काफी हद तक दूर रखा जा सकता है. देश के कुछ जाने-माने विशेषज्ञ चिकित्सकों का पैनल जिसमें एलोपैथ, होम्योपैथ व आयुर्वेद के विशेषज्ञ शामिल है. खास तौर पर हमारे पाठकों को बता रहा है कि उम्र के विभिन्न पड़ाव पर हम कब और कैसे अपनी आदतों को सुधारकर और सब कुछ बातों का ध्यान रखकर सेहतमंद बने रह सकते हैं.

30 से 39 साल की उम्र में-

वैसे तो आजकल बीमार होने की कोई उम्र नहीं है. बावजूद इसके 30 साल की उम्र होने तक माइग्रेन या फिर आंखों की रोशनी कम होने जैसी कई समस्याएं उत्पन्न हो जाती है. इनसे बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है.

* साल में एक बार स्वास्थ्य जांच जरूर करा लें, यदि सिगरेट और शराब का सेवन करते हैं तो ईसीजी और एलएफटी या लीवर की जांच जरूरी है.

* सप्ताह में कम से कम 3 दिन एरोबिक व्यायाम को नियमित दिनचर्या में शामिल करें.

* 8 से 10 घंटे की भरपूर नींद लें.

* खाने में फाइबर और प्रोटीन को जरूर शामिल करें.

* दिन में 2 घंटे से अधिक सोशल नेटवर्किंग साइट्स का इस्तेमाल न करें.

* अगर संभव हो तो सप्ताह में 1 दिन मोबाइल का कम से कम इस्तेमाल करें.

* साल में एक बारआयुर्वेदिक पंचकर्म चिकित्सा कराएं जो शरीर के सभी नुकसानदेह पदार्थों को बाहर निकाल देती है. गरिष्ठ भोजन से दूर रहें.

* प्रिजर्वेटिव या संरक्षित खाद पदार्थों को खाने में बिल्कुल शामिल न करें. 30 साल की उम्र के बाद अधिकतर लोग तनाव के शिकार हो जाते हैं इसलिए तनाव से बचें.

* दवाओं की जगह आयुर्वेद में शिरोधारा से तनाव का शत-प्रतिशत इलाज संभव है. फाइबर और प्रोटीन युक्त आहार का अधिक सेवन करें.

* ऑफिस में लंबे समय तक कुर्सी पर न बैठे. 1 घंटे के बाद कुर्सी से उठकर कम से कम 50 पद टहलना फायदेमंद होगा.

40 से 49 साल की उम्र में-

40 से 49 साल की उम्र में अगर हाई ब्लड प्रेशर और नियंत्रित है तो यह स्थिति कालांतर में दिल की बीमारी की वजह बन सकती है. इस उम्र में व्यायाम के साथ ही योग को भी दिनचर्या में शामिल करना जरूरी हो जाता है. इन सुझावों पर अमल करें.

* खाने में ऐसी चीजें शामिल करें, जिनमें कार्बोहाइड्रेट कम हो प्रोटीन और फाइबर की मात्रा अधिक, कम से कम 8 घंटे की नींद जरूर लें.

* इस आयु वर्ग के लोगों को साल में तीन बार ऋतु संधि यानी एक मौसम के जाने और दूसरे के शुरू होने के समय के समय पंचकर्म चिकित्सा करानी चाहिए. इस चिकित्सा से उनकी स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं दूर हो सकती है.

* स्वस्थ रहने के लिए प्रतिदिन 10,000 कदम पैदल चलना चाहिए. ऐसा करने से 3500 कैलोरी बर्न हो सकती है. इसे अपनी आदत में शामिल करना जरूरी है.

* सुबह हरी घास पर पैदल चलें या फिर हरे पेड़ों को देखें. ऐसा करने से आंखों को राहत मिलेगी.

* 3 सीढ़ियां चढ़ने पर यदि ह्रदय गति बहुत तेज हो जाए तो हृदय रोग विशेषज्ञ को जरूर दिखाएं.

50 से 59 साल की उम्र में-

50 से 59 साल की उम्र के दौरान बीमारियों से ग्रस्त होने की आशंका बहुत अधिक हो जाती है. इस दौरान जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द के साथ ही थकान महसूस होती है. इस आयु वर्ग में शुमार किए जाने वाले लोग इन सुझावों पर अमल करें.

* शरीर की ऊर्जा को संरक्षित रखने के लिए इस आयु वर्ग में स्वस्थ रहने के लिए केवल एलोपैथी की दवाओं पर ही निर्भर न रहा जाए बल्कि आयुर्वेद और अन्य चिकित्सा पद्धतियों को ही अपनाया जाय.

* आहार में ऐसी चीजें शामिल करें जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाती हो. विटामिन सी, कैल्शियम और विटामिन बी का सेवन संतुलित मात्रा में करना चाहिए. यह पोषक तत्व दूध, पनीर और हरी सब्जियों में प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं.

60 साल के बाद-

बुजुर्गों में स्वास्थ्य के संदर्भ में जागरूकता पिछले 10 सालों में बढ़ गई है. यही वजह है कि पहले जहां बुजुर्गों की औसत आयु सीमा 65 से 70 हुआ करती थी. वहीं अब यह 80 से 85 मानी जाती है. इस संदर्भ में कुछ सुझाव.

* बीमारियों से बचाव के बारे में लोगों में जागरूकता काफी बढ़ी है. इस कारण देश में लोगों की औसत आयु बढ़ी है. औसत आयु के बढ़ने का कारण विभिन्न रोगों का टीका लगवाना और सही समय पर बीमारियों की जांच के जरिए पता चलना है.

* आयुर्वेद और होम्योपैथी की तरह ही एलोपैथ भी अब प्रिजर्वेटिव हेल्थ पर अधिक काम कर रही है. ओपीडी में ऐसी बुजुर्गों की संख्या अब पहले से अधिक बढ़ी है जो अपनी सेहत के लिए काफी फिक्र मंद है. ऐसे लोग बीमारियों से बचाव वाली विधियों पर अमल करते हैं.

* 60 साल की उम्र और इसके बाद की उम्र वाले लोग अपनी उम्र वाले लोगों से मिले- जुले.

* सुबह टहलना, नियमित रूप से संतुलित आहार सेवन करना, तनाव मुक्त जीवन और सबसे महत्वपूर्ण बात खुश रहने की आदत आपको जल्दी बीमार नहीं होने देगी.

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