डायबिटीज के मरीज पाचन तंत्र का रखें विशेष ध्यान, करें ये उपाय

कल्याण आयुर्वेद- देश में पिछले एक दशक में डायबिटीज में बड़ी तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है. दुनिया में सबसे ज्यादा डायबिटीज के मरीज भारत में ही है. यह मर्ज परीक्ष रूप से साइलेंट किलर की भांति शरीर के विभिन्न अंगों की क्रियाशीलता और कार्यप्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है.

डायबिटीज के मरीज पाचन तंत्र का रखें विशेष ध्यान, करें ये उपाय

डायबिटीज की चपेट में बच्चे, युवा, प्रोद्ध सभी आयु वर्ग के लोग प्रभावित हो रहे हैं. डायबिटीज का दुष्प्रभाव कालांतर में शरीर के कई अंगों पर पड़ता है. जैसे- जब इसका दुष्प्रभाव आंखों की रेटिना पर पड़ता है तब इसे मेडिकल भाषा में डायबिटिक रेटिनोपैथी करते हैं. इसी तरह जब इसका दुष्प्रभाव किडनी पर पड़ता है तो इसे डायबिटिक नेफ्रोपैथी कहते हैं. यही नहीं डायबिटीज का मर्ज शरीर के पाचन संस्थान पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है.

कारण-

डायबिटीज में ब्लड ग्लूकोज के स्तर में बढ़ोतरी हो जाती है. इस कारण भोजन के पाचन और इसके शरीर में अवशोषित होने की प्रक्रिया प्रभावित होती है और ग्लूकोज का पाचन अवरोधित हो जाता है. पाचन क्रिया असामान्य होने के कारण असहज महसूस करता है. आयुर्वेद के अनुसार सामान्य पाचन प्रणाली के सुचारू संचालन के लिए जठराग्नि उत्तरदाई है. वात और पीत के प्रकोप के अनुसार ही इस मर्ज के लक्षण प्रकट होते हैं.

मानसिक कारणों का पाचन पर असर-

सामाजिक दबाव प्रतिस्पर्धा से उत्पन्न तनाव, चिंता और डिप्रेशन के कारण अप्रत्यक्ष रूप से कहीं ना कहीं स्थिर चित्त ग्लूकोज लेवल को प्रभावित करता है. जिसका असर मुख्य रूप से पाचन प्रणाली पर पड़ता है. इसके फलस्वरूप यह लक्षण उत्पन्न हो सकती हैं.

निगलने में परेशानी.

जी मिचलाना.

उल्टी होना.

पेट भरा हुआ महसूस होना.

कब्ज महसूस होना.

एसिडिटी व हार्टबर्न की समस्या.

एसिड रिफ्लक्स.

कैसे करें उपाय-

चिकित्सक से परामर्श लेकर शुगर को नियंत्रित करें.

लो शुगर और कार्बोहाइड्रेट डाइट को प्राथमिकता दें.

छोटे-छोटे अंतराल पर भोजन करें.

भोजन के बाद अवश्य टहलें.

चावल, मैदा और ब्रेड से परहेज करें.

मोटा अनाज, अंकुरित सलाद, हरी सब्जियां तथा दालों को अपने भोजन में प्राथमिकता दें.

अधिक से अधिक जल तथा पेय पदार्थों का प्रयोग करें.

प्राणायाम तथा योगासन करें.

आयुर्वेद के अनुसार कब्ज का मुख्य कारण वात की अधिकता और जल की कमी है. एसिडिटी, अफारा एवं हार्टबर्न का कारण पित्त की अधिकता होती है.

हरीतकी चूर्ण कब्ज दूर करने में मददगार है.

हिंग्वाष्टक चूर्ण, गैस, अफारा और एसिडिटी दूर करने में लाभप्रद है. अजवाइन का चूर्ण भी पेट से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में लाभप्रद है.

रात को खाना खाने के बाद एक चम्मच त्रिफला चूर्ण का सेवन करना पेट से जुड़ी समस्याओं से छुटकारा दिलाता है.

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