जानिए- सबसे पहले किसने किया था छठ पर्व

हिंदू धर्म में छठ पर्व का विशेष महत्व है. छठ सिर्फ एक पर्व ही नहीं बल्कि महापर्व है जो पूरे 4 दिन तक चलता है. इसकी शुरुआत नहाए- खाए से होती है जो डूबते और उगते हुए सूरज को अर्घ देकर समाप्त होती है. यह पर्व साल में दो बार मनाया जाता है. पहली बार चैत्र में और दूसरी बार कार्तिक मास में. चैत्र शुक्ल पक्ष पर मनाए जाने वाले को चैती छठ और कार्तिक शुक्ल पक्ष षष्ठी पर मनाए जाने वाले पर्व को कार्तिकी छठ कहा जाता है.

जानिए- सबसे पहले किसने किया था छठ पर्व

पारिवारिक सुख- समृद्धि और मनोवांछित फल प्राप्ति के लिए छठ पर्व मनाया जाता है. इसका एक अलग ऐतिहासिक महत्व भी है.

माता सीता ने भी की थी सूर्य देव की पूजा- छठ पूजा की परंपरा कैसे शुरू हुई, इस संदर्भ में कई कथाएं प्रचलित है. एक मान्यता के अनुसार जब राम सीता 14 साल के बाद बनवास से अयोध्या लौटे तब रावण वध के पाप से मुक्त होने के लिए उन्होंने ऋषि-मुनियों के आदेश पर राजसूर्य करने का फैसला लिया. पूजा के लिए उन्होंने मुग्दल ऋषि को आमंत्रित किया. मुग्दल ऋषि ने मां सीता पर गंगाजल छिड़क कर पवित्र किया और कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को सूर्य देव की उपासना करने का आदेश दिया. इससे सीता ने मुग्दल ऋषि के आश्रम में रहकर 6 दिनों तक सूर्य देव भगवान की पूजा की थी. सप्तमी को सूर्योदय के समय फिर से अनुष्ठान कर सूर्यदेव से आशीर्वाद प्राप्त किया था.

महाभारत काल से हुई थी छठ पर्व की शुरुआत- हिंदू मान्यताओं के मुताबिक कथा प्रचलित है कि छठ पर्व की शुरुआत महाभारत काल से हुई थी. इस पर्व को सबसे पहले सूर्य पुत्र कर्ण ने सूर्य की पूजा करके शुरू किया था. कहा जाता है कि कर्ण भगवान सूर्य के परम भक्त थे और प्रतिदिन घंटों तक पानी में खड़े होकर अर्घ्य देते थे. सूर्य की कृपा से ही वह महान योद्धा बने. आज भी छठ में अर्घ्य दान की यही परंपरा प्रचलित है.

द्रोपति ने भी रखा था छठ व्रत- छठ पर्व के बारे में एक कथा और भी प्रचलित है. इसकी किउदंती के मुताबिक जब पांडव सारा राजपाट जुए में हार गए तब द्रोपती ने व्रत रखा था. इस व्रत से उनकी मनोकामना पूरी हुई थी और राजपाठ सब कुछ वापस प्राप्त हो गया था. लोक परंपरा के अनुसार सूर्य देव और छठी मैया का संबंध भाई- बहन का है इसलिए छठ के मौके पर सूर्य की आराधना फलदाई मानी गई है.

यह जानकारी अच्छी लगे तो लाइक, शेयर जरूर करें. धन्यवाद.

Post a Comment

0 Comments